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Myrobalan mother of ayurvedic medicine know uses and benefits

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Mother of Ayurvedic Medicine: आयुर्वेद भारतीय ज्ञान की सदियों पुरानी परंपरा है जिसमें प्रकृति की चीजों से ही शरीर को निरोग बनाया जाता है. आयुर्वेद में एक चीज की सबसे ज्यादा कद्र की जाती है. वह है हरड़. इसे हरितकी भी कहा जाता है. वैसे ये देखने में बेहद मामूली फल लगेगा लेकिन आयुर्वेद में इसे औषधियों की जननी कहा जाता है. इसलिए यह आयुर्वेदिक दवाओं की मां है. आइए इसके बेमिसाल फायदों के बारे में जानते हैं.

The myrobalan fruit, known in Ayurvedic medicine as Haritaki (Terminalia chebula), is highly revered and often called the "King of Medicines" or the "mother of all healing". It is prized for its ability to prevent and cure numerous diseases and is a key ingredient in the famous rejuvenating formulation, Triphala.

संस्कृत में हरीतकी कहलाने वाला कड़काया (माइरोबालन) आयुर्वेद में सबसे महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटियों में से एक माना जाता है. यह मुख्य रूप से भारत के पर्वतीय और वन क्षेत्रों में पाया जाता है. उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के जंगलों में हरड़ के पेड़ प्राकृतिक रूप से उगते हैं. स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और पहाड़ों की जैविक मिट्टी में उगने वाला हरड़ औषधीय गुणों से भरपूर होता है. इसी कारण आयुर्वेद में इसे आयुर्वेदिक औषधियों की जननी कहा जाता है.

आयुर्वेद में हरड़ या हरीतकी को औषधियों की माता कहा जाता है. चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में हरीतकी के गुणों का विस्तार से वर्णन मिलता है. आयुर्वेद के अनुसार हरड़ में वात, पित्त और कफ—इन तीनों दोषों को संतुलित करने की क्षमता होती है. विशेष रूप से यह वात दोष को शांत करने में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है.

आयुर्वेद में हरड़ या हरीतकी को औषधियों की माता कहा जाता है. चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में हरीतकी के गुणों का विस्तार से वर्णन मिलता है. आयुर्वेद के अनुसार हरड़ में वात, पित्त और कफ—इन तीनों दोषों को संतुलित करने की क्षमता होती है. विशेष रूप से यह वात दोष को शांत करने में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है.

हरीतकी का स्वाद कसैला, कड़वा, हल्का मीठा और थोड़ा तीखा होता है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो कई बीमारियों के उपचार में लाभकारी होते हैं.

हरीतकी का स्वाद कसैला, कड़वा, हल्का मीठा और थोड़ा तीखा होता है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो कई बीमारियों के उपचार में लाभकारी होते हैं.

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हरड़ के सबसे महत्वपूर्ण लाभ पाचन से जुड़े हैं. यह कब्ज, गैस, अपच और एसिडिटी में बेहद उपयोगी है तथा मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाती है. हरड़ शरीर की अतिरिक्त चर्बी को धीरे-धीरे कम करने में भी मदद करती है. इसके अलावा, हरड़ रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और बदलते मौसम में सर्दी, खांसी व संक्रमण से बचाव में सहायक होती है. यह खून को शुद्ध करती है, त्वचा को साफ और चमकदार बनाती है तथा मुंहासे, दाग-धब्बे और एलर्जी जैसी समस्याओं में राहत देती है.

हरड़ के सबसे महत्वपूर्ण लाभ पाचन से जुड़े हैं. यह कब्ज, गैस, अपच और एसिडिटी में बेहद उपयोगी है तथा मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाती है. हरड़ शरीर की अतिरिक्त चर्बी को धीरे-धीरे कम करने में भी मदद करती है. इसके अलावा, हरड़ रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और बदलते मौसम में सर्दी, खांसी व संक्रमण से बचाव में सहायक होती है. यह खून को शुद्ध करती है, त्वचा को साफ और चमकदार बनाती है तथा मुंहासे, दाग-धब्बे और एलर्जी जैसी समस्याओं में राहत देती है.

हालांकि हरड़ एक प्राकृतिक औषधि है, फिर भी इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अधिक सेवन से कमजोरी या पेट में जलन हो सकती है. गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग इसे लेने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह अवश्य लें.

हालांकि हरड़ एक प्राकृतिक औषधि है, फिर भी इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अधिक सेवन से कमजोरी या पेट में जलन हो सकती है. गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग इसे लेने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह अवश्य लें.

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