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Doctors of AIIMS Patna develpoed special device effective in neuro and brain surgery patent granted for 20 years

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Neuro Surgery New Device: पटना एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के हेड डॉ. विकास चंद्र झा और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. संगम झा ने मिलकर एक खास खास डिवाइस बनाया है. इस डिवाइस की मदद से स्पाइन, ब्रेन और ब्रेन में ट्यूमर…और पढ़ें

पटना एम्स के डॉक्टरों ने बनाया कमाल का डिवाइस, 20 साल के लिए मिला पेटेंट

न्यूरो सर्जरी में क्रांति लाएगा पटना एम्स का डिवाइस (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पटना. न्यूरो सर्जरी के लिए अब अमेरिकन या किसी दूसरे डिवाइस पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. पटना एम्स के डॉक्टरों ने खुद अपना डिवाइस बना लिया है. भारत सरकार से पेटेंट भी मिल गया है. यह पेटेंट 20 वर्षों के लिए मिला है. पटना एम्स के किसी डिवाइस को पेटेंट पहली बार मिला है. इस डिवाइस का उपयोग स्पाइन, ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन में चोट की सर्जरी के लिए किया जायेगा.

इस खास डिवाइस को एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के हेड डॉ. विकास चंद्र झा और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. संगम झा द्वारा विकसित किया गया है. डॉ. विकास चंद्र झा ने बताया कि स्पाइन, ब्रेन और ब्रेन में ट्यूमर की सर्जरी इस डिवाइस से बेहतर तरीके से हो पायेगी.

अमेरिकन डिवाइस से है बेहतर 

डॉ. विकास चंद्र झा द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक अब तक न्यूरो, स्पाइन सर्जरी में अमेरिका में पेटेंट डिवाइस का इस्तेमाल होता आ रहा है. अमेरिकन डिवाइस से मात्र एक दिशा में ही नसों की पहचान हो सकती थी. ऑपरेशन वाले हिस्से की पहचान करने के लिए इस डिवाइस को बार-बार नसों में डाला जाता था. इस वजह से ऑपरेशन के दौरान जोखिम ज्यादा है. इसी जोखिम को कम करने के लिए एम्स में उनके द्वारा विकसित “इंट्रा सर्जिकल नर्व मैपिंग प्रोब सक्शन ट्यूब” डिवाइस एक साथ अलग-अलग कई दिशा में ना सिर्फ नसों की पहचान (मल्टी डायरेक्शन डिटेक्शन मशीन) बल्कि सर्जरी वाले स्थल की सटीक पहचान करती है और सटीक जानकारी देती है. इसको बार-बार नसों में डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस वजह से ऑपरेशन में जोखिम ना के बराबर है. फिलहाल इसका ट्रायल एम्स में चल रहा है.

डिवाइस को बनाने में लगा दो साल का वक्त

पटना एम्स के दो बड़े डॉक्टर ने जिस डिवाइस को तैयार किया है, उसे बनाने में करीब दो साल का समय लगा. न्यूरो सर्जरी करते समय अमेरिकन डिवाइस से हमेशा समस्या होती थी. डॉ. विकास चंद्र झा ने इस समस्या का हल खोजने का निश्चय किया. इसके लिए उन्होंने कई जरूरी उपकरणों को देश के अलग-अलग हिस्से से मंगाया. डॉ. संगम के साथ मिलकर इस डिवाइस पर लगातार शोध और जरूरत के अनुसार सुधार करते रहे. उन्होंने बताया कि इसे तैयार करने में लगभग 5 लाख की सामग्री लगी. इसी उपकरणों को अगर वो विदेशों से मंगवाते तो 14-15 लाख रुपये तक का खर्च आता.

आईसीएमआर मशीन का करेगा उत्पादन

न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में डॉ. विकास चंद्र झा और डॉ. संगम झा के इस खास डिवाइस को जैसे ही पेटेंट मिला, कई प्राइवेट कंपनियों ने संपर्क किया. लेकिन, उन्होंने मशीन के रूप में इस डिवाइस को विकसित करने की जिम्मेदारी भारत सरकार की संस्था आईसीएमआर को सौंप दिया है. इस डिवाइस के डिजाइन को मशीन के रूप तैयार करने की जिम्मेवारी आईसीएमआर की होगी. एक मशीन के रूप में आईसीएमआर इसका उत्पादन करेगा और देशभर के मेडिकल संस्थानों में इसका उपयोग शुरू होगा.

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पटना एम्स के डॉक्टरों ने बनाया कमाल का डिवाइस, 20 साल के लिए मिला पेटेंट


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