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खेड़ी गांव से सफलता की मिसाल! महिलाओं ने बनाया सेहतमंद मल्टीग्रेन ब्रांड, सेहत के लिए फायदे ही फायदे

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MP News: खेड़ी गांव की महिलाएं अब सिर्फ घरेलू काम तक सीमित नहीं, बल्कि एक कंपनी की मालिक बन गई हैं. “स्वयं सहायता समूह” और “इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसायटी” की मदद से उन्होंने मल्टीग्रेन आटा बनाकर अपने गांव और आसपास के बाजारों में पहचान बनाई है.

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव खेड़ी में बदलाव की एक बड़ी कहानी लिखी जा रही है, जहां कभी महिलाएं सिर्फ घरेलू कामों तक सीमित थीं. वहीं अब वे एक कंपनी की मालिक बन चुकी हैं. ये कहानी है हिम्मत, मेहनत और आत्मनिर्भरता की, जहां गांव की महिलाएं मिलकर बना रही हैं “मल्टीग्रेन” जैसे सेहतमंद उत्पाद और वो भी अपने ही हाथों से.

खेड़ी गांव की इन महिलाओं को इस मुकाम तक पहुंचाने में बड़ा सहयोग मिला है “स्वयं सहायता समूह” और “इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसायटी” का. इन संस्थाओं ने न केवल इन महिलाओं को ट्रेनिंग दी, बल्कि संसाधन, मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच भी दिलाई. अंतिमबाला पटेल (समूह की सदस्य) बताती है कि”हमने बहुत छोटे से शुरू किया था. गांव में ही एक छोटी यूनिट लगाई. पहले सिर्फ जान-पहचान के लोग ही हमारा प्रोडक्ट खरीदते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे हमारी पहचान बढ़ रही है. खासतौर पर शुगर और बीपी के मरीज, और बच्चे भी हमारे मल्टीग्रेन आटे को पसंद कर रहे हैं.”

इन महिलाओं ने “मल्टीग्रेन” आटा तैयार करने की तकनीक सीखी, जिसमें गेहूं, ज्वार, बाजरा, चना, मक्का और अन्य पोषक अनाजों का सही मिश्रण होता है. यह आटा न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है.कई खंडवा वासी खाते है कि हमने पहले बाजार का आटा खरीदते थे, लेकिन जब से इनका मल्टीग्रेन आटा लिया है, तब से फर्क साफ महसूस होता है. अब बच्चों को भी पसंद आता है और शुगर का कंट्रोल भी बेहतर हुआ है.”यह सब कुछ आसान नहीं था. समाजिक रुकावटें, संसाधनों की कमी, और परिवारिक जिम्मेदारियों के बीच इन महिलाओं ने हार नहीं मानी. उन्होंने सीखा कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं.

अंतिम बाला पटेल कहती है कि”हम अब और महिलाओं को जोड़ रहे हैं. हमारी टीम बड़ी हो रही है. हम चाहते हैं कि खेड़ी गांव की तरह हर गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें.”खेड़ी गांव की ये महिलाएं सिर्फ उत्पाद नहीं बना रहीं, वो बना रही हैं एक नई सोच, नई पहचान और एक नया आत्मविश्वास. इनकी यह यात्रा प्रेरणा है हर उस महिला के लिए, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहती है.खेड़ी गांव से निकली यह कहानी यह साबित करती है कि अगर अवसर मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी उद्योगपति बन सकती हैं और एक छोटी शुरुआत भी बड़े बदलाव की नींव रख सकती है.

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Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

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