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रजाई से हो सकते हैं फंगल इंफेक्शन या सांस की बीमारी, इस्तेमाल करने के दौरान इन बातों का रखें ध्यान


सर्दी शुरू होते ही रजाई निकल जाती है और लगातार 4 महीने तक लोग इसका जमकर इस्तेमाल करते हैं. रजाई को धोना बहुत मुश्किल होता है इसलिए लोग अक्सर सर्दी शुरू होने से पहले ही इसे ड्राईक्लीन करा लेते हैं. रजाई में सोने से नींद तो अच्छी आती ही है लेकिन छुट्टी वाले दिन रजाई में बैठकर ही नाश्ता, लंच और डिनर निपटा लिया जाता है. लेकिन रजाई की यह गरमाहट बीमारी की वजह भी बन सकती है. रजाई से कई तरह की एलर्जी, इंफेक्शन और बुखार हो सकता है.  

बैक्टीरिया की पसंदीदा जगह
सर्दी के मौसम में रजाई की सफाई बहुत जरूरी है लेकिन भारी वजन के चलते अधिकतर लोग ऐसा नहीं करते. पारस हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग में डॉ. संजय गुप्ता कहते हैं कि रजाई या फिर कंबल का लगातार इस्तेमाल करने से इस पर बैक्टीरिया और कई तरह कीटाणु पनपने लगते हैं. यह भले ही आंखों से नजर ना आएं लेकिन इनसे होने वाली बीमारियों के लक्षण जरूर दिखने लगते हैं. गंदी रजाई से रैशेज, दाने, लाल चकत्ते, खांसी, जुकाम, सांस लेने में परेशानी, आंखों में इंफेक्शन, नाक से पानी आना, शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकल आना या लाल चकत्ते पड़ना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.   

रजाई में बैठकर ना खाएं खाना
लोग रजाई में बैठकर ही चाय-कॉफी पीते हैं, खाना भी रजाई में खाते हैं और जब बेड से उठते हैं तो रजाई को तह करके बेड पर ही रख देते हैं. कई बार रजाई में बैठकर पसीने भी आने लगते हैं. इन सब चीजों से रजाई में नमी बरकरार रहती है. इसी नमी की वजह से इसमें फंगस पनपने लगती है. अगर यह शरीर में प्रवेश कर जाए तो फंगल इंफेक्शन हो सकता है. इसके अलावा रजाई में खतरनाक धूल के कण भी जमा होने लगते हैं जिससे सांस से जुड़ी बीमारी हो सकती है. रजाई से अस्थमा के अटैक भी बार-बार आ सकते हैं क्योंकि इसमें एलर्जन रहते हैं जो इसे ट्रिगर करते हैं.

रजाई से उठने के बाद हाथों को अच्छे से धोएं. नहाने के तुरंत बाद रजाई में ना बैठें (Image-Canva)

गंदे कपड़े और जुराब पहनकर ना बैठें
कई लोग बाहर से आकर तुरंत रजाई में बैठ जाते हैं और जुराब भी नहीं उतारते. कपड़े और जुराबें कई तरह के बैक्टीरिया, वायरस और फंगस को कैरी करते हैं. यह बहुत आसानी से रजाई में चिपक जाते हैं. इसलिए जब भी बाहर से आएं, हमेशा पहले कपड़े बदलें और घर में भी जुराब पहन रहे हैं तो उसे उतार कर ही रजाई में बैठें.

पेट्स को रजाई से दूर रखें
कुछ लोग अपने साथ रजाई में पेट्स को बैठा लेते हैं. डॉगी, बिल्ली सभी तरह के पेट कई तरह के कीटाणु अपने साथ लेकर घूमते हैं. इसके अलावा उनके बाल भी इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं. जिन लोगों को सांस से जुड़ी एलर्जी या बीमारी है, उन्हें पेट्स को कभी रजाई में नहीं बैठाना चाहिए.

दूसरों की रजाई ना करें इस्तेमाल
कई लोग घर में या मेहमानों के घर जाने पर किसी की भी रजाई में घुसकर बैठ जाते हैं. यह सही नहीं है. घर में हर सदस्य की अलग रजाई होनी चाहिए और तौलिए या रूमाल की तरह इसे किसी से शेयर नहीं करना चाहिए. इससे कई बीमारियां एक-दूसरे में ट्रांसफर हो सकती हैं. कुछ लोगों को एक्जिमा या सिरोसिस होता है. यह स्किन से जुड़ी बहुत खतरनाक बीमारी होती है क्योंकि इसमें त्वचा पपड़ी की तरह झड़ने लगती है. ऐसे में अगर कोई दूसरा व्यक्ति रजाई का इस्तेमाल कर ले तो यह बीमारी फैल सकती है. 

एक्ने सता सकते हैं
रजाई ओढ़ने से उसमें गंदगी, पसीना, डेड स्किन सेल्स समेत कई तरह की चीजें चिपक जाती हैं. रजाई से चेहरा ढक कर सोया जाए तो यह सब चीजें स्किन के रोमछिद्र को बंद करती हैं जिससे मुंहासे होने लगते हैं. इंफेक्शन होने की वजह से कई बार इनमें पस भी निकलने लगती है. यही नहीं गंदी रजाई से बालों में ड्रैंडफ हो सकता है और स्किन भी ड्राई होने लगती है. 

रजाई पर एंटी बैक्टीरियल स्प्रे डालकर उसे धूप में सुखाएं (Image-Canva)

रजाई को ऐसे रखें साफ
रजाई को हर रोज धोना मुमकिन नहीं है लेकिन इसे हर 2 दिन में यानी हफ्ते में 3 से 4 बार तेज धूप में डालना जरूरी है. धूप से इनमें पनपन रहे बैक्टीरिया, फंगस, वायरस सब चीजें खत्म हो जाती है. रजाई पर हमेशा सूती कवर चढ़ाएं, वेल्वेट कवर नहीं. सूती कवर को हर 2 से 3 दिन में धोएं. दरअसल वुलन रजाई कवर जल्दी से बैक्टीरिया का घर बनते हैं जबकि सूती कवर आसानी से धुल जाते हैं और बैक्टीरिया इस पर जमते भी नहीं हैं. कमरे में अगर सीलन हो तो रजाई को वहां बिल्कुल नहीं रखना चाहिए. इससे रजाई में नमी आ सकती है और फंगस पनप सकती है. कई बार कोहरे या धूप ना निकलने की वजह से रजाई को धूप में नहीं डाल सकते तो इसे वैक्यूम क्लीनर की मदद से साफ करें. इससे इसमें चिपकी धूल निकल जाएगी. रजाई में पेट्स को बैठाने या खाना खाने से बचें.  

कौन सी रजाई है सबसे बेस्ट
बाजार में कई तरह की रजाई बिकती हैं. अधिकतर लोग रुई वाली रजाई खरीदते हैं. यह रजाई शुरू में भले ही गर्म लगे लगे लेकिन जितनी पुरानी होती है रूई सिकुड़ने लगती है. इस पर धूल मिट्टी और बैक्टीरिया भी जल्दी पनपते हैं. वहीं मार्केट में आजकल फाइबर की रजाई भी बिक रही हैं लेकिन सबसे बेस्ट रजाई माइक्रोफाइबर की होती है. यह आसानी से धुल भी जाती है और सूख भी जाती है. यह हल्की भी होती है. इस रजाई के इस्तेमाल से एलर्जी और इन्फेक्शन दूर रह सकते हैं. 


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-infections-from-bed-quilt-things-to-remember-before-using-it-8944318.html

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