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किलर मोमेंट में भी धड़कनों को कैसे काबू कर लेते हैं ग्रेंडमास्टर गुकेश, 11 सेकेंड से पिछड़ने पर भी हार्ट रेट 70, पर विरोधी का 134, ऐसा क्यों


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How Gukesh Heart Rate Calm: विश्व शतरंज चैंपियनशिप के किलर मोमेंट में भी भारत के ग्रेंडमास्टर गुकेश डोम्माराजू अपनी धड़कनों एकदम शांत रख लेते हैं. एक जांच में पाया गया है कि जब खेल में वो पिछड़ भी रहे होते हैं …और पढ़ें

किलर मोमेंट में भी धड़कनों को कैसे काबू कर लेते हैं ग्रेंडमास्टर गुकेश

ग्रेंडमास्टर गुकेश डोम्माराजू

How Gukesh Heart Rate Calm: दुनिया में सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बनने वाले शतरंज के बादशाह गुकेश डोम्माराजू यूं ही नहीं चैंपियन हैं. उन्होंने अपनी धड़कनों को इतना साध रखा है कि कठिन से कठिन क्षणों में भी तनाव उनके दिमाग पर हावी नहीं होता. वर्तमान में जो वर्ल्ड चैंपियनशिप चल रहा है उसमें इस क्षमता का पता लगाने के लिए गुकेश और उनके विरोधी कारुवाना के हार्ट बीट की माप ली गई तो दुनिया हैरान रह गया. इस जांच में पाया गया कि जब गुकेश खेल के एक लेवल में 11 सेकेंड से पिछड़ रहा था तब भी उनका हार्ट रेट 70 ही था जबकि उनके विपक्षी का हार्ट रेट 134 तक पहुंच गया. यहां तक कि गुकेश जब एक लेवल में दो सेकेंड शेष रहते हुए अपना अगला चाल चला तो भी उनका हार्ट रेट 74 ही था. उनमें कोई घबराहट नहीं थी. वे एकदम शांत थे, रत्तीभर बेचैनी नहीं. शतरंज के हर लेवल में एक निश्चित समय में निश्चित बाजी चलनी होती है. अगर निश्चित समय में निश्चित बाजी नहीं चलती तो अगले लेवल में समय घट जाता है. गुकेश इन परिस्थितियों में भी खुद को एकदम शांत रख लेते हैं. आखिर ऐसा कोई कैसे कर सकता है. क्या ऐसा करना मेडकली संभव है. इस विषय पर हमने फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से बात की.

इमोशन को कंट्रोल करना बहुत जरूरी
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि कुछ लोग ऐसा बिल्कुल कर सकते हैं. अगर कोई अपने इमोशन पर कंट्रोल कर ले तो वह किसी भी मुश्किल परिस्थिति में अपने हार्ट रेट को स्थिर रख सकता है. हार्ट रेट यानी धड़कनों को स्थिर रखने के लिए आपकी भावनाओं पर काबू होना जरूरी है. कुछ लोग ऐसा अपने आप कर लेते हैं लेकिन कुछ लोग ट्रेनिंग से ऐसा कर सकते हैं. हार्ट रेट बढ़ने के कई कारण है-भावनात्मक आवेग, शारीरिक श्रम, भय, निराशा, एक्सरसाइज आदि. ऐसे में यदि आप एकदम रिलेक्स रहते हैं और एंग्जाइटी को काबू में रखते हैं तो हार्ट रेट को स्थिर कर पाने में सफल हो सकते हैं. बेचैनी खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी है. अगर आप बेचैन रहेंगे तो हार्ट रेट का बढ़ना तय है. इसलिए सबसे ज्यादा एंग्जाइटी को कम करने का प्रयास किया जाता है. इसके लिए एथलीट को अलग तरह से ट्रेनिंग दी जाती है. हार्ट रेट को स्थिर रखने के लिए कार्डियोपल्मोनरी ट्रेनिंग होती है. इसमें एयरोबिक एक्सरसाइज की जाती है. यानी रनिंग, स्विमिंग, साइक्लिंग आदि. इन सबसे तनाव दूर होता है और तनाव दूर होगा तो इंसान में बेचैनी नहीं होगी और वह रिलेक्स फील करेगा. जो खिलाड़ी के ट्रेनर होते हैं वह इस स्थिति से निपटने के लिए भावनात्मक और शारीरिक अभ्यास कराते हैं.

इमोशन और एंग्जाइटी को कंट्रोल करने के तरीके
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि मुख्य रूप से कार्डियोपल्मोनरी ट्रेनिंग में योगा, प्राणायाम, गहरी सांसों वाली एक्सराइज, एयरोबिक एक्सरसाइज और मेडिटेशन आदि का अभ्यास कराया जाता है. इन सारी चीजों से आपमें एंग्जाइटी कम होगी और आप रिलेक्स महसूस करेंगे जिससे आप अपनी भावनाओं पर कंट्रोल कर सकेंगे. योगा और प्राणायाम जैसे अभ्यास से दिमाग को शांति मिलती है जिससे एंग्जाइटी कम होती है. हर खिलाड़ी को इसके लिए ट्रेन किया जाता है. उसे बताया जाता है कि कठिन परिस्थितियों में खुद की भावनाओं पर कैसे काबू रखी जाए. हालांकि इसमें हर व्यक्ति की अलग-अलग क्षमता होती है. ऐसा भी हो सकता है कि एक ही तरह से दो खिलाड़ी ट्रेनिंग लें लेकिन एक खिलाड़ी बेहतर प्रशिक्षित हुआ हो और दूसरा खिलाड़ी इसमें पिछड़ गया हो. क्योंकि हर व्यक्ति की क्षमता अलग-अलग होती है. सबसे बड़ी बात है कि अगर इस ट्रेनिंग से एंग्जाइटी लेवल कम होता है तो खिलाड़ी रेशनल थिकिंग कर पाते हैं. जो खिलाड़ी रेशनल थिकिंक (तार्किक और स्पष्ट विचार) कर पाते हैं, वहीं जीतते हैं. जो खिलाड़ी ऐसा नहीं कर पाते वे जीत नहीं पाते. यह व्यक्तिगत क्षमता और जीजिविषा पर निर्भर है. हर कोई एक जैसा नहीं होता. कितना आपने अपने आपको ट्रेंड किया और कितनी आपकी क्षमता है यह सब इस बात पर निर्भर करता है.

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