Home Lifestyle Health होली के रंगों का त्वचा, आंखों और बालों पर असर: सावधानियां और...

होली के रंगों का त्वचा, आंखों और बालों पर असर: सावधानियां और उपाय.

0
2


Last Updated:

होली का रंग खेलने के बाद कुछ लोग सिर में भारीपन महसूस करते हैं तो कुछ को त्वचा में खिंचाव या खुजली जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. रंगों का असर कैसे और क्या होता है और फिर हमें कितना और कितनी देर बाद नहाना चाहिए.

Explainer: जब रंग गुलाल लगते हैं चेहरे और सिर पर तो क्या असर होता है शरीर पर

हाइलाइट्स

  • होली के रंगों से त्वचा पर खुजली और जलन हो सकती है
  • रासायनिक रंग आंखों में जलन और धुंधलापन पैदा कर सकते हैं
  • होली के बाद 15-20 मिनट तक नहाना सबसे ठीक रहता है

होली की रंग तरंग दोपहर बीतते थमने लगती है. गाना, थिरकना, रंग लगाना, रंगों की बौछार और मस्ती धीरे धीरे हल्की पड़ जाती है लेकिन होली के इस रंगारंग त्योहार में जब रंग चेहरे, बालों के साथ हर जगह लगते हैं तो शरीर पर उसका असर तो होता ही है. आइए जानते हैं कि होली के रंग और गुलाल शरीर पर किस तरह असर डालते हैं. रंग लगते ही शरीर में क्या होने लगता है.

परंपरागत रूप से रंग प्राकृतिक स्रोतों जैसे हल्दी, चंदन, टेसू के फूलों और अन्य जड़ी-बूटियों से बनाए जाते थे, जो त्वचा और शरीर के लिए लाभकारी थे. लेकिन आधुनिक समय में रासायनिक रंगों और सिंथेटिक गुलाल का चलन बढ़ गया है, जिसके कारण इनके शरीर पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का असर देखने को मिलता है.

सवाल – रंगों का त्वचा पर क्या असर होता है, क्या ये त्वचा को निखारते भी हैं?
– होली के रंग और गुलाल सबसे पहले हमारे शरीर की सबसे बड़ी परत यानी त्वचा के संपर्क में आते हैं. प्राकृतिक रंग जैसे हल्दी से बना पीला रंग या चुकंदर से बना लाल रंग त्वचा के लिए सुरक्षित और कभी-कभी लाभकारी भी होते हैं. हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा को निखार सकते हैं और छोटे-मोटे घावों को ठीक करने में मदद कर सकते हैं.

लेकिन आजकल इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंगों में लेड, मरकरी, क्रोमियम और सिलिका जैसे हानिकारक तत्व हो सकते हैं. ये त्वचा पर एलर्जी, खुजली, लालिमा या जलन पैदा कर सकते हैं। कुछ लोगों को रंगों के कारण डर्मेटाइटिस (त्वचा की सूजन) की समस्या हो सकती है. गुलाल, जो सूखा रंग होता है, अगर बारीक कणों वाला हो तो त्वचा के रोमछिद्रों में घुस सकता है और जलन पैदा कर सकता है. बार-बार रगड़ने से त्वचा छिल भी सकती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (image generated by Meta ai)

सवाल – रंगों का आंखों पर भी कोई असर पड़ता है?
– रंग और गुलाल का आंखों पर पड़ना बहुत आम है। प्राकृतिक रंग आमतौर पर आंखों को नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन अगर रासायनिक रंग आंखों में चले जाएं तो जलन, लालिमा, पानी बहना या अस्थायी धुंधलापन हो सकता है.

कुछ सस्ते रंगों में अल्कलाइन तत्व या डाई होती है, जो कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकती है. गुलाल के छोटे कण आंखों में फंस सकते हैं, जिससे खरोंच या इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. अगर रंग को तुरंत साफ न किया जाए, तो गंभीर मामलों में आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ सकता है.

