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AIIMS Director Warning: दुनिया के प्रतिष्ठित अस्पतालों में शुमार और देश की शान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के डायरेक्टर डॉ. एम. श्रीनिवास ने एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल को लेकर सीधी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि बिना डॉक्टर की सलाह के अगर आप एंटीबायोटिक दवा खाते हैं तो इसका शरीर पर घातक नुकसान हो सकता है.
AIIMS Director Warning: एम्स AIIMS के डायरेक्टर डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती. इसके बावजूद लोग एंटीबायोटिक का बिना वजह धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं. डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि यह बेहद गलत चलन है और इसे तुरंत बंद कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल का मुद्दा उठाकर देश की आंखें खोल दी हैं. उन्होंने बताया कि बार-बार बिना वजह एंटीबायोटिक दवा लेने से बैक्टीरिया इतने ताकतवर हो जाते हैं कि फिर कोई दवा काम नहीं करती.
देश में एंटीबायोटिक इस्तेमाल सिस्टम से हो
डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि AIIMS में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर एक मजबूत सिस्टम मौजूद है. इसके तहत एक विशेष कमेटी और डॉक्टरों की पूरी टीम काम करती है, जो तय SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के अनुसार फैसला लेती है कि एंटीबायोटिक कब देनी है और कब नहीं. उन्होंने बताया कि एम्स लीडरशिप की भूमिका निभाता है और देश के अन्य मेडिकल कॉलेजों को भी एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल को लेकर ट्रेनिंग दी जाती है. डॉ. श्रीनिवास ने जोर देकर कहा कि आज यह बेहद जरूरी है कि आम लोग डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और एंटीबायोटिक तभी लें, जब वास्तव में उसकी जरूरत हो.
डॉक्टर भी इसका पूरा पालन करें
डॉ. एम श्रीनिवास ने बताया कि दवा को डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर और पूरी अवधि तक लेना जरूरी है. अधूरा इलाज या मनमाने तरीके से दवा लेना एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को बढ़ाता है. यह संदेश सिर्फ आम लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों के लिए भी उतना ही अहम है. सभी डॉक्टरों को एक समान स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए. कई बार साफ-सुथरी सर्जरी में भी एंटीबायोटिक दे दी जाती है, जबकि उसकी जरूरत नहीं होती, जो गलत है. उन्होंने चेतावनी दी कि आज जब मरीजों को आईसीयू में पहुंचना पड़ता है और तब जब उन्हें एंटीबायोटिक की जरूरत होती है तो यह काम करना बंद कर देती है. इसलिए अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई, तो भविष्य में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए हमारे पास प्रभावी दवाएं ही नहीं बचेंगी.
एंटीबायोटिक का मिसयूज कैसे होता है
निमोनिया, सेप्सिस, मेनिनजाइटिस, यूटीआई, टीबी, कुछ प्रकार के घाव, डायरिया आदि बीमारी बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होती है लेकिन अधिकांश सर्दी-जुकाम वाला बुखार, सांस की बीमारियां, वेजाइनल इंफेक्शन आदि फंगल या अन्य इंफेक्शन वाली बीमारियां होती हैं लेकिन अधिकांश लोग एंटीबायोटिक दवाइयां अपने मन से खरीद कर खा लेते हैं. अधिकांश लोगों को पता नहीं रहता है कि एंटीबायोटिक दवाइयां बैक्टीरिया को मारने के लिए है. जब बिना बैक्टीरिया वाली बीमारियों में आप एंटीबायोटिक खाएंगे तो धीरे-धीरे आंत के बैक्टीरिया ढीठ हो जाएंगे और जब वास्तव में बैक्टीरियल इंफेक्शन होगा तो वह दवा काम ही नहीं करेगी. क्योंकि ये बैक्टीरिया खुद को बचाने के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं और इसे ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है.
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्यों होता है
जब बैक्टीरिया किसी दवा के प्रति रेजिस्टेंस बन जाते हैं, तो इसका मतलब है कि वे किसी न किसी रूप में बदल जाते हैं. यह बदलाव बैक्टीरिया को दवा के प्रभाव से बचा सकता है या दवा को बैक्टीरिया तक पहुंचने से रोक सकता है. कभी-कभी यह बदलाव बैक्टीरिया में ऐसी क्षमता विकसित कर देती है कि यह आसानी से दवा को निष्क्रिय कर देता है. ये बैक्टीरिया शरीर में अनवरत रुप से जीवित रह जाते हैं. वे तेजी से अपनी संख्या बढ़ते हैं और अपनी प्रतिरोधक क्षमता आगे की पीढ़ियों को सौंप देते हैं. इसके अलावा, कुछ बैक्टीरिया अपनी अपनी इस रेजिस्टेंस क्षमता को दूसरे बैक्टीरिया को भी दे देते हैं. यह बिल्कुल ऐसा ही है जैसे वे एक-दूसरे को जीवित रहने के तरीके सिखा रहे हों.
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Excelled with colors in media industry, enriched more than 19 years of professional experience. Lakshmi Narayan is currently leading the Lifestyle, Health, and Religion section at Bharat.one. His role blends in-dep…और पढ़ें
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