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Newborn Jaundice: नवजात शिशु में पीलिया होना बहुत ही कॉमन है. लेकिन क्या आप जानते है ये समस्या क्यों होती है? शिशु की जल्दी रिकवरी के लिए कौन सी सावधानी और इलाज की जरूरत होती है? इस लेख में आज आप डॉक्टर से शिशु के सेहत से जुड़े इन जरूरी सावलों के जवाब जानेंगे.
नवजात बच्चों में जॉन्डिस के डायग्नोसिस को लेकर माता-पिता अक्सर बहुत चिंतित रहते हैं. हालांकि, नवजात बच्चों में जॉन्डिस के ज्यादातर मामले हार्मलेस होते हैं. वक्त पर सही मेडिकल केयर मिलने से तुरंत ठीक हो सकते हैं. नवजात शिशुओं में पीलिया जन्म के बाद के पहले कुछ हफ्तों में होने वाली एक कॉमन प्रॉब्लम है शिशु में पीलिया होने के कई कारण होते हैं, इसमें से एक कारण ब्रेस्ट मिल्क भी होता है. इसे ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस भी कहते हैं. यह समस्या अक्सर जीवन के पहले सप्ताह में होती है जब ब्रेस्टफिडिंग शुरू किया जाता है.
डॉ. शगुन वालिया,बाल रोग एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, मेदांता अस्पताल, नोएडा बताती हैं कि ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस आमतौर पर पहले और दूसरे हफ्ते में होता है. इस दौरान जब बच्चे को मां का दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है, तो इससे आंतों में बिलीरुबिन का अवशोषण बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय लिवर पूरी तरह से विकसित नहीं होता है. ऐसे खून में भी बिलीरुबिन का लेवल बढ़ने लगता है और त्वचा पीली पड़ने लगती है.
कैसे ठीक होता है ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस
डॉक्टर बताती हैं कि ज्यादातर मामलों में ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस के लिए बिलीरुबिन लेवल की निगरानी और ऑब्जर्वेशन के अलावा किसी इलाज की जरूरत नहीं होती है.
क्या मां का दूध देना बंद करना चाहिए?
डॉक्टर ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस में स्तनपान बंद करने की सलाह नहीं देती हैं. क्योंकि मां का दूध पोषण और इम्यूनोलॉजिकल फायदे देता है. स्तनपान में अस्थायी रुकावट केवल बिलीरुबिन लेवल के गंभीर सीमा तक बढ़ने के रेयर मामले में ही सख्त मेडिकल देखरेख में होनी चाहिए.
क्या ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस को प्रिवेंट किया जा सकता है?
ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस को रोकने का कोई तरीका नहीं है क्योंकि यह मां के दूध की अनोखी बनावट से जुड़ा है. रोकथाम पर ध्यान देने के बजाय, पीलिया के मूल कारण का पता लगाने और उस कारण को ठीक से मैनेज करने पर जोर देना चाहिए.
शिशु के पीलिया का इलाज कैसे होता है?
फोटोथेरेपी इलाज का सबसे आम तरीका है और यह नवजात बच्चों में हल्के से मध्यम पीलिया के मामलों के इलाज का सबसे असरदार तरीका भी है. लाइट थेरेपी बच्चे के शरीर में बिलीरुबिन को ऐसे रूप में बदल देती है जिसे बच्चा पेशाब और मल के जरिए जल्दी से इसे बाहर निकाल सकता है. गंभीर पीलिया वाले शिशु को एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन की जरूरत हो सकती है. हालाकि, यह बहुत कम होता है. फोटोथेरेपी के अलावा, कुछ बच्चों को आगे की जांच और इलाज की जरूरत हो सकती है, जिसमें दवाएं, एंटीवायरल, फेनोबार्बिटोने, या स्टेरॉयड या सर्जरी शामिल हो सकती है.
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शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर Bharat.one Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
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