Health Tips: विंध्य क्षेत्र के जंगलों में बेशकीमती औषधीय पेड़-पौधों के बीच कौंच का पौधा भी पाया जाता है. स्थानीय ग्रामीण भाषा में इसे किमाच और किंवाच कहा जाता है. ग्रामीण जंगलों में स्वतः उगने वाले कौंच के फलों और अन्य भागों का उपयोग उनकी प्रकृति के अनुसार दैनिक जीवन में किया जाता है. हालांकि, इसके फलों पर मौजूद विशेष प्रकार के रोए असहनीय खुजली पैदा करते हैं, जिस कारण ग्रामीण इसके पास जाने से भी डरते हैं. आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने बताया कि इसका वैज्ञानिक नाम मुकुना प्रिरीयंश है. इस पौधे के बीज, पत्तियां और जड़ तीनों औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. इसमें एंटी-कंपकंपी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की कंपन, चलने-फिरने में असमर्थता और तंत्रिका-तंत्र की कमजोरी को दूर करने में सहायक हैं. आयुर्वेद में कौंच बीज का उपयोग शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में किया जाता है. वाजीकरण रसायन होने के कारण इसके बीज का चूर्ण हार्मोनल असंतुलन, कमजोरी और नपुंसकता जैसी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन से दस्त हो सकते हैं. गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए.
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https://hindi.news18.com/videos/lifestyle/health-benefits-kewanch-plant-medicinal-plants-kaunch-beej-ke-ayurvedic-fayde-local18-10150395.html








