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Kaunch Beej Health Benefits: आज के समय में युवाओं और पुरुषों के बीच आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इन्हीं में से एक कौंच बीज है, जिसे ताकत, स्टैमिना और ऊर्जा बढ़ाने वाली देसी औषधि माना जाता है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार यह नर्व सिस्टम को सपोर्ट करता है और सामान्य कमजोरी में मददगार हो सकता है. हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से करना जरूरी है, क्योंकि यह इलाज नहीं बल्कि सहायक उपाय माना जाता है.

आजकल युवाओं और पुरुषों के बीच आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के प्रति रुझान तेजी से बढ़ रहा है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन जड़ी-बूटियों का उपयोग देसी औषधि के रूप में ताकत, स्टैमिना और ऊर्जा बढ़ाने के लिए किया जाता है. खासतौर पर वे लोग जो जल्दी थकान महसूस करते हैं, कमजोरी रहती है या काम के दौरान ऊर्जा की कमी महसूस करते हैं, उनके लिए यह काफी फायदेमंद मानी जाती हैं. नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से शरीर में स्फूर्ति आती है, कार्यक्षमता बढ़ती है और लंबे समय तक एक्टिव रहने में मदद मिलती है.

आयुर्वेद में कौंच बीज का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है. आयुर्वेदिक जानकारों के अनुसार, इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व नर्व सिस्टम को मजबूत करने में सहायक होते हैं. यह शरीर की अंदरूनी ऊर्जा बढ़ाने और सामान्य कमजोरी को दूर करने में मदद कर सकता है. कौंच बीज को ताकत और स्टैमिना बढ़ाने वाली देसी औषधि माना जाता है. यही कारण है कि पहले ग्रामीण इलाकों में प्रचलित यह जड़ी-बूटी अब शहरी क्षेत्रों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. लोग इसे अपनी डेली रूटीन में शामिल कर बेहतर स्वास्थ्य पाने की कोशिश कर रहे हैं.

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रमेश शर्मा के अनुसार, कौंच बीज को विशेष रूप से पुरुष स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है. इसके नियमित और सीमित सेवन से स्टैमिना बढ़ने, शरीर में जोश आने और थकान में कमी महसूस होने की बातें सामने आती रही हैं. जानकारों का कहना है कि यह शरीर की ऊर्जा को सपोर्ट करने में मदद करता है. हालांकि वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसका असर व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली और खानपान पर निर्भर करता है. इसलिए इसे किसी चमत्कारी दवा की तरह नहीं, बल्कि सपोर्टिंग आयुर्वेदिक उपाय के रूप में ही अपनाना चाहिए.
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आम तौर पर पारंपरिक अनुभवों के आधार पर लोग कौंच बीज का चूर्ण आधा चम्मच मात्रा में लेने की बात करते हैं. इसे रात के समय गर्म दूध या गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है. कुछ लोग इसे लगातार 20 से 30 दिन तक सेवन करने और फिर कुछ दिनों का ब्रेक देने की सलाह भी देते हैं, ताकि शरीर पर अनावश्यक दबाव न पड़े. हालांकि यह तरीका लोक अनुभवों और आयुर्वेदिक परंपराओं पर आधारित है, न कि किसी आधुनिक मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन पर. इसलिए सेवन से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है.

देसी नुस्खे अपनाते समय सावधानी रखना बेहद जरूरी माना जाता है. आयुर्वेद चिकित्सक के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, दिल की बीमारी या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. इसी तरह जिन लोगों का पेट कमजोर रहता है, उन्हें बहुत कम मात्रा से शुरुआत करने की सलाह दी जाती है. गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी इससे दूर रहने को कहा जाता है. किसी भी आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने से पहले सही जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है.

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. रमेश शर्मा के अनुसार, कौंच बीज जैसी जड़ी-बूटियां शरीर को सपोर्ट करने में सहायक हो सकती हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. उनका कहना है कि इसका उपयोग हमेशा सही मात्रा, सही समय और व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली व स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए. हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है. डॉ. शर्मा चेतावनी देते हैं कि बिना जानकारी या अधिक मात्रा में सेवन करने से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है. इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.
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https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/health-kaunch-beej-benefits-uses-dose-precautions-ayurveda-local18-10102324.html






