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AI टूल से डायबिटिक रेटिनोपैथी की पहचान अब एम्स नई दिल्ली में संभव aiims delhi doctors make ai tool to detect diabetic retinopathy in minutes by taking photo of eyes


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एम्स नई दिल्ली ने एक ऐसा एआई एप्‍लीकेशन बनाया है जो आपकी आंखों के फोटो से ही म‍िनटों में बता देगा क‍ि आपको डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी है या नहीं. इस टूल को फ‍िलहाल सीडीएससीओ के पास मंजूरी के ल‍िए भेजा गया है. इस एप को और भी सस्‍ता और सरल बनाने पर फ‍िलहाल काम चल रहा है. डॉ. रोहन चावला से जानते हैं व‍िस्‍तार से..

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आंखों का फोटो ख‍िंचते ही म‍िनटों में पता चलेगा बीमारी है या नहीं? एम्स....आंखों की तस्‍वीर से पता चलेगा आंख में डायब‍िट‍िक रेट‍िनोपैथी है या नहीं.

AI tool for Diabetic retinopathy: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल आज लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है. वहीं अब हेल्थ सेक्टर में भी यह काफी फायदेमंद हो सकता है. एआई टूल अब आपकी बीमारी का पता भी बता सकता है. हाल ही में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली ने ऐसा एआई एप्लीकेशन बनाया है जो डायबिटीज के मरीजों को देखते ही बता देगा कि आपकी आंखों में गंभीर बीमारी है या नहीं. यह टूल आंखों में अंधेपन के लिए जिम्मेदार डायबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगाएगा. इस बीमारी से लाखों की संख्या में लोग जूझ रहे हैं लेकिन डायग्नोसिस के अभाव में उन्हें इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता है.

एम्स नई दिल्ली ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ई हेल्थ डिविजन और वाधवानी एआई के साथ मिलकर यह एआई मोबाइल एप्लीकेशन बनाया है. इस बारे में एम्स के आरपी सेंटर में रेटिना स्पेशलिस्ट और प्रोफेसर डॉ. रोहन चावला ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगाने के लिए बहुत सारे एआई टूल्स भारत में पहले भी बनाए गए हैं लेकिन उनकी वैधता पर सवाल हैं क्योंकि उनकी रिसर्च का दायरा काफी सीमित रहा है और सिर्फ 90 से 120 तस्वीरों से क्लीनिकल वैधता सिद्ध नहीं होती. लेकिन इस मॉडल को 3 से 4 हजार रेटिनल तस्वीरों पर टेस्ट किया गया है और 95 फीसदी मामलों में सटीकता मिली है.

एप्लीकेशन कैसे करता है काम
इस एप्लीकेशन का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले कोई ऑप्टोमेट्रिस्ट या आई डॉक्टर मरीज की आंख का फोटो फंडस कैमरा से लेता है. यह एक विशेष माइक्रोस्कोप कैमरा होता है जो रेटिना, ऑप्टिक डिस्क और मैक्यूला और रक्त नलिकाओं की फोटो खींचता है. यह तस्वीर एक बार अपलोड होने के बाद एआई इस बात का विश्लेषण करता है कि आंख नॉर्मल है या इसमें माइल्ड, मॉडरेट या सीवियर डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण हैं. इसे ऑपरेट करना काफी सरल है.

अभी स्मार्टफोन पर हो रहा काम
डॉ. चावला बताते हैं कि एआई टूल बन चुका है और अब टीम सस्ते फंडस कैमरा और स्मार्टफोन पर इस एप्लीकेशन का इस्तेमाल हो सके, इसके लिए नए वर्जन पर काम कर रही है. अभी फंडस कैमरा से लेकर इस टूल के साथ पूरी यूनिट की कीमत करीब 3 लाख रुपये है. कोशिश की जा रही है कि इंटरनेट कनेक्शन न होने पर भी इसका इस्तेमाल हो सके. यह एप अभी सेंट्रल ड्रग स्टेंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन में वैधता के लिए गया है.

दो साल की मेहनत लाई रंग
डॉ. चावला ने बताया कि इसे दो साल की मेहनत से बनाया गया है. उम्मीद है कि अगले 6 महीनों में इसे सीडीएससीओ का सर्टिफिकेशन मिल जाए. एक बार स्वीकृत होने के बाद इसे मंत्रालय को देशभर में इस्तेमाल करने के लिए सिफारिश की जाएगी.

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priya gautamSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.Bharat.one.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.Bharat.one.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्… और पढ़ें

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