How Much Food Good for You: हमारे शरीर के लिए खाना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि यह बॉडी के लिए फ्यूल का काम करता है. हेल्दी खाना शरीर को मजबूत बनाता है, जबकि अनहेल्दी फूड बॉडी को कमजोर करने का काम करता है. आयुर्वेद के अनुसार सही मात्रा और सही तरीके से किया गया भोजन शरीर को एनर्जी देता है, अंगों की वृद्धि करता है और बीमारियों से बचाने में मदद करता है. आयुर्वेद में भोजन को जीवन को संचालित करने वाला एक महत्वपूर्ण अनुशासन माना गया है. इसके अनुसार भोजन की मात्रा जितनी संतुलित होगी, पाचन अग्नि उतनी ही स्थिर और मजबूत बनी रहेगी. समस्या यह है कि आज हम यह नहीं समझ पाते कि कितना खाना शरीर के लिए सही है.
आयुर्वेद मानता है कि भोजन शरीर की जरूरत के लिए होना चाहिए, न कि सिर्फ पेट भरने के लिए. जब हम भूख से ज्यादा खाते हैं, तो शरीर पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है. इसका असर आलस, सुस्ती, भोजन के बाद नींद आना, भारीपन, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं के रूप में दिखता है. आयुर्वेद के अनुसार पेट को पूरी तरह भर देना सेहत के लिए ठीक नहीं है, बल्कि संतुलित मात्रा में भोजन करना ही असली औषधि है. कम भोजन करने से सेहत अच्छी रहती है और बीमारियों से बचाव होता है.
आयुर्वेद में भोजन की सर्वोत्तम मात्रा का एक स्पष्ट नियम बताया गया है. इसके अनुसार पेट का आधा हिस्सा सॉलिड फूड्स से भरना चाहिए, चौथाई हिस्सा पेय पदार्थों के लिए रखना चाहिए और शेष चौथाई हिस्सा खाली छोड़ना चाहिए. यह खाली जगह पाचन अग्नि और वायु के सही संचालन के लिए जरूरी होती है. जब पेट में उचित जगह रहती है, तभी खाना सही तरीके से पच पाता है और शरीर को उसका पूरा लाभ मिलता है.
इस नियम के अनुसार आधे हिस्से में अनाज, दाल, सब्जियां और चावल जैसे ठोस आहार शामिल किए जा सकते हैं. चौथाई भाग में छाछ, मट्ठा या गुनगुना पानी लिया जा सकता है, जो पाचन में सहायक होता है. वहीं पेट का चौथाई हिस्सा खाली छोड़ना इसलिए जरूरी है ताकि अग्नि और वायु भोजन को अच्छी तरह पचा सकें. आयुर्वेद मानता है कि यही संतुलन भोजन को शरीर के लिए औषधि बनाता है.
आयुर्वेद यह भी बताता है कि भोजन के बाद शरीर की स्थिति खुद संकेत देती है कि आपने सही मात्रा में खाया है या नहीं. अगर खाना खाने के बाद आलस, नींद, भारीपन, गैस या कब्ज महसूस हो तो समझना चाहिए कि भोजन जरूरत से ज्यादा था. अगर भोजन के बाद शरीर हल्का महसूस करे, मन शांत रहे और लगभग चार घंटे बाद स्वाभाविक रूप से भूख लगे, तो इसे संतुलित और प्राकृतिक भोजन माना जाता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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