डॉक्टरों की मानें तो खासतौर पर शहरों में कुछ समय से बच्चों के स्वास्थ्य में चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिल रहे हैं. देशभर के अस्पताल और क्लीनिक बता रहे हैं कि बच्चों में पित्त की पथरी (Gallstones) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अब 4, 5 या 6 साल तक के बच्चों के भी गॉल ब्लेडर में पथरी मिल रही है. जिससे डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है.
सर्वे में हुआ खुलासा
भारतीय शिशु रोग अकादमी (IAP) द्वारा पांच महानगरों में किए गए हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि पेट दर्द की वजह से अस्पताल में भर्ती किए गए हर 200 बच्चों में से लगभग 1 बच्चे को पित्त की पथरी की समस्या थी. यह उन बच्चों में अधिक पाई गई जिनकी जीवनशैली निष्क्रिय थी और जिनके भोजन में जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और संतृप्त वसा की मात्रा ज्यादा रहती थी.
क्या होती है पित्त की थैली में पथरी
पित्त की पथरी ठोस जमाव होता है जो पित्ताशय (Gallbladder) में बनता है. यह अक्सर कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन से बना होता है. कई बार इसके लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जब यह पित्त के प्रवाह को रोक देता है, तो तीव्र पेट दर्द, मतली, उल्टी और पाचन संबंधी समस्या पैदा हो जाती है.
डॉ. सिन्हा ने कहा कि यह समस्या अक्सर अनदेखी रह जाती है क्योंकि इसके लक्षण साफ नहीं होते. देखा जाता है कि अक्सर बच्चे पेट दर्द की शिकायत करते हैं या खाना खाने से मना कर देते हैं और माता-पिता इसे सामान्य पाचन समस्या मान लेते हैं लेकिन ऊपरी पेट में लगातार या बार-बार होने वाला दर्द कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार ने समय पर निदान की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि अल्ट्रासाउंड पित्त की पथरी का पता लगाने का सुरक्षित और प्रभावी तरीका है. कई मामलों में दवाओं और खानपान में बदलाव से स्थिति संभाली जा सकती है, खासकर अगर लक्षण न हों लेकिन जब जटिलताएं पैदा होती हैं जैसे पित्ताशय में सूजन या अग्नाशयशोथ तो सर्जरी जरूरी हो जाती है.
क्या है उपाय
डॉ. सिन्हा कहते हैं कि ऐसे मामलों में दो विकल्प होते हैं, सतर्क प्रतीक्षा या सर्जरी. लेकिन माता-पिता को यह समझना जरूरी है कि इंतजार के दौरान जटिलताओं का खतरा बना रहता है. ऐसे में सर्जरी सही विकल्प है.
आज ही बंद कर दें ये 4 चीजें
डॉ. सिन्हा का कहना है कि पित्त की पथरी से बच्चों को बचाना है तो आज ही ये 4 चीजें एकदम बंद कर दें.
. मीठे या शर्करा युक्त पेय पदार्थ आदि बच्चों को न दें. खासतौर पर पैकेज्ड जूस, चॉकलेट आदि.
. बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम कर दें ताकि बच्चे ज्यादा से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करें.
ये रखें ध्यान
. बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, विशेषकर उन बच्चों में जिनके परिवार में पित्त की पथरी या चयापचय विकार का इतिहास है या बच्चे पेट दर्द की शिकायत बार-बार करते हैं. इसके साथ ही बच्चों को रेशेदार आहार, फल और सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार दें.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-gallbladder-stone-in-kids-is-increasing-in-metro-cities-sign-and-symptoms-of-disease-doctors-advice-to-stop-4-things-to-avoid-gallbladder-removal-ws-l-9609814.html

















