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दिल्ली में चल रही रिसर्च…. साबुन, घी और शहद होते है तैयार, जानिए क्यों इसे कहते हैं कल्पवृक्ष – Uttarakhand News

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देहरादून. हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड में कई ऐसे पेड़-पौधे हैं, जो अनगिनत फायदों से भरपूर हैं. इनमें से एक प्रमुख पेड़ है च्यूरा, जिसे कल्पवृक्ष भी कहा जाता है. इसके पत्तों का उपयोग चारा, भोजन पत्तल और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है. इतना ही नहीं, च्यूरा की खली का इस्तेमाल मोमबत्ती, वैसलीन और कीटनाशक बनाने में भी किया जाता है.

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इस पौधे के बीजों का उपयोग पारंपरिक तौर पर कई तरह से किया जाता रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिक भी इसके औषधीय गुणों की पुष्टि कर रहे हैं. दिल्ली फार्मास्यूटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (DPSRU) में इस पर रिसर्च चल रही है. हाल ही में इसका अध्ययन Journal of Pharmaceutical Innovation में प्रकाशित हुआ है. उत्तराखंड मूल के प्रोफेसर डॉ. देवेश तिवारी इस प्रोजेक्ट पर पिछले 4 साल से काम कर रहे हैं.

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कल्पवृक्ष यानी च्यूरा से आधुनिक नैनो-ड्रग डिलीवरी सिस्टम ‘ब्युटायरोसोम्स’ तैयार किया गया है, जो मेडिकल फील्ड में क्रांति लेकर आएगा. इसके लिए फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट ने पश्चिमी छिड़ा क्षेत्र में च्यूरा की पौधशाला भी स्थापित की है. उत्तराखंड में ऐसी कई वनस्पतियां पाई जाती हैं जो मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और च्यूरा उनमें से एक है.

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च्यूरा के फलों से घी भी तैयार किया जाता है. पहले इसे पारंपरिक तरीके से ही उपयोग किया जाता था, लेकिन अब च्यूरा के फलों से कॉस्मेटिक उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह प्राकृतिक हैं. मूनाकोट च्यूरा प्रसंस्करण इकाई ने च्यूरा के फलों से 15 अलग-अलग तरह के साबुन तैयार किए हैं और इन्हें बाज़ार में उतारा है.

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च्यूरा से अब शैंपू और स्किन क्रीम भी बाजार में उपलब्ध हो गई हैं. ये सभी उत्पाद पूरी तरह केमिकल-फ्री हैं. उत्तराखंड में ऐसी कई वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.

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75 ग्राम के च्यूरा साबुन की कीमत लगभग 75-100 रुपये है. आप इन्हें हिलांस के स्टोर्स से खरीद सकते हैं. अपने नेचुरल गुणों के कारण इन साबुनों की डिमांड लगातार बढ़ रही है. व्यर्थ जाने वाले च्यूरा के फलों का इस्तेमाल कर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आमदनी में भी वृद्धि हुई है. हिलांस की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी ये साबुन उपलब्ध हैं.

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च्यूरा वृक्ष की लकड़ी ग्रामीण इलाकों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है, इसके पत्तों का उपयोग पशुओं के चारे के लिए किया जाता है, और इसके फूल से शहद प्राप्त होता है, च्यूरा के पत्ते, फल, टहनी, फूल और गुठली सभी चीजें उपयोग में आती हैं.

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च्यूरा जोड़ों के दर्द, त्वचा संबंधी कई समस्याओं को दूर करने के साथ ही पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है. इसमें पाए जाने वाले गुण रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इसके फल के बीज से निकलने वाला तेल गठिया और एलर्जी के इलाज में उपयोग किया जाता है.

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पहाड़ों का चमत्कारी पेड़, च्यूरा: कैसे बनते हैं इससे साबुन, घी और शहद? जानिए


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https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/health-dpsru-reveals-medicinal-properties-of-chyura-revolution-in-nano-drug-know-benefits-local18-ws-kl-9841518.html

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