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Health Tips: पलामू के बाल एक्सपर्ट डॉक्टर गौरव विशाल के अनुसार बच्चों को अलग कमरे में सुलाने की कोई फिक्स उम्र या मेडिकल गाइडलाइन नहीं है. यह फैसला बच्चे और परिवार की जरूरतों के अनुसार होना चाहिए.

कई माता-पिता अक्सर इस दुविधा में रहते हैं कि बच्चे को अलग कमरे में कब सुलाया जाए. क्या इसके लिए कोई निश्चित उम्र होती है? क्या कोई मेडिकल गाइडलाइन मौजूद है? इसी महत्वपूर्ण विषय पर पीडियाट्रिशियन डॉ० गौरव विशाल ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में विस्तार से बताया है. उनका कहना है कि बच्चों की नींद, सुरक्षा और भावनात्मक जरूरतें उम्र के साथ बदलती हैं. इसलिए एक तय उम्र सभी के लिए सही नहीं होती.

डॉ. विशाल के अनुसार, बच्चों के अलग सोने के लिए कोई फिक्स उम्र नहीं होती है. न ही इसके लिए किसी मेडिकल गाइडलाइन में कड़ी उम्र सीमा तय है. माता-पिता को अपने घर की स्थिति, बच्चे के स्वभाव, डर, नींद के पैटर्न और भावनात्मक जुड़ाव को देखकर फैसला करना चाहिए. वह कहते हैं कि यह एक “एक-जैसा-सबके-लिए नियम” नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक और व्यवहारिक निर्णय है.

जन्म से लेकर 1 साल की उम्र तक बच्चा सबसे ज़्यादा निगरानी और सुरक्षा चाहता है. एक्सपर्ट की सलाह है कि कम से कम एक वर्ष तक बच्चे को माता-पिता के साथ एक ही कमरे में सुलाना चाहिए, हालांकि अलग बेड पर (Co-Sleeping नहीं, Room Sharing). इससे बच्चे की रात में होने वाली जरूरतों को तुरंत पूरा किया जा सकता है और सेफ्टी भी बनी रहती है.
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1 से 3 साल के बच्चे रात में कई बार डर सकते हैं, जग सकते हैं या माता-पिता को ढूंढ सकते हैं. इस उम्र में भावनात्मक सुरक्षा उनके विकास का अहम हिस्सा होती है. इसलिए इस समय भी विशेषज्ञ एक ही कमरे में सुलाने की सलाह देते हैं. माता-पिता की मौजूदगी से बच्चे को भरोसा मिलता है और नींद बेहतर होती है.

3 से 6 साल बच्चों में आत्मनिर्भरता की शुरुआत होती है. वे अपनी स्पेस, चीजें और आदतों को पहचानने लगते हैं. डॉक्टर हुसैन बताते हैं कि यह उम्र उन्हें अलग बेड या अलग कमरे के लिए धीरे-धीरे तैयार करने की होती है. यह बदलाव बहुत कोमल और समझदारी से होना चाहिए-न दबाव, न जल्दबाजी.

अगर बच्चा तैयार है और डर नहीं रहा है, तो 6 साल के बाद उसे अलग कमरे में सुलाना बिल्कुल सामान्य और सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. इस उम्र में बच्चा सीखता है कि वह स्वतंत्र होकर भी सुरक्षित रह सकता है, लेकिन यहां भी अंतिम फैसला बच्चे की सहजता और परिवार की सुविधा को ध्यान में रखकर ही होना चाहिए. सिर्फ समाज क्या कहता है, इसके आधार पर नहीं.

डॉ. विशाल स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि बच्चे को कभी भी मजबूरी में अलग नहीं सुलाना चाहिए. यदि बच्चा डरा हुआ महसूस करता है, बार-बार रोता है या माता-पिता के पास लौट आता है, तो इसका मतलब है कि वह अभी तैयार नहीं है. नींद का माहौल केवल आरामदायक होना चाहिए, तनावपूर्ण नहीं. अलग कमरा एक नेचुरल प्रोग्रेस होना चाहिए.

बच्चों को कब अलग सुलाना है इसका फैसला दोनों बच्चे और माता-पिता की जरूरतों को समझकर किया जाना चाहिए. कोई सही या गलत उम्र नहीं होती. यदि बच्चा सुरक्षित, शांत और खुश महसूस करता है, तो वही सही समय है. हर परिवार का माहौल अलग होता है, इसलिए निर्णय भी वैसा ही होना चाहिए.
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https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/health-palamu-child-expert-doctor-gaurav-vishal-reveals-right-age-for-children-to-sleep-separately-local18-ws-l-9890627.html

















