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Belly Fat Death Risk: अगर आपका शरीर दुबला-पतला है लेकिन पेट पर चर्बी भरी हुई है तो अलर्ट हो जाएं. एक रिसर्च में दावा किया गया है कि जिन लोगों के पेट पर फैट बहुत ज्यादा होता है और उनका शरीर दुबला पतला होता है, उनमें समय से पहले मौत का खतरा 83 प्रतिशत तक अधिक रहता. आइए जानते हैं कि क्या है ‘स्किनी फैट’ का विज्ञान और इसे कैसे कम करें.
Belly Fat Death Risk: एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों के पेट के आसपास चर्बी बढ़ जाती है और शरीर में मांसपेशियों की कमी होती है, वह सामान्य लोगों की तुलना में कम जीते हैं. लॉन्गिट्यूडनल स्टडी ऑफ एजिंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर व्यक्ति 50 के आसपास होता है और उनके पेट के आसपास मोटापा घना होता है लेकिन शरीर में मांसपेशियां कम होती है तो ऐसे लोगों के समय से पहले मौत का खतरा ज्यादा होती है. इस अध्ययन में 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के 5,440 लोगों को शामिल किया गया था. इन लोगों पर 12 वर्षों तक नजर रखी गई.
मौत का खतरा 83 प्रतिशत अधिक
दरअसल, एक बीमारी होती है जिसका नाम है सार्कोपेनिक ओब्सिटी. इस बीमारी में पूरे शरीर में मांसपेशियों की कमी हो जाती है और उसकी जगह चर्बी बढ़ जाती है. अमूमन ऐसे लोगों में पेट के आसपास मोटापा बढ़ने लगता है. यह बीमारी ज्यादा खतरनाक है लेकिन अधिकांश लोग इसे बीमारी नहीं मानते. इस तरह की बीमारी में इनसान बेहद कमजोर हो जाता है. थोड़ा सा चलने पर ही थकान हो जाती है. हमेशा गिरने का खतरा रहता है. जीवन की गुणवत्ता बहुत कम हो जाती है. अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में पेट का मोटापा और मांसपेशियों की कमी दोनों थीं, उनमें सामान्य लोगों की तुलना में मौत का जोखिम 83% अधिक पाया गया.
पूरे शरीर में सूजन हो जाती है
हालांकि जिन लोगों में भले ही मांसपेशियों की कमी थी लेकिन पेट पर मोटापा कम था, उन लोगों का जीवन अपेक्षाकृत ज्यादा था. शोधकर्ताओं ने बताया कि मौत का खतरा सिर्फ कमर की मोटाई से निर्धारित नहीं किया जा सकता है, इसके लिए पूरे शरीर की मांसपेशियां को देखना होता है. अधिक चर्बी शरीर में सूजन और मेटाबॉलिक बदलावों को बढ़ाती है, जो मांसपेशियों के टूटने की प्रक्रिया को तेज़ कर देते हैं. इसके अलावा, चर्बी मांसपेशियों के ऊतकों में जमा हो सकती है, जिससे समय के साथ उनकी गुणवत्ता और कार्यक्षमता कम होती जाती है. अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों की मौत समय से पहले हो गई उनमें पुरुषों की कमर की लंबाई 102 सेंटीमीटर से अधिक थी जबकि महिलाओं की कमर की लंबाई 88 सेंटीमीटर से अधिक थी. ऐसे लोगों में पुरुषों में मसल्स मास 9.36 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर से कम था जबकि महिलाओं में 6.73 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर से कम पाई गई.
इस बीमारी की पहचान
इस बीमारी की पहचान एमआरआई, सीटी स्कैन, बायोइम्पीडेंस या डेंसिटोमेट्री के जरिए किया जाता है. हालांकि ये सारे टेस्ट बहुत महंगे होते हैं. अब तक इसके लिए कोई वैश्विक स्तर पर स्वीकृत डायग्नोस्टिक मानदंड नहीं है, जिससे एक समान पहचान करना और भी कठिन हो जाता है. वैसे आमतौर पर ऐसे व्यक्तियों की पहचान देखकर ही हो जाता है. ऐसे व्यक्तियों के पेट के पास बहुत ज्यादा चर्बी होती है और वह बहुत दुबला पतला होता है. ऐसे लोगों में ताकत भी कमी रहती है. इसलिए कम उम्र से ही यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि दुबले पतले शरीर में पेट पर चर्बी तो ज्यादा नहीं है.
इसमें क्या करना चाहिए
अगर किसी को सार्कोपेनिक है तो यह शरीर से पता चल जाता है. ऐसे लोगों को तुरंत डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए. सही खान-पान, हेल्दी लाइफस्टाइल और एक्सरसाइज से उम्र को लंबा किया जा सकता है.
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Excelled with colors in media industry, enriched more than 19 years of professional experience. Lakshmi Narayan is currently leading the Lifestyle, Health, and Religion section at Bharat.one. His role blends in-dep…और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-thin-muscles-mass-and-belly-fat-increase-risk-of-death-sarcopenia-new-research-10015299.html

















