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हर इंसान की जिंदगी में सुख-दुख आते हैं. वह हंसते भी हैं और रोते भी हैं. रोना एक इमोशन है जिसमें सहानुभूति, दर्द, अपनापन या अकेलापन हो सकता है. लेकिन कभी सोचा है कि जब मन उदास होता है तो आंखें अपने आप क्यों नम ह…और पढ़ें
रोने से स्किन का स्ट्रेस कम होता है और एक्ने की समस्या दूर होती है (Image-Canva)
Benefits of crying: हर इंसान कभी ना कभी किसी ना किसी मौके पर रोता जरूर है. कभी खुशी के मौके पर आंसू निकल आते हैं तो कभी दुख में. अक्सर रोने वाले व्यक्ति को समाज में कमजोर समझा जाता है जबकि ऐसा नहीं है. रोने के लिए हिम्मत चाहिए. रोना सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है.
कई तरह के होते हैं आंसू
अमेरिकन अकैडमी ऑफ ऑप्थेल्मोलॉजी के अनुसार रोना भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है लेकिन आंसू 3 तरह के होते हैं. इनमें से 2 का कनेक्शन इमोशन से नहीं होता. बेसल टीयर्स लैक्रिमल ग्लैंड से निकलते हैं. इससे कॉर्निया को लुब्रिकेशन मिलता है और आंखें गीली रहती हैं. यह तब निकलते हैं जब आंखों में धूल चली जाए. इन आंसुओं में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. रिफ्लैक्स टीयर्स तब निकलते जब आंखों में धुंआ, कोई कीड़ा चला जाए या कोई प्याज काट रहा हो. इससे आंखें सुरक्षित रहती हैं. इन आंसुओं में एंटीबॉडीज होती हैं जो आंखों को बैक्टीरिया से बचाती हैं. इमोशनल टीयर्स खुशी, गम या डर जैसी भावनाओं के साथ निकलते हैं.
पेन किलर का काम करते हैं आंसू
आंसू नेचुरल पेनकिलर होते हैं. यह शरीर से दर्द को कम करते हैं. दरअसल रोने के दौरान शरीर से एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन नाम के हार्मोन रिलीज होते हैं जिससे व्यक्ति के दिल से बोझ कम होता है और दर्द कम होते ही वह अच्छा महसूस करने लगता है. अगर किसी बात से परेशान हैं तो रो लेना चाहिए. इससे दर्द छूमंतर हो जाएगा.
आंख साफ होती है
जो लोग ज्यादा रोते हैं, उन्हें आईज इन्फेक्शन परेशान नहीं करते. रोने के दौरान लाइसोजाइम नाम का केमिकल निकलता है जो आंखों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करता है. इससे आंख साफ रहती हैं. जो लोग रोते हैं, उन्हें सुकून की नींद भी आती है. ऐसा अक्सर होता है कि रोने के बाद व्यक्ति लगातार 8 घंटे गहरी नींद में सोता है और उसका स्लीप पैटर्न सुधर जाता है.
मेंटल हेल्थ अच्छी रहती है
जब व्यक्ति इमोशनल होकर रोता है तो उसकी बॉडी में प्रोलैक्टिन और एनकेफेलिन जैसे केमिकल निकलते हैं. आंसू निकले से कॉर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन भी कम होता है. इससे तनाव दूर होता है और व्यक्ति का मन शांत होता है. इससे उसका मूड भी अच्छा रहता है. रोने से व्यक्ति दूसरों के मुकाबले ज्यादा खुश रहता है. इससे मेंटल हेल्थ दुरुस्त रहती है जिससे डिप्रेशन, एंग्जाइटी जैसी बीमारियां नहीं होती.
लड़कियां ज्यादा रोती हैं
जर्मन सोसाइटी ऑफ ऑप्थेल्मोलॉजी के सर्वे के अनुसार साल भर में महिलाएं 30 से 64 बार रोती हैं जबकि पुरुष 6 से 17 बार ही रोते हैं. पुरुष जहां 2 से 4 मिनट तक रोते हैं, वहीं महिलाएं 6 मिनट तक रोती हैं. दरअसल महिलाओं के शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन ज्यादा होता है इसलिए उनकी आंखों में जल्दी आंसू आते हैं. रोने की वजह से महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा इमोशनली स्ट्रॉन्ग होती हैं. उनकी दिल की सेहत भी इस वजह से दुरुस्त रहती है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-why-it-is-good-to-shed-a-few-tears-why-we-cry-how-it-can-beneficial-for-mind-and-body-9175529.html

















