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अभी तक घुटने में कुछ भी खराबी आने पर घुटने को ट्रांसप्लांट कर दिया जाता था, लेकिन पहली बार ABVIMS और डॉ. आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों ने भारत में पहली बार मेनिस्कस ऑटोग्राफ्ट सर्जरी की है. इस सर्जरी से डॉक्टरों ने न केवल घुटना बचाया है, बल्कि मरीज के शरीर से ही टिश्यू लगाकर मरीज के नी ट्रांसप्लांट को कई साल पीछे धकेल दिया है. आइए जानते हैं इसके बारे में..;
Knee Saving Surgery first time in India: दिल्ली के अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने कमाल कर दिया है. ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉक्टरों ने हाल ही में भारत की ऐसी पहली सर्जरी की है, जिसमें घुटने को निकाला नहीं गया है बल्कि घुटने को बचाया गया है. इस सर्जरी में 30 साल की एक मरीज के घुटने में खराब हो चुके मेनिस्कस को हटा कर उसके शरीर से ही टिश्यू लेकर लगा दिया गया है. ऐसा मरीज को आर्थराइटिस की समस्या से बचाने और उसे लंबे समय तक नी ट्रांसप्लांट से बचाने के लिए किया गया है.
इस बारे में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एचओडी, प्रोफेसर राहुल खरे ने News18hindi से बातचीत में बताया कि यह जॉइंट प्रिजर्वेशन सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. अस्पताल में आई एक 30 साल की महिला मरीज को एक साल पहले दाहिने घुटने में चोट लगी थी. इसके लिए मरीज ने मेडियल मेनिस्कस टियर के लिए किसी अन्य चिकित्सा केंद्र में सर्जरी कराई थी लेकिन सर्जरी के बाद मरीज को लगातार घुटने में दर्द बना रहा.
युवती का घुटना बचाने वाली आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों की टीम .
उन्होंने बताया, ‘जब मरीज आगे की जांच के लिए ABVIMS एवं डॉ. आरएमएल अस्पताल पहुंची तो सभी रिपोर्ट्स को बारीकी से देखने पर पता चला कि मेनिस्कस क्षतिग्रस्त होने के साथ ही घुटने के मेडियल कम्पार्टमेंट में ऑस्टियोआर्थराइटिस की शुरुआत और वेरस की समस्या पैदा हो रही थी जो मरीज की कम उम्र को देखते हुए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति थी. घुटने के लिए मेनिस्कस बहुत अहम होता है और कुशन का काम करता है. इसके खराब होने पर कार्टिलेज और हड्डी के बीच में जगह नहीं बचती और वे आपस में टकराने लगते हैं. लगातार रगड़ से न केवल घुटनों में दर्द और सूजन की समस्या होती है, बल्कि कुछ समय बाद नी ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत पड़ जाती है. हालांकि इतनी कम उम्र में मरीज को घुटना बदलने की सलाह नहीं दी जा सकती.’
डॉ. खरे ने आगे बताया कि आमतौर पर मेनिस्कस से संबंधित रोगों का उपचार मेनिस्कस रिपेयर या मेनिसेक्टॉमी द्वारा किया जाता है. चूंकि इस केस में मेनिस्कस पूरी तरह खराब हो रहा था तो इस मामले में मेनिसेक्टॉमी ही एकमात्र विकल्प बचा था लेकिन इससे कुछ ही साल में मरीज को घुटना रिप्लेस कराने की जरूरत होती साथ ही उसमें ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण भी तेजी से उभरने लगे थे.’
इसी को देखते हुए आरएमएल अस्पताल के निदेशक डॉ. अशोक कुमार और एमएस डॉ. विवेक दीवान के निर्देशन में ऑर्थोपेडिक्स यूनिट–1 की टीम ने अभी तक विदेशों में की जा रही सर्जरी की इस नई तकनीक को अपनाने के बारे में विचार किया. जिसमें मरीज के ही शरीर से यानि उसकी थाई यानि जांघ से सेमिटेंडिनोसस ऑटोग्राफ्ट (टिश्यू) लिया और उसे घुटने में मेनिस्कस की जगह पर रख दिया. ताकि यह टिश्यू घुटने में मेनिस्कस वाला काम बखूवी भले न कर पाए और इसमें रक्त का संचार न हो लेकिन यह बीच में मौजूद रहकर घुटने में हड्डियों के आपस में टकराने की स्थिति को रोक दे.
डॉ. खरे कहते हैं कि विदेशों में लोग मेनिस्कस डोनेट करते हैं, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है. ऐसे में आरएमएल में मेनिस्कस को रिप्लेस करने के लिए थाई में से लिए गए टेंडेंट को लगाया गया. यह प्रक्रिया इसलिए भी बेहतर है क्योंकि इसके लिए न तो किसी अन्य व्यक्ति से टिश्यू डोनेशन की जरूरत पड़ी और न ही उस टिश्यू के मरीज के शरीर से मेल न खाने का डर है. चूंकि यह मरीज के ही शरीर का हिस्सा है तो इसके साइड इफैक्ट के भी कोई चांसेज नहीं हैं और इसे शरीर की अन्य कोशिकाएं आसानी से स्वीकार भी कर लेती हैं. साथ ही घुटना प्रत्यारोपण की स्थिति इस कम उम्र में न हो उसका भी इंतजाम हो गया.
उन्होंने बताया कि यह सर्जरी 13 जनवरी को की गई है और मरीज की हालत काफी ठीक है. इस सर्जरी के करने वाले डॉक्टरों में डॉ. प्रणय गुप्ता, डॉ. रवि रंजन और डॉ. मोहित राज का योगदान रहा. देखा जाए तो यह ऐतिहासिक उपलब्धि जॉइंट प्रिजर्वेशन और खेल चोट प्रबंधन के क्षेत्र में, विशेषकर पोस्ट-मेनिसेक्टॉमी ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित युवा मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता दिखाती है. आने वाले समय में उम्मीद की जा रही है कि इस तरह की सर्जरी भारत में होंगी और इनके दूरगामी परिणामों के बारे में भी पता चल सकेगा.
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अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.Bharat.one.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें
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