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moringa in pads| moring benefits| moringa for UTI infections| sahja ke fayde| sahjan benefits| मोरिंगा सैनिटरी पैड्स यूटीआई व संक्रमण से बचाव में लाभकारी


Moringa in Pads Benefits for UTI-Infections: अभी तक आपने मोरिंगा यानि सहजन के फायदों के बारे में सुना होगा और यह जाना होगा कि इसे अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए. मोरिंगा को खाने में लेने से इसके सैकड़ों फायदे हमारे शरीर को मिलते हैं, लेकिन अब मेडिकल एक्सपर्ट्स मोरिंगा को सेनिटरी पैड्स में इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं और इसे यूटीआई सहित कई गंभीर इन्फेक्शंस के रिस्क को कम करने वाला अचूक नुस्खा बता रहे हैं.

देश की प्रमुख स्त्री-रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मासिक धर्म के दौरान यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI), बैक्टीरियल वैजिनोसिस (BV) और यीस्ट इन्फेक्शन के रिस्क को कम करने के लिए मोरिंगा-आधारित सैनिटरी पैड्स के उपयोग का समर्थन किया है. इन हेल्थ विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक प्राकृतिक और त्वचा-अनुकूल विकल्प है, जो विश्वभर में महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संक्रमण संबंधी बोझ को कम करने में सहायक हो सकता है.

मोरिंगा (Moringa oleifera), जिसे सहजन भी कहा जाता है और पारंपरिक चिकित्सा में अक्सर ‘मिरेकल ट्री’ कहा जाता है, अपने व्यापक जैव-सक्रिय यौगिकों के लिए जाना जाता है. हाल के वर्षों में आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों ने इसके कई स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि की है, जिनमें एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण शामिल हैं, जो इंटिमेट हाइजीन और मेंस्ट्रुअल केयर के लिए बेहद प्रासंगिक हैं.

डॉ. रिचा सिंघल प्रसूति एवं स्त्री-रोग विशेषज्ञ, क्लाउडनाइन हॉस्पिटल, पटपड़गंज कहती हैं कि सैनिटरी पैड की टॉप-शीट हर महीने कई दिनों तक संवेदनशील इंटिमेट स्किन के संपर्क में रहती है. पैड की सामग्री में मोरिंगा को शामिल करने से त्वचा में जलन और हानिकारक सूक्ष्मजीवों की अत्यधिक वृद्धि को कम करने में मदद मिल सकती है, जो यूटीआई और बीवी का कारण बनते हैं. मोरिंगा में मौजूद जैव-सक्रिय यौगिक हानिकारक बैक्टीरिया के खिलाफ उल्लेखनीय एंटीबैक्टीरियल प्रभाव दिखाते हैं.

डॉ. रिचा की यह टिप्पणी हालिया शोधों से मेल खाती है, जिनमें पाया गया है कि मोरिंगा एक्सट्रैक्ट्स ई.कोलाई सहित अन्य रोगजनकों की वृद्धि को रोकते हैं. इन एंटीबैक्टीरियल गुणों का संबंध इसमें मौजूद फ्लेवोनॉयड्स और फिनॉलिक कंपाउंड्स से जोड़ा गया है.

रिसर्च में मोरिंगा में मिला गुणों का भंडार
2025 में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यू जर्नल Life में प्रकाशित एक अध्ययन में यह पाया गया कि मोरिंगा में आमतौर पर उपयोग की जाने वाली दवाओं की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हैं. शोध के अनुसार, मोरिंगा लीफ एक्सट्रैक्ट्स ने डायक्लोफेनाक की तुलना में लगभग 2.5 गुना अधिक सूजन-रोधी प्रभाव दिखाया, वह भी नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) से जुड़े सामान्य दुष्प्रभावों के बिना.

डॉ. सिंघल ने आगे कहा, ‘मासिक धर्म के दौरान लंबे समय तक घर्षण, नमी और पसीने से होने वाली सूजन असहजता को बढ़ा सकती है. मोरिंगा में मौजूद क्वेरसेटिन और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन-C और आवश्यक पोषक तत्व मिलकर लालिमा और सूजन को कम करने में मदद करते हैं.’

वहीं डॉ. अल्पना कंसल, अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कहती हैं कि जननांग क्षेत्र की त्वचा अत्यंत नाज़ुक होती है और पीरियड्स के दौरान जलन की संभावना अधिक रहती है.
मोरिंगा प्राकृतिक रूप से विटामिन-E और फैटी एसिड्स से भरपूर होता है, जो त्वचा की सुरक्षा परत को मजबूत करने और नमी बनाए रखने में मदद करता है. इससे लंबे समय तक पैड पहनने वाली महिलाओं जैसे स्कूल जाने वाली लड़कियां और कामकाजी महिलाओं में चफिंग का जोखिम कम होता है, साथ ही यह संतुलित वैजाइनल पीएच बनाए रखने में भी सहायक है, जो संक्रमण की रोकथाम के लिए बेहद जरूरी है.

कई अध्ययनों में मोरिंगा की व्यापक एंटी-माइक्रोबियल क्षमता को रेखांकित किया गया है. मेंस्ट्रुअल केयर से आगे शोध बताते हैं कि मोरिंगा लीफ एक्सट्रैक्ट्स ग्राम-पॉजिटिव और ग्राम-नेगेटिव दोनों प्रकार के बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी हैं, जिनमें यूटीआई से जुड़े स्ट्रेन्स भी शामिल हैं. फ्लेवोनॉयड-समृद्ध मोरिंगा एक्सट्रैक्ट्स को एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस से निपटने के संभावित वैकल्पिक उपाय के रूप में भी अध्ययन किया जा रहा है. हालांकि ध्यान देने वाली बात है कि मोरिंगा की पत्तियों का इस्तेमाल पैड्स बनाने में किया जाना है न कि इन्हें सीधे ही पैड्स में इस्तेमाल किया जाए.


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https://hindi.news18.com/news/nation/moringa-based-sanitary-pads-can-reduce-risk-of-uti-periods-infections-claims-health-experts-moring-benefits-sahjan-ke-fayde-ws-kl-10120011.html

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