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Washing Machine Hygiene Tips: वॉशिंग मशीन में कपड़े धोना आरामदायक होता है, लेकिन इसकी साफ-सफाई जरूरी है. अगर वॉशिंग मशीन की नियमित रूप से सफाई न की जाए, तो उसमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं. ये बैक्टीरिया और फंगस कपड़ों के जरिए सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. रबर सील की सफाई, महीने में एक बार गर्म पानी का वॉश और डिटर्जेंट ड्रॉअर के अलावा फिल्टर की देखभाल से इस खतरे को आसानी से रोका जा सकता है.

वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल आजकल अधिकतर घरों में किया जा रहा है. अब हाथ से कपड़े धोने की परंपरा खत्म हो रही है. मशीन में कपड़े धोना आसान है और इससे लोगों का काफी समय भी बचता है. अधिकतर लोग वॉशिंग मशीन को सफाई का भरोसेमंद साधन मानते हैं. हालांकि बहुत कम लोग यह जानते हैं कि वॉशिंग मशीन की रेगुलर सफाई न की जाए, तो वही मशीन धीरे-धीरे बैक्टीरिया और फंगस का घर बन सकती है. इससे आपकी सेहत बिगड़ सकती है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक बाहर से वॉशिंग मशीन भले ही साफ दिखे, लेकिन असली गंदगी अक्सर अंदर छिपी होती है. रबर की सील, डिटर्जेंट ड्रॉअर और ड्रम के कोनों में नमी, साबुन के अवशेष और कपड़ों से निकली गंदगी जमा हो जाती है. कई बार मशीन खोलने पर अजीब सी बदबू या काले-भूरे धब्बे दिखते हैं, जो इस बात का संकेत होते हैं कि अंदर माइक्रोब्स पनप रहे हैं.

कई रिसर्च में पाया गया है कि वॉशिंग मशीन के अंदर बैक्टीरिया और फंगस सामान्य वॉश साइकल के बावजूद जिंदा रह सकते हैं. खासतौर पर जब लोग ज्यादातर कपड़े ठंडे पानी में धोते हैं और वॉश के तुरंत बाद मशीन का दरवाजा बंद कर देते हैं. इससे मशीन के अंदर नमी फंस जाती है, जो कीटाणुओं के पनपने के लिए माहौल बना देती है.
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वॉशिंग मशीन में हर वॉश के दौरान कपड़ों से पसीना, डेड स्किन सेल्स, धूल और फाइबर निकलते हैं. ये सब पानी में घुलकर मशीन के अंदर घूमते हैं और कुछ हिस्सा दीवारों और सील पर चिपक जाता है. यह परत पूरी तरह सूखती नहीं, जिससे बैक्टीरिया खत्म नहीं होते हैं. समय के साथ यही परत कपड़ों में अजीब सी बदबू और त्वचा में जलन जैसी समस्याओं की वजह बन सकती है.

इससे बचाव का पहला तरीका है रबर सील और ड्रम की सफाई. समय-समय पर एक गीले कपड़े से रबर सील के अंदर और ड्रम को पोंछना चाहिए. हल्का सिरका मिला हुआ पानी या सामान्य क्लीनर भी उपयोग कर सकते हैं. इसके अलावा हर वॉश के बाद मशीन का दरवाजा कुछ समय के लिए खुला छोड़ना जरूरी है, ताकि अंदर की नमी सूख सके.

दूसरा जरूरी उपाय कभी-कभी गर्म पानी से वॉश चलाना है. भले ही ठंडे पानी से कपड़े धोना फायदेमंद हो, लेकिन महीने में एक बार खाली मशीन में गर्म पानी का साइकल चलाना चाहिए. गर्म पानी जमा हुई चिकनाई, साबुन के अवशेष और माइक्रोब्स को काफी हद तक खत्म कर देता है. तौलिए और बेडशीट जैसे कपड़े भी समय-समय पर गर्म पानी में धोने चाहिए.

तीसरा उपाय डिटर्जेंट ड्रॉअर और मशीन का फिल्टर साफ करना है. डिटर्जेंट ट्रे में गीला साबुन और फंगस आसानी से जम जाता है, इसलिए इसे निकालकर नियमित रूप से धोना चाहिए. वहीं फिल्टर बाल, रेशे और जेब में छूटी चीजों को रोकता है. अगर यह साफ न हो, तो मशीन में पानी जमा रह सकता है, जिससे बैक्टीरिया और तेजी से बढ़ते हैं.

वॉशिंग मशीन खुद कोई बीमारी नहीं फैलाती, लेकिन उसकी अनदेखी से सेहत को नुकसान जरूर हो सकता है. थोड़ी-सी नियमित सफाई, सही आदतें और समय-समय पर मेंटेनेंस से न सिर्फ कपड़े सच में साफ रहते हैं, बल्कि बदबू, त्वचा की समस्याओं और एलर्जी से भी बचाव हो सकता है.
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https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/health-can-your-washing-machine-make-you-sick-hidden-germs-you-should-know-about-useful-health-tips-10017765.html

