सवाल – होली खेलते समय आजकल ज्यादाकर चेहरे और बालों पर जमकर रंग लगा दिया जाता है या उस पर गुलाल डाल देते हैं. इससे क्या होता है?
– होली खेलते समय सिर और बालों पर भी रंग और गुलाल लगते हैं. प्राकृतिक रंग जैसे मेहंदी से बना हरा रंग बालों को पोषण दे सकता है लेकिन रासायनिक रंगों में मौजूद डाई और अल्कोहल बालों को रूखा, बेजान और कमजोर बना सकते हैं. ये रसायन स्कैल्प (सिर की त्वचा) में जलन पैदा कर सकते हैं और बालों के झड़ने की समस्या को बढ़ा सकते हैं. गुलाल के कण सिर की त्वचा में खुजली या डैंड्रफ का कारण बन सकते हैं, खासकर अगर इसे ठीक से न धोया जाए.

प्रतीकात्मक तस्वीर (image generated by Meta ai)

सवाल – सांस पर इसका क्या असर हो सकता है?
– गुलाल के बारीक कण हवा में उड़ते हैं और सांस के जरिए फेफड़ों में जा सकते हैं. प्राकृतिक गुलाल से आमतौर पर कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन रासायनिक गुलाल में सिलिका या टैल्क जैसे तत्व मिले हो सकते हैं, जो श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक हैं. इससे खांसी, छींक, सांस लेने में तकलीफ या एलर्जी हो सकती है. अस्थमा के मरीजों के लिए यह समस्या और गंभीर हो सकती है. गीले रंगों का धुआं या वाष्प भी नाक और गले में जलन पैदा कर सकता है.

सवाल – कई बार रंग मुंह के अंदर चले जाते हैं, जीभ को रंगीन कर देते हैं?
– होली खेलते समय गलती से रंग मुंह में चले जाना असामान्य नहीं है. प्राकृतिक रंग अगर थोड़ी मात्रा में पेट में चले जाएं, तो आमतौर पर नुकसान नहीं होता. लेकिन रासायनिक रंगों में भारी धातुएं जैसे लेड या मरकरी हो सकती हैं, जो पेट में जाकर उल्टी, दस्त, पेट दर्द या गंभीर मामलों में विषाक्तता (टॉक्सिसिटी) का कारण बन सकती हैं. बच्चों में यह खतरा ज्यादा होता है.

सवाल – अन्य किस तरह का प्रभाव हो सकता है?
– लंबे समय तक रंगों के संपर्क में रहने से शरीर का तापमान बढ़ सकता है, खासकर गर्म मौसम में. रासायनिक रंगों से त्वचा के जरिए रसायन खून में मिल सकते हैं, जिससे थकान, सिरदर्द या चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गर्भवती महिलाओं या कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को इन रंगों से ज्यादा सावधान रहना चाहिए, क्योंकि इनका असर उनके स्वास्थ्य पर गंभीर हो सकता है.

सवाल – रंग लगने के बाद अक्सर सिर के भारीपन और सिरदर्द की शिकायत होती है तो आंखों में जलन भी. ऐसा क्या रंगों के असर से होता है?
– होली के रंगों और गुलाल के कारण कभी-कभी सिरदर्द और आंखों में शिकायत होने की समस्या आम है. इसके पीछे कई शारीरिक और रासायनिक कारण हो सकते हैं. आधुनिक रंगों और गुलाल में अक्सर रासायनिक डाई, लेड ऑक्साइड, मरकरी सल्फाइड, या अल्कोहल जैसे तत्व मिले होते हैं. ये रसायन त्वचा के जरिए या सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। जब ये रक्तप्रवाह में मिलते हैं, तो मस्तिष्क तक पहुंचकर न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सिरदर्द होता है. खासकर सस्ते रंगों में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वेंट्स की गंध मस्तिष्क को प्रभावित करती है.

होली खेलते समय लोग अक्सर घंटों धूप में रहते हैं और पानी पीना भूल जाते हैं. रंगों और गुलाल के साथ पसीना और गर्मी शरीर से पानी की मात्रा कम कर देती है. निर्जलीकरण सिरदर्द का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन और हाइड्रेशन नहीं मिल पाता.

