ग्रेटर नोएडा. होली का त्योहार खुशियों, रंगों और स्वादिष्ट पकवानों के साथ पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस उत्सव के बीच सेहत से जुड़ी छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी परेशानी का कारण बन सकती हैं. ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के गैस्ट्रोलॉजी विभाग के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. कपिल कुमार शर्मा ने लोगों को खास सावधानियां बरतने की सलाह दी है, ताकि त्योहार की मस्ती कहीं भारी न पड़ जाए. Bharat.one से बात करते हुए डॉ. कपिल बताते हैं कि होली के दौरान लोग रंग खेलने, मेल-मिलाप और पकवानों के आनंद में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खान-पान और स्वच्छता पर ध्यान नहीं दे पाते. यही लापरवाही पेट और लिवर से जुड़ी बीमारियों को जन्म दे सकती है. खासकर इस मौसम में फूड पॉइजनिंग, वायरल हेपेटाइटिस और लिवर में सूजन के मामले बढ़ जाते हैं.
ये सावधानी जरूरी
डॉ. कपिल ने सबसे पहले रंगों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी. बाजार में मिलने वाले कई रंगों में केमिकल और हानिकारक तत्व मिलाए जाते हैं, जो त्वचा के साथ-साथ शरीर के अंदर भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. रंग खेलते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऑर्गेनिक या हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल किया जाए. आंख, नाक और मुंह को बचाकर रखें ताकि रंग शरीर के अंदर न जाएं. होली पर गुजिया, नमकीन, पापड़ और तरह-तरह के तले हुए व्यंजन बनाए जाते हैं. कई बार एक ही तेल को बार-बार गर्म कर इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा करने से तेल में ट्रांसफैट की मात्रा बढ़ जाती है, जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक है. ट्रांसफैट का असर सिर्फ पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह लिवर, आंत और यहां तक कि दिमाग पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. इससे डायबिटीज अनियंत्रित हो सकती है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ सकता है.
डॉ. कपिल कहते हैं कि खुले में रखे या लंबे समय से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें. त्योहारों में अक्सर लोग बाहर का स्ट्रीट फूड भी खा लेते हैं, जहां स्वच्छता का पूरा ध्यान नहीं रखा जाता. अस्वच्छ भोजन और दूषित पानी के सेवन से फूड पॉइजनिंग और वायरल हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए घर का ताजा और साफ-सुथरा भोजन ही लें और हाथ धोकर ही खाना खाएं. होली के जश्न में शराब का सेवन भी आम बात है, जरूरत से ज्यादा शराब पीना खतरनाक साबित हो सकता है. अत्यधिक शराब का असर मानसिक क्षमता पर पड़ता है और व्यक्ति गलत फैसले लेने लगता है. इससे अग्न्याशय (पैंक्रियाज) में सूजन हो सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में पैंक्रियाटाइटिस कहा जाता है. लिवर पर भी गंभीर असर पड़ सकता है. कई मामलों में मरीजों को अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ता है.
डॉ. कपिल का कहना है कि त्योहार का असली आनंद तभी है जब आप स्वस्थ रहें. थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी समस्या से बचा सकती है. हाइजीन का ध्यान रखें, ताजा भोजन करें, बार-बार गर्म किए तेल से बचें और शराब का सेवन सीमित मात्रा में करें. पर्याप्त पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे.
न करें ये काम
फोर्टिस हॉस्पिटल की कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजी रश्मि शर्मा के मुताबिक, थोड़ी-सी सावधानी बरतकर होली का पूरा आनंद लिया जा सकता है और स्किन को नुकसान से बचाया जा सकता है. होली खेलने से पहले त्वचा पर मॉइश्चराइजर या नारियल तेल लगाने से एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है, जो रंगों के सीधे असर को कम करती है. धूप में खेलने वालों को SPF 30 या उससे अधिक सनस्क्रीन जरूर लगानी चाहिए. फुल स्लीव्स कपड़े पहनना और हर्बल या ऑर्गेनिक रंगों का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है. होली के बाद त्वचा को जोर से न रगड़ें, बल्कि माइल्ड क्लींजर और गुनगुने पानी से साफ करें. यदि लालिमा, खुजली या जलन 24–48 घंटे से ज्यादा रहे, तो तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करें.
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