Home Lifestyle Health ASHA वर्करों को म‍िलेगा AI का साथ, गांव-गांव में म‍िलेगी ब्रेस्‍ट कैंसर...

ASHA वर्करों को म‍िलेगा AI का साथ, गांव-गांव में म‍िलेगी ब्रेस्‍ट कैंसर को मात! AIIMS ने की तैयारी

0
5



AIIMS New Breast Cancer Detection Tool: दुनिया भर में महिलाओं में होने वाला सबसे कॉमन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर है जिसका सही वक्त पर इलाज न किया जाए, तो यह काफी गंभीर और जानलेवा भी हो सकता है. कैंसर से हो रही इस जंग में सबसे बड़ी परेशानी आती है कि इसे समय से ड‍िटेक्‍ट नहीं क‍िया जाता. अक्‍सर महि‍लाएं इससे जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन अब दूरदराज और गांव के इलाकों में भी महि‍लाओं के इस कैंसर का पहचान समय से की जा सकेगी. और इसका ज‍िम्‍मा उठाएंगी इंड‍ियन प्राइमरी हेल्‍थकेयर स‍िस्‍टम की सबसे मजबूत कड़ी, आशा वर्कर. अब दूरदराज के गांवों और कस्बों में आशा वर्कर जल्द ही अपने नियमित घरेलू काम के साथ एक और महत्वपूर्ण कार्य करती नजर आएंगी.

आशा वर्करों की पहुंच गांव और दूरदराज के लोगों के बीच होती है और वो वैक्‍स‍िनेशन और प्राइमरी हेल्‍थकेयर से जुड़ी सारी सुव‍िधाएं इन सुदूर इलाकों में पहुंचाती आ रही हैं. लेकिन अब जल्‍द ही AI की मदद से ये आशा वर्कर इन ग्रामीण इलाकों में पर्सनल हेल्‍थ और बीमार‍ियों की ह‍िस्‍ट्री न‍िकालने तक का काम करेंगी. आशा वर्करों की मदद से पाए गए इस डाटा को एनलाइज कर AI टूल ये बता पाएंगे कि ब्रेस्‍ट कैंसर का र‍िस्‍क क‍ितना है. आशा वर्करों के साथ म‍िलकर ये प्रोजेक्‍ट AIIMS कर रहा है. इस स्‍टडी का नेतृत्व डॉ. जितेंद्र मीना, एसोसिएट प्रोफेसर, प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी द्वारा किया जा रहा है.

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (NCI), AIIMS का उद्देश्य स्तन कैंसर का जल्दी पता लगाने की दर में सुधार करना और मृत्यु दर को कम करना है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है. भारत में कैंसर से होने वाली सभी मौतों में स्तन कैंसर का योगदान 10.6 प्रतिशत है. स्तन कैंसर पर फोकस करने के अलावा, एम्स और आईआईटी दिल्ली इस डेटा के माध्‍यम से डायब‍िटीज, हृदय संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक सहित नॉन-ट्रांसम‍िट‍िड बीमार‍ियों से संबंध‍ित भी जानकारी इकट्ठी करेगी.

इस पहल पर बात करते हुए दिल्ली के एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल (आईआरसीएच) में रेडियोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृतिका रंगराजन कहती हैं, ‘भारत में जब तक ब्रेस्‍ट कैंसर के ज्‍यादातर मामलों का पता चलता है, वो तब तक तीसरी या चौथी स्‍टेज तक पहुंच चुका होता है. जहां मरीज को इलाज देना और उसे सुरक्ष‍ित रखना मुश्किल हो जाता है. AI हमें दो मोर्चों पर मदद करेगा. सबसे पहले, यह उन महिलाओं की पहचान करने के लिए आंकड़ों को एनलाइज करेगा जिन्हें मैमोग्राम (विशिष्ट एक्स-रे) की आवश्यकता है. इससे दूरदराज के इलाकों में भी स्तन कैंसर की जांच सुनिश्चित होगी, जहां हमेशा प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट की कमी होती है, अन्यथा निदान में बहुत समय बर्बाद होता है.’


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-now-ai-and-asha-workers-work-together-to-map-risk-factors-aiims-devises-new-breast-cancer-detection-tool-interesting-study-8903373.html

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here