अलीगढ़: सर्दियों का मौसम जहां ठंडक और ताजगी लेकर आता है, वहीं कई लोगों के लिए यह स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण भी बन जाता है. कम तापमान के प्रभाव से लंबे समय तक बैठे रहने के बाद हाथ-पैरों में सुनपन, झनझनाहट और शरीर में अकड़न महसूस होना बहुत आम समस्या है. खासकर बुजुर्गों, डायबिटिक मरीजों और विटामिन की कमी वाले लोगों में ये लक्षण अधिक गंभीर रूप ले सकते हैं. ऐसे समय में इन समस्याओं के कारणों को समझना और सही बचाव अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है. आइए जानते हैं कि एएमयू के डॉ. फजल उर रहमान से इसके कारण और बचाव क्या हैं.
इन लोगों में अधिक समस्या
जानकारी देते हुए एएमयू के मेडिकल कॉलेज के डॉ. फजल उर रहमान बताते हैं कि सर्दियों में लंबे समय तक बैठे रहने के बाद हाथ-पैरों में सुनपन, झनझनाहट और शरीर में अकड़न महसूस होना एक आम समस्या है. सुनपन का संबंध मुख्य रूप से खून की नसों से होता है. ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिसे मेडिकल साइंस में वसूकंस्ट्रक्शन कहा जाता है.
जब नसें सिकुड़ती हैं तो शरीर अपना तापमान बचाने की कोशिश करता है और इसकी वजह से शरीर के अंगों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है. रक्त प्रवाह कम होने पर हाथ-पैरों में सुन्नता, झुनझुनी और जकड़न महसूस होने लगती है. जिन लोगों में रेनॉड रोग होता है, उनमें यह समस्या सर्दियों में और अधिक बढ़ जाती है. ऐसे लोगों की उंगलियां और पैर की उंगलियां बहुत ठंडी, नीली और दर्दनाक हो जाती हैं.
बढ़ जाता है प्राकृतिक तेलों का स्तर
डॉ. फजल बताते हैं कि सर्दियों में त्वचा भी अधिक सूखी हो जाती है, क्योंकि पसीने का स्राव कम हो जाता है और स्किन के प्राकृतिक तेलों का स्तर घट जाता है. गर्मियों में त्वचा नर्म और चिकनी रहती है, लेकिन सर्दियों में पसीना कम आने और तेलीय स्राव कम होने के कारण त्वचा में रूखापन बढ़ जाता है. जोड़ों में अकड़न का मुख्य कारण मांसपेशियों का टाइट होना है.
ठंड में स्केलेटल मसल्स की इलास्टिसिटी कम हो जाती है, जिससे वे उतनी आसानी से खिंच नहीं पाती और उनमें झुनझुनी और टेंशन बढ़ जाती है. यह समस्या खासकर गर्दन, कंधों और कमर में अधिक देखी जाती है. डायबिटीज, विटामिन B12 की कमी, विटामिन D3 की कमी और नर्व कंप्रेशन वाले मरीजों में यह दिक्कत और ज्यादा पाई जाती है.
सर्दियों से बचाव का सबसे बेहतर उपाय
डॉ. फजल का कहना है कि बुजुर्गों में यह समस्या इसलिए अधिक होती है, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ पोषक तत्वों की कमी आम हो जाती है. सर्दियों से बचाव के लिए सबसे पहला उपाय शरीर को गर्म रखना है. लेयर पहनने की तकनीक सबसे असरदार होती है. एक मोटा कपड़ा पहनने के बजाय कई हल्के लेयर पहनना अधिक फायदेमंद है. थर्मल वियर, ग्लव्स, गर्म मोजे, जुराबें और स्वेटर का उपयोग करना चाहिए. आवश्यक होने पर वार्म बोतल और हिटींग पैड का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन डायबिटिक मरीजों को बहुत अधिक गर्म पैड से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जलने या घाव होने का खतरा होता है. घर को भी अधिक ठंडा न रहने दें. खिड़कियां बंद रखें और कमरों में हल्की गर्माहट बनाए रखें.
एक ही पोजिशन में बैठना खतरा
उन्होने कहा कि रक्त संचार बेहतर रखने के लिए हाथों की उंगलियों और पैरों की उंगलियों को नियमित रूप से हिलाते रहें. गर्दन और कंधों की हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग, योगा और थोड़ी वॉक रक्त प्रवाह को बेहतर बनाती है. एक ही पोजिशन में लंबे समय तक बैठे रहना नुकसानदायक है, इसलिए बीच-बीच में शरीर को मूव करना जरूरी है. त्वचा की सुरक्षा के लिए मॉइस्चराइजर का नियमित उपयोग करना आवश्यक है.
सख्त साबुन से बचें और माइल्ड सोप का उपयोग करें. बहुत गर्म पानी से लंबे समय तक नहाने से भी त्वचा और अधिक सूख जाती है, इसलिए लंबे हॉट शावर्स से बचना चाहिए. साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि सर्दियों में लोग पानी कम पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, ड्राइनेस और कई अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर
उन्होंने कहा कि स्मोकिंग और अत्यधिक कैफीन का सेवन रक्त प्रवाह और मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक असर डालता है, इसलिए इनसे बचना चाहिए. यदि इन सभी बातों का सही रूप से पालन किया जाए तो सर्दियों में होने वाली सुनपन, अकड़न और त्वचा की समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है. इन सावधानियों के साथ स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है और सर्दियों से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Bharat.one किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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