कुछ लोगों को रासायनिक रंगों या गुलाल से एलर्जी होती है. यह एलर्जी शरीर में हिस्टामाइन रिलीज करती है, जो सिरदर्द का कारण बन सकती है.रंगों में मौजूद रसायन जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्रोमियम, या कृत्रिम डाई आंखों की नाजुक झिल्लियों (कॉर्निया और कंजंक्टिवा) के लिए हानिकारक होते हैं. ये जलन पैदा करते हैं, जिससे आंखें लाल हो जाती हैं, पानी बहने लगता है, या खुजली होती है.

सवाल – अगर रंग लगने के बाद कई घंटों तक नहीं नहाएं तो क्या होता है?
– अगर होली के रंग और गुलाल लगने के बाद कई घंटों तक नहाया न जाए, तो इसके शरीर पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं. अगर रंग कई घंटों तक त्वचा पर रहें, तो रंग में मिले रसायन धीरे-धीरे त्वचा में अवशोषित हो सकते हैं, जिससे खुजली, लालिमा, जलन, या फफोले पड़ सकते हैं. संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में डर्मेटाइटिस (त्वचा की सूजन) की समस्या बढ़ सकती है.

सवाल – रंग लगने के बाद हम सभी देर तक नहाते हैं ताकि शरीर पर लगे रंग को छुटाया जा सके, इससे क्या फायदा या नुकसान होता है?
– जब होली में शरीर में रंग लगने के बाद हम देर तक नहाकर उसे छुटाते हैं तो इससे क्या फायदा या नुकसान शरीर को होता है. लंबे समय तक पानी और हल्के साबुन से नहाने से त्वचा के रोमछिद्र खुलते हैं और रंगों से जमी गंदगी निकल जाती है. इससे त्वचा को राहत मिलती है. जलन या खुजली की समस्या कम होती है. देर तक नहाने और शैंपू करने से बालों में जमा रंग और गुलाल अच्छी तरह साफ हो जाते हैं. इससे बाल रूखे होने से बचते हैं और स्कैल्प में जलन या डैंड्रफ की संभावना कम होती है.

गर्म पानी से नहाने से शरीर की थकान दूर होती है, खासकर होली की गतिविधियों के बाद. यह सिरदर्द या मांसपेशियों के तनाव को कम करने में मदद करता है और ताजगी का अहसास देता है. रंगों के साथ गंदगी या बैक्टीरिया त्वचा पर जम सकते हैं. देर तक नहाने से ये पूरी तरह साफ हो जाते हैं.

अगर देर तक गर्म पानी और साबुन से नहाया जाए, तो त्वचा की प्राकृतिक नमी (सीबम) खत्म हो सकती है. रासायनिक रंग पहले ही त्वचा को रूखा कर देते हैं. लंबे समय तक नहाने से यह समस्या बढ़ सकती है, जिससे त्वचा फटने या छिलने लगती है. देर तक पानी में रहने और बार-बार शैंपू करने से बालों की प्राकृतिक चमक और तेल कम हो सकता है. बहुत देर तक गर्म पानी से नहाने से शरीर का तापमान बढ़ सकता है, जिससे चक्कर या थकान महसूस हो सकती है.

सवाल -होली में शरीर में रंग लगने के बाद कितनी देर तक नहाना ठीक रहता है?
– कई शोध कहती हैं होली के रंग लगने के बाद 15 से 20 मिनट तक नहाना सबसे ठीक रहता है. यह समय रंगों को पूरी तरह साफ करने, त्वचा और बालों की देखभाल करने, और शरीर को नुकसान से बचाने के लिए संतुलित है. प्राकृतिक रंगों के लिए 10-15 मिनट और रासायनिक रंगों के लिए 20 मिनट तक का समय पर्याप्त है.

homeknowledge

Explainer: जब रंग गुलाल लगते हैं चेहरे और सिर पर तो क्या असर होता है शरीर पर


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/news/knowledge/explainer-when-holi-colors-applied-on-the-face-and-head-effect-on-the-body-how-long-should-bath-9101240.html

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here