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Health tips : अब मधुमक्खी के काटने से डरने की जरूरत नहीं है. रिसर्चरों ने ऐसी दवा खोज ली है, जो इनके जहर को चुटकियों में बेअसर कर सकती है. इसे शरीर में इंजेक्ट किया जाएगा. ये सिर्फ दर्द ही नहीं, बल्कि जानलेवा रिएक्शन भी बचाएगी.
गोरखपुर. मधुमक्खी के डंक से होने वाले असहनीय दर्द और एलर्जी रिएक्शन अब जल्द ही बीती बात हो सकते हैं. गोरखपुर विश्वविद्यालय (Gorakhpur University) के शोधकर्ताओं ने एक गेम-चेंजिंग पॉलीक्लोनल एंटीबॉडी (Polyclonal Antibody) तैयार की है, जो सिर्फ चार घंटे में दर्द से राहत दिला सकती है. इस महत्त्वपूर्ण खोज के लिए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को भारत सरकार से दो पेटेंट भी मिल चुके हैं. रिसर्च टीम के मुखिया, डॉ. शोएब अहमद और उनकी टीम ने बताया कि इस खास एंटीबॉडी को शरीर में इंजेक्ट (inject) किया जाएगा. यह एंटीबॉडी सीधे मधुमक्खी के जहर को बेअसर (neutralize) करने का काम करेगी. जब कोई मधुमक्खी डंक मारती है, तो कई बार व्यक्ति को सिर्फ दर्द ही नहीं, बल्कि जानलेवा हाइपरसेंसिटिविटी रिएक्शन भी हो सकता है. यह नई एंटीबॉडी इन दोनों तरह की प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में कारगर साबित होगी.
विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग से जुड़े प्रो. रविकांत दावा करते हैं कि इस एंटीबॉडी के माध्यम से मधुमक्खी के विष से होने वाले नुकसान को सफलतापूर्वक रोका जा सकता है. इस प्रभावी ‘एंटी-वेनम’ के निर्माण में शोधकर्ताओं को कड़ी मेहनत करनी पड़ी. डॉ. शोएब ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने लगभग 20 हजार मधुमक्खियों के डंक से जहर (venom) इकट्ठा किया. यह प्रक्रिया सुबह तीन बजे शुरू होती थी, जब मधुमक्खियां शांत रहती थीं. इस जहर को फिर डीप-फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया.
चूहों की मदद से तैयार
इसके बाद, इस जहर की बहुत कम मात्रा चूहों में इंजेक्ट की गई. यह इंसानों में इस्तेमाल होने वाली ‘एंटी-वेनम’ दवा बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया है. चूहों को इसलिए चुना गया क्योंकि इंसानों और चूहों में विष के प्रति समान प्रतिक्रिया (similar response) देखी जाती है. एक महीने के भीतर, इन चूहों के प्लाज्मा (रक्त का तरल भाग) में मधुमक्खी के जहर को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी बन चुकी थी. इस एंटीबॉडी को जब दोबारा चूहों में इंजेक्ट करके जांचा गया तो यह जहर को पूरी तरह से न्यूट्रलाइज करने में सफल रही. यह सफल शोध, मधुमक्खी के डंक से पीड़ित लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में मील का पत्थर है.

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-gorakhpur-university-research-bee-sting-antibodies-venom-get-relief-local18-9682863.html

















