Home Lifestyle Health पैरों में झनझनाहट और कालेपन के उपाय | Foot Care Tips in...

पैरों में झनझनाहट और कालेपन के उपाय | Foot Care Tips in Winter: Prevention and Care

0
0


Last Updated:

Foot Care Tips in Winter: बाड़मेर जिला अस्पताल के डॉ. दिनेश परमार ने बताया कि सर्दियों में डायबिटीज और धूम्रपान करने वालों के पैरों में रक्त संचार रुकने का खतरा रहता है. पैरों में कालापन या झनझनाहट होने पर इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टरी सलाह लें.

खासकर डायबिटीज और धूम्रपान करने वाले मरीजो के लिए यह काफी घातक होता है.

सर्दियों का सुहाना मौसम जहाँ एक ओर सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह हमारे पैरों के लिए कई गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां भी पैदा कर सकता है. जिला अस्पताल के डॉ. दिनेश परमार के अनुसार, इस मौसम में विशेष रूप से मधुमेह (डायबिटीज), धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है. सर्दियों में कम तापमान के कारण पैरों की सूक्ष्म रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त संचार (Blood Circulation) बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है. डॉ. परमार बताते हैं कि यदि पैरों की अंगुलियां काली पड़ने लगें, उन पर लाल धब्बे दिखाई दें या लगातार झनझनाहट महसूस हो, तो इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. ये लक्षण इस बात का संकेत हैं कि पैरों के निचले हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और रक्त नहीं पहुँच पा रहा है, जो आगे चलकर किसी गंभीर समस्या का रूप ले सकता है.

इससे पैरों की अंगुलिया काली पड़ जाती है

डायबिटीज के रोगियों के लिए सर्दियों का मौसम विशेष सावधानी बरतने का होता है. डॉ. दिनेश परमार के अनुसार, मधुमेह के मरीजों की रक्त धमनियों में अक्सर चर्बी (Fat) जमा हो जाती है, जिससे पैरों तक रक्त का प्रवाह काफी कम हो जाता है. कड़ाके की ठंड में जब नसें और अधिक सिकुड़ती हैं, तो यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है और पैरों की अंगुलियां ऑक्सीजन की कमी के कारण काली (Gangrene के शुरुआती संकेत) पड़ सकती हैं. ऐसी स्थिति से बचने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मरीज अपने पैरों को हमेशा सूखा और साफ रखें. पैरों को पर्याप्त गर्माहट देना और नियमित रूप से उनका निरीक्षण करना आवश्यक है ताकि किसी भी घाव या रंग परिवर्तन का समय रहते पता चल सके.

गम्भीर स्थिति में यह गैंगरीन या घाव में बदल जाता है.

हुक्का, सिगरेट या तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों के लिए सर्दियों का मौसम अत्यधिक जोखिम भरा हो सकता है. तंबाकू में मौजूद हानिकारक तत्व ठंड के संपर्क में आते ही पैरों की सूक्ष्म रक्त नलिकाओं को सिकोड़ देते हैं, जिससे रक्त का प्रवाह (Blood Circulation) बुरी तरह प्रभावित होता है. शुरुआती दौर में इसके कारण पैरों की अंगुलियों में लाल धब्बे, लगातार झनझनाहट या असहनीय दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. यदि समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या गैंगरीन (मांस का सड़ना) या ऐसे गहरे घावों में तब्दील हो सकती है जिन्हें ठीक करना मुश्किल हो जाता है. चिकित्सा विज्ञान में इसे ‘बर्गर डिजीज’ (Buerger’s Disease) से जोड़कर भी देखा जाता है, जो विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों के पैरों को प्रभावित करती है.

Add Bharat.one as
Preferred Source on Google

दवाइयों के साथ साथ खानपान का ध्यान रखना आवश्यक होता है.

वैस्कुलाइटिस (Vasculitis) से पीड़ित मरीजों के लिए सर्दियों का समय बेहद नाजुक होता है, क्योंकि इस बीमारी में रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है, जिससे पैरों की नसों में खून जमने (Clotting) की समस्या पैदा हो सकती है. कड़ाके की ठंड में जब तापमान गिरता है, तो रक्त का प्रवाह पूरी तरह बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है, जो पैरों की अंगुलियों के ऊतकों (Tissues) को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है. ऐसी स्थिति में केवल दवाइयां ही पर्याप्त नहीं हैं; मरीजों को अपने पैरों को लगातार गर्माहट देने और उनकी विशेष देखभाल करने की अत्यंत आवश्यकता होती है ताकि किसी भी प्रकार की स्थायी क्षति से बचा जा सके.

बार बार ऐसा होने पर यह घाव में बदल जाती है.

रेनाड्स रोग (Raynaud’s Disease) से पीड़ित व्यक्तियों के लिए सर्दियों का मौसम काफी कष्टकारी हो सकता है. इस स्थिति में पैरों की रक्त नलिकाएं ठंडे तापमान के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं. जैसे ही पैर ठंड के संपर्क में आते हैं, रक्त का प्रवाह अस्थायी रूप से पूरी तरह रुक जाता है. इसके कारण अंगुलियां पहले सफेद, फिर नीली या अत्यधिक लाल दिखाई देने लगती हैं. यदि यह समस्या बार-बार होती है, तो ऊतकों को नुकसान पहुँचने के कारण वहां गहरे घाव (Ulcers) भी बन सकते हैं. इसलिए, इस रोग के प्रबंधन के लिए नियमित दवाइयों के साथ-साथ खान-पान में सतर्कता और विशेषज्ञ डॉक्टर से निरंतर परामर्श लेना अनिवार्य है.

सर्दियों में 5-6 किलोमीटर पैदल घूमना चाहिए जिससे पैरों में दर्द नही होगा.

सर्दियों में पैरों की सुरक्षा के लिए कुछ बुनियादी सावधानियां बरतना अत्यंत आवश्यक है. इस मौसम में कभी भी नंगे पैर नहीं घूमना चाहिए और विशेष रूप से ओस वाली घास पर चलने से बचना चाहिए. पैरों की गर्माहट बनाए रखने के लिए हमेशा सूती या ऊनी मोजों का उपयोग करना चाहिए. एक महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि हीटर या गर्म पानी की बोतल को सीधे पैरों के संपर्क में न लाएं, क्योंकि इससे त्वचा जलने या संवेदनशीलता कम होने का खतरा रहता है. वहीं, स्वास्थ्य सुधार के लिए सर्दियों की गुनगुनी धूप में रोजाना 5-6 किलोमीटर की सैर करना रक्त संचार के लिए बेहद फायदेमंद रहता है. इसके अलावा, तंबाकू या धूम्रपान का पूरी तरह त्याग करना चाहिए. यदि पैरों में असहनीय दर्द महसूस हो या अंगुलियों का रंग काला पड़ने लगे, तो बिना देरी किए किसी अनुभवी वैस्कुलर सर्जन से तुरंत परामर्श लेना चाहिए.

homelifestyle

पैरों की उंगलियों में झनझनाहट को न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह गंभीर बीमारी!


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/health-health-tips-winter-foot-care-blood-circulation-diabetes-smoking-gangrene-warning-local18-10095170.html

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here