आज के समय में जब खाने के तेल की कीमतें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं, तब गनुगा तेल, जिसे पारंपरिक ठंडा निकाला गया तेल कहा जाता है, अक्सर रिफाइंड तेलों से महंगा बिकता है. यह फर्क सिर्फ दाम का नहीं, बल्कि उत्पादन के तरीके और गुणवत्ता का भी है. गनुगा तेल को “cold‑pressed” या “wood‑pressed” तरीके से बनाया जाता है, जिसमें तिलहन को बिना किसी रसायन के प्राकृतिक रूप से दबाया जाता है. इस प्रक्रिया से तेल के सभी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और इसका स्वाद भी शुद्ध और प्राकृतिक बना रहता है.
सबसे बड़ा कारण यह है कि गनुगा तेल बनाने की प्रक्रिया में रिफाइनिंग की तुलना में अधिक मेहनत और समय लगता है. रिफाइंड तेल बड़े कारखानों में मशीनों और केमिकल प्रोसेस के जरिए जल्दी तैयार हो जाता है, जबकि cold‑pressed तेल में बीजों को धीमी गति से दबाया जाता है. इस वजह से प्रत्येक बैच में निकलने वाला तेल कम होता है और प्रति लीटर उत्पादन लागत अधिक बढ़ जाती है. यही कारण है कि बाजार में इसका दाम रिफाइंड तेल से काफी अधिक होता है.
गनुगा तेल में इस्तेमाल होने वाले तिलहन भी उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं. तेल बनाने वाले उत्पादक ऐसे बीज चुनते हैं जिनमें पोषण, स्वाद और खुशबू सबसे अच्छा हो. उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की कीमत साधारण तिलहन की तुलना में अधिक होती है, जिससे तेल का अंतिम दाम भी बढ़ जाता है. इसके अलावा, यह तेल पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें कोई रसायन, सोल्वेंट या एडिटिव्स नहीं मिलाए जाते. रिफाइंड तेलों को लंबे समय तक स्टोर करने के लिए रंग, गंध या शेल्फ‑लाइफ बढ़ाने वाले रसायनों से प्रोसेस किया जाता है, जिससे पोषक तत्व कम हो जाते हैं, लेकिन उत्पादन लागत कम होती है. गनुगा तेल में यह सभी प्राकृतिक गुण बरकरार रहते हैं.
लोग अक्सर कीमत देखकर ही तेल चुनते हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि गनुगा तेल पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से रिफाइंड तेल से बेहतर है. ठंडे दबाव की प्रक्रिया में ओमेगा‑3, ओमेगा‑6 फैटी एसिड और विटामिन‑ई जैसे महत्वपूर्ण तत्व बरकरार रहते हैं, जो रिफाइंड तेलों में नहीं मिलते. यही वजह है कि स्वास्थ्य‑सचेत लोग इसे प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि लंबे समय में यह सस्ता और फायदेमंद विकल्प साबित हो सकता है.
इसके अलावा, गनुगा तेल का उत्पादन अक्सर छोटे स्तर पर या पारंपरिक मिलों में होता है, जो बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाले रिफाइनिंग कारखानों की तुलना में महंगा पड़ता है. छोटे बैच में उत्पादन होने के कारण मशीनरी, श्रम और पैकेजिंग पर खर्च अधिक आता है, जिससे अंतिम कीमत बढ़ जाती है. बाजार में रिफाइंड तेल सस्ते दाम में आसानी से उपलब्ध होता है, क्योंकि बड़े पैमाने पर उत्पादन और रसायनों के इस्तेमाल से लागत कम हो जाती है. वहीं गनुगा तेल की कीमत उसके गुणवत्ता‑आधारित मूल्य पर निर्भर करती है और स्वास्थ्य‑प्रेमियों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-why-is-ganuga-oil-costlier-than-refined-experts-explain-the-reason-ws-ekl-10113856.html

















