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Malaria Drug Resistance Spreads: डब्ल्यूएचओ की वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में दुनियाभर में करीब 28 करोड़ लोग मलेरिया से संक्रमित हुए थे. इनमें से 6.10 लाख लोगों की इस इंफेक्शन से मौत हो गई. WHO की रिपोर्ट में बताया गया कि लाखों की संख्या में मौत की बड़ी वजह ड्रग रेजिस्टेंस है. इसके अलावा पीएफएचआरपी2 जीन डिलीशन, कीटनाशकों की प्रभावशीलता में कमी और एनोफेलीज स्टेफेंसी मच्छरों का फैलाव मलेरिया कंट्रोल में बनी चुनौती हैं.
Malaria Deaths Rises Worldwide: मच्छरों से फैलने वाला मलेरिया दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की जान ले रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरुवार को वर्ल्ड मलेरिया रिपोर्ट 2024 जारी की है. इसमें बताया गया है कि पिछले साल वैश्विक स्तर पर मलेरिया से करीब 28.20 करोड़ लोग संक्रमित हुए और 6.10 लाख लोगों की जान चली गई. इसमें ड्रग रेजिस्टेंस को एक बड़ा खतरा बताया गया है. भारत में भी हर साल बड़ी संख्या में लोग मलेरिया की चपेट में आ जाते हैं और इनमें से कई लोगों की मौत हो जाती है. हालांकि राहत की बात यह है कि WHO की बताई गई वैक्सीन से 2024 में लगभग 17 करोड़ लोग मलेरिया से बचने में कामयाब हुए और 10 लाख लोगों की जान बची. इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं.
मलेरिया से इन देशों में सबसे ज्यादा मौतें
WHO का अनुमान है कि साल 2024 में मलेरिया से जिन 6.10 लाख लोगों की मौत हुई, उसमें से करीब 95 फीसदी मौतें अफ्रीकी देशों में हुईं. मरने वालों में ज्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चे शामिल थे. जबकि साउथ ईस्ट एशियाई देशों में मलेरिया के जितने भी मरीज मिले, उनमें से 73.3 प्रतिशत भारत में थे. डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट से पता चला कि मलेरिया से होने वाली मौतों को कम करने में कुछ खास सफलता नहीं मिली है. अफ्रीका के करीब 8 देशों में एंटी-मलेरियल ड्रग रेजिस्टेंस की पुष्टि हो चुकी है या शक है. इसके अलावा आर्टेमिसिनिन के साथ मिलाकर दी जाने वाली दवाओं के असर में कमी के भी संभावित संकेत मिले हैं.
मलेरिया कंट्रोल करने में ये भी बड़ी चुनौतियां
नई रिपोर्ट के अनुसार मलेरिया खत्म करने की कोशिशों में सबसे बड़ी चुनौती ड्रग रेजिस्टेंस की है. इसके बाद दूसरा बड़ा चैलेंज पीएफएचआरपी2 जीन डिलीशन के साथ मलेरिया पैरासाइट की मौजूदगी है, जिससे क्लीनिकल ट्रायल्स की विश्वसनीयता कम हो रही है. जबकि 48 देशों में पाइरेथ्रॉइड रेजिस्टेंस की वजह से कीटनाशक मच्छरदानियों का असर कम हो रहा है. इतना ही नहीं, एनोफेलीज स्टेफेंसी मच्छर आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले कई कीटनाशकों से रेजिस्टेंट हैं. ये मच्छर अब 9 अफ्रीकी देशों में घुस आए हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में मलेरिया कंट्रोल की कोशिशों को बहुत बड़ा झटका लगा है.
अब तक 47 देश मलेरिया फ्री घोषित
दुनियाभर में मलेरिया को खत्म करने के प्रयास भी काफी हद तक सफल रहे हैं. अब तक कुल 47 देशों और एक इलाके को डब्ल्यूएचओ ने मलेरिया मुक्त घोषित किया है. काबो वर्डे और मिस्र को 2024 में आधिकारिक तौर पर मलेरिया-फ्री सर्टिफाइड किया गया था. वहीं इस सूची में जॉर्जिया, सूरीनाम और तिमोर-लेस्ते 2025 में शामिल हो गए. रिपोर्ट में बताया गया है कि डब्ल्यूएचओ ने 2021 में दुनिया की पहली मलेरिया वैक्सीन को मंजूरी दी थी और 24 देशों ने इन वैक्सीन को अपने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया है.
नई रिपोर्ट पर क्या बोले WHO चीफ
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा कि मलेरिया की रोकथाम के नए तरीके हमें नई उम्मीद दे रहे हैं, लेकिन हम अभी भी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. मलेरिया के मामलों और मौतों की बढ़ती संख्या, दवा के असर का बढ़ता खतरा और फंडिंग में कटौती का असर मलेरिया कंट्रोल को प्रभावित कर रहा है. खराब मौसम की घटनाएं, तापमान और बारिश में बदलाव भी मलेरिया के बढ़ते मामलों में योगदान दे रहे हैं. हालांकि कोई भी चुनौती ऐसी नहीं है, जिसे पार नहीं किया जा सकता. मलेरिया से जूझ रहे देशों के नेतृत्व और टारगेटेड इंवेस्टमेंट की मदद से मलेरिया-मुक्त दुनिया का सपना हासिल किया जा सकता है.
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अमित उपाध्याय Bharat.one Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-over-610000-malaria-deaths-in-2024-drug-resistance-major-threat-who-report-reveals-shocking-facts-ws-n-9929230.html







