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आयुर्वेद में इंसान के शरीर को तीन प्रमुख प्रकृतियों में बांटा गया है, वात, पित्त और कफ. ये तीनों मिलकर ही शरीर की जैविक प्रकृति का निर्माण करते हैं. किसी व्यक्ति में वात प्रधान होता है, किसी में पित्त, तो किसी …और पढ़ें
जानकारी देते आयुर्वेदाचार्य
हाइलाइट्स
- शरीर की प्रकृति वात, पित्त और कफ होती है.
- पित्त प्रधान व्यक्ति को ठंड में गर्मी महसूस होती है.
- कफ प्रधान व्यक्ति को गर्मी में ठंडक महसूस होती है.
समस्तीपुर:- अक्सर हम देखते हैं कि एक ही मौसम में लोगों की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है. कुछ लोग ठंड के मौसम में भी केवल टी-शर्ट में घूमते हैं, जबकि कुछ लोग गर्मी में भी स्वेटर पहनते नजर आते हैं. यह सिर्फ आदत या आदान-प्रदान नहीं, बल्कि हमारे शरीर की प्रकृति से जुड़ा हुआ मामला है. Bharat.one की टीम ने इस अनोखी परिस्थिति के पीछे का कारण जानने के लिए समस्तीपुर जिले के शिवाजी नगर प्रखंड स्थित आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर रंजन से विशेष बातचीत की.
क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य ?
डॉ. रंजन ने Bharat.one को बताया कि आयुर्वेद में इंसान के शरीर को तीन प्रमुख प्रकृतियों में बांटा गया है, वात, पित्त और कफ. ये तीनों मिलकर ही शरीर की जैविक प्रकृति का निर्माण करते हैं. किसी व्यक्ति में वात प्रधान होता है, किसी में पित्त, तो किसी में कफ. यही कारण है कि एक जैसा मौसम सभी पर एक जैसा असर नहीं डालता.
जन्म से तय होती है शरीर की प्रकृति
डॉ. रंजन बताते हैं कि इंसान का शरीर जन्म लेते समय ही विशेष प्रकार की प्रकृति के साथ आता है. इसके निर्माण में छह मुख्य कारण काम करते हैं. जैसे मातृ बीज (माता की प्रकृति), पितृ बीज (पिता की प्रकृति), रसज भाव (गर्भावस्था में महिला द्वारा लिया गया आहार), सत्वज भाव (गर्भावस्था के दौरान मानसिक स्थिति), सत्वामज्य भाव (भ्रूण की पोषण प्रक्रिया), आत्मज भाव (जन्म के बाद आत्मिक स्वभाव) इन सभी भावों के मेल से व्यक्ति की मूल प्रकृति निर्धारित होती है, जो ताउम्र उसके व्यवहार, शरीर की प्रतिक्रिया और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती है.
प्राकृतिक प्रतिनिधित्व..सूरज, वायु और चंद्रमा
आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, पित्त को सूरज का प्रतिनिधि माना गया है. यह गर्मी और ऊर्जा से जुड़ा है. वात को वायु का प्रतिनिधि यह गति और सूखापन दर्शाता है. कफ को चंद्रमा का प्रतिनिधि यह ठंडक और स्थिरता से जुड़ा है. जिनके शरीर में पित्त का प्रभाव अधिक होता है, उन्हें ठंड में भी गर्मी महसूस होती है. वहीं जिनके शरीर में कफ प्रधान होता है, उन्हें गर्मी के मौसम में भी ठंडक का एहसास बना रहता है.
व्यवहार में फर्क कैसे दिखता है?
डॉ. रंजन ने एक सरल उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही मौसम में कोई व्यक्ति टी-शर्ट में आराम महसूस करता है, जबकि दूसरा जैकेट के बिना बाहर नहीं निकलता है. यह फर्क उनकी शरीर की प्रकृति का है. पित्त प्रधान व्यक्ति जल्दी गर्मी महसूस करता है और कफ प्रधान व्यक्ति को जल्दी ठंड लगती है. उन्होंने कहा कि अगर प्रकृति के अनुसार आहार-विहार और जीवनशैली अपनाई जाए, तो मौसम की असहजता से काफी हद तक बचा जा सकता है. आयुर्वेद में ऋतुचर्या (मौसम के अनुसार जीवनशैली) और दिनचर्या (दैनिक नियम) का पालन इसी उद्देश्य से किया जाता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Bharat.one किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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