6 Habits danger for your bladder: हमारे शरीर का सारा अपशिष्ट तरल पदार्थ पेशाब के रूप में किडनी द्वारा बाहर कर दिया जाता है और यह मूत्राशय यानी ब्लैडर में जमा हो जाता है. जब ब्लैडर फुल होने लगता है तब पेशाब करने की तलब होती है और शरीर से अपशिष्ट तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है. लेकिन पेशाब से संबंधित कई खराब आदतें हैं जिनसे ब्लैडर डैंजर जोन में जा सकता है.इससे पेल्विक एरिया में दर्द होने लगता है जो एक दिन भारी मुसीबत में डाल सकता है. आइए ये गंदी आदतों क्या है, इनके बारे में जानते हैं.
पेशाब करने की ये 6 गंदी आदतें
2. पेशाब करते समय कीगल एक्सरसाइज न करें-कीगल एक्सरसाइज़ पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मज़बूत करने के लिए बनाई गई हैं, लेकिन इन्हें पेशाब करते समय करना हानिकारक हो सकता है. पहले स्टॉप-फ्लो पद्धति का उपयोग पेल्विक ताकत जांचने के लिए किया जाता था, लेकिन यह पेल्विक फ्लोर की कुदरती शिथिलन प्रक्रिया को बाधित करती है. बार-बार पेशाब के बीच में रोकना मूत्राशय को पूरी तरह खाली होने से रोक सकता है, जिससे समय के साथ यूटीआई और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. कीगल एक्सरसाइज हमेशा ब्लैडर खाली होने पर करने चाहिए, ताकि मांसपेशियां सही तरीके से प्रशिक्षित हों और प्राकृतिक मूत्र प्रक्रिया में बाधा न आए.
3. दबाव डलाकर जबरदस्ती ब्लैडर खाली करना-कुछ लोग पेट को अंदर धंसाकर जबरदस्ती पूरा ब्लैडर एक ही बार खाली कर देते हैं. इसे पावर पीइंग कहते हैं. बार-बार ऐसा करने से ब्लैडर पर दबाव बढ़ता है और सामान्य पेशाब करने की प्रक्रिया बिगड़ सकती है. लंबे समय तक यह आदत पेशाब की थैली से पेशाब निकलने में बाधा पहुंचा सकती है. इसके साथ ही इससे पेल्विक अंगों के खिसकने की बीमारी प्रोलैप्स का कारण बन सकती है. पेशाब को बिना जोर लगाए स्वाभाविक रूप से बहने देना पेल्विक फ्लोर पर दबाव कम करता है और मूत्राशय को स्वस्थ रखता है. पेशाब करते समय आरामदायक और स्थिर दिनचर्या अपनाना, जल्दी खत्म करने के लिए ज़ोर लगाने से कहीं बेहतर है.
4. टॉयलेट सीट पर हॉवरिंग न करें- कई लोग सार्वजनिक शौचालयों में सीट पर पूरी तरह बैठने के बजाय ऊपर से ही झुककर पेशाब करना सुविधाजनक मानते हैं. लेकिन ऐसा करने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं. यह तनाव मूत्राशय को पूरी तरह खाली होने से रोक सकता है और समय के साथ मांसपेशियों पर दबाव डालता है. पेल्विक फ्लोर को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी है कि आप टॉयलेट पर पूरी तरह बैठें, पैरों को जमीन पर रखें और मांसपेशियों को रिलैक्स होने दें. सही मुद्रा से मूत्राशय पूरी तरह खाली होता है, जिससे संक्रमण और असुविधा का खतरा कम होता है.

5. खुद को जबरदस्ती पेशाब करने के लिए मजबूर न करें- कई लोग यूं ही बाथरूम चले जाते हैं, जबकि उन्हें प्राकृतिक पेशाब की इच्छा नहीं होती. लेकिन जब पेशाब न लगे और फिर भी पेशाब करने की कोशिश की जाए तो यह मूत्राशय की सामान्य भरने और खाली होने की लय को बिगाड़ सकता है. पेशाब की कुदरती इच्छा पर ही पेशाब करना चाहिए. यह आमतौर पर दिन में हर तीन से चार घंटे में होती है. शरीर की प्राकृतिक लय का पालन करने से मूत्राशय और पेल्विक फ्लोर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और लंबे समय तक कंटिनेंस (पेशाब रोक पाने की क्षमता) बनी रहती है.
6. शौच करते समय जोर न लगाएं- लगातार शौच में जोर लगाना, अक्सर कब्ज़ या फाइबर की कमी वाली डाइट के कारण होता है. इससे पेट के अंदर का दबाव बढ़ता है, जो समय के साथ पेल्विक फ्लोर को कमजोर कर सकता है और पेल्विक अंगों के खिसकने या मूत्र असंयम (पेशाब टपकना) का खतरा बढ़ा सकता है. हेल्दी शौच की आदतें जैसे कि फाइबर युक्त आहार लेना, पर्याप्त पानी पीना और सही पोजीशन अपनाना पेल्विक मांसपेशियों पर दबाव कम करती हैं. नियमित और बिना जोर लगाए शौच करना पेल्विक फ्लोर की मजबूती और मूत्राशय नियंत्रण के लिए ज़रूरी है.
सही पेशाब कैसे करें
पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां पेशाब को नियंत्रित करने और सही समय पर बहने देने के लिए मिलकर काम करती हैं. गलत आदतें जैसे कि जल्दबाज़ी में पेशाब करना, जोर लगाना या अधूरा खाली करना इस प्राकृतिक समन्वय को बिगाड़ देती हैं, जिससे मांसपेशियों में तनाव, कमजोरी, असंतुलन, बार-बार पेशाब की ज़रूरत या यूटीआई जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर पेशाब रोकने में दिक्कत हो, बार-बार कब्ज़ हो, पेशाब शुरू या खत्म करने में कठिनाई हो, पेल्विक दर्द या दबाव महसूस हो, यौन संबंध में दर्द हो, या प्रसव के बाद कमजोरी हो तो पेल्विक फ्लोर थेरेपिस्ट से सलाह लेना ज़रूरी है. हेल्दी पेशाब करने की आदतें अपनाना सिर्फ सुविधा की बात नहीं है यह पेल्विक फ्लोर और मूत्राशय की सेहत का अहम हिस्सा है. इन सामान्य गलतियों से बचकर हेल्दी पेशाब करने की आदत को डाली जा सकती है.
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