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world cancer day, cancer cases in India| Cancer Screening in india| cancer patients increasing in india| cancer prevention tips| भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़े, 2045 तक हर घर में मरीज का खतरा.

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Cancer Cases Increasing in India: भारत में कैंसर के मामलों का तेजी से बढ़ना चिंता पैदा कर रहा है. इंडियन कैंसर सोसायटी के अनुमान पर गौर करें तो अगले 20 साल में भारत में नए कैंसर मामलों की संख्या 15 लाख से बढ़कर 24.5 लाख सालाना हो सकती है. लगभग दोगुनी स्पीड से बढ़ने वाले इन मामलों के चलते सबसे इन बड़े सवालों के जवाब जानना जरूरी है कि क्या 2045 तक हर घर में कैंसर मरीज होगा? आखिर कैंसर के मरीजों की संख्या इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है? कौन से कैंसर हैं जो लोगों को अपना शिकार जल्दी बना रहे हैं?

आईसीएस की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब केंद्रीय बजट 2026–27 में कैंसर उपचार की पहुंच बढ़ाने के लिए कई अहम कदमों की घोषणा की गई है, जिनमें चुनिंदा कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट और घरेलू बायोफार्मा उत्पादन को बढ़ावा देना तक शामिल है. हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल उपचार पर ध्यान देना भारत में तेजी से बढ़ते कैंसर बोझ से निपटने के लिए काफी नहीं है, बल्कि इससे बचाव के लिए कुछ और उपायों की जरूरत है.

इंड‍ियन कैंसर सोसायटी ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में दी भारत में कैंसर के मामले बढ़ने की जानकारी.

इस बारे में इंडियन कैंसर सोसायटी की अध्यक्ष ज्योत्सना गोविल ने कहा कैंसर के मामले जिस स्पीड से बढ़ रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब हर घर में कैंसर का मरीज मौजूद होगा.बजट में कैंसर के किफायती इलाज पर ध्यान जरूर दिया है लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि मरीज उस स्थिति तक ही न पहुंचें जहां ऐसा महंगा इलाज ही उनका आखिरी सहारा बन पाए. कैंसर के मामलों में मिथकों को तोड़ना, समय पर जांच को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक जानकारी को लोगों तक पहुंचाना बहुत जरूरी है. कैंसर की सही समय पर स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक सुविधाएं वंचित आबादी तक पहुंचना जरूरी है.

भारत में क्यों बढ़ रहे मामले, कौन सा कैंसर बन रहा बड़ा खतरा?
फोर्टिस मेमोरियल हॉस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी में सीनियर डायरेक्टर डॉ. नितेश रोहतगी कहते हैं कि एक समय तक भारत में 70 से ऊपर वालों में कैंसर देखने को मिलता था लेकिन अब ज्यादातर कैंसर मरीज 50 से कम उम्र के हैं, यह बेहद चिंताजनक है. भारत में कैंसर मामलों की बात करें तो महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर तेजी से फैल रहे हैं. पुरुषों में लंग और ओरल कैंसर तो मौजूद हैं ही लेकिन प्रोस्टेट कैंसर, किडनी और कोलन कैंसर के मरीज बीते दिनों में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं.

मैंने धूम्रपान नहीं किया लेकिन…
खुद एक कैंसर सर्वाइवर और नीति आयोग की पूर्व निदेशक डॉ. उर्वशी प्रसाद कहती हैं, मैंने कभी स्मोकिंग या तंबाकू का सेवन नहीं किया, लेकिन 35 साल की उम्र में मुझे लंग कैंसर हुआ. शायद इसका एक रिस्क फैक्टर प्रदूषण भी रहा हो लेकिन यह बेहद चुनौतीपूर्ण है कि कोई गलती न करने के बावजूद कैंसर हो रहा है. यहां तक कि मैंने 3 महीने के बच्चे में भी लिवर कैंसर देखा.

उर्वशी ने कहा कि कैंसर किसी भी उम्र में हो रहा है, इसलिए इस भुलावे में न रहें कि इसकी कोई उम्र सीमा है.

कैसे करें बचाव, मैंने पहली स्टेज में किया खुद डायग्नोस
आईसीएस दिल्ली की सचिव और खुद 30 साल पहले ब्रेस्ट कैंसर की गिरफ्त में आकर उबर चुकीं रेणुका प्रसाद ने आम महिलाओं को बहुत ही बड़ी सीख देते हुए कहा कि इलाज नहीं बचाव करें. कैंसर को खुद से डायग्नोस करें, सेल्फ एग्जामिन करें. अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने एक दिन अचानक ही अपने ब्रेस्ट में हुई गांठ का पता लगा लिया था, वह ब्रेस्ट कैंसर की पहली स्टेज थी. इसके बाद इलाज हुआ. इसी तरह हर महिला अपनी जांच खुद कर सकती है.

ऐसे करें रोकथाम
पब्लिक हेल्थ कंसल्टेंट और पूर्व डब्ल्यूएचओ अधिकारी डॉ. मोनिका पुरी ने कहा कि इलाज से जरूरी रोकथाम है. इसके लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (universal health coverage) की अवधारणा के तहत कैंसर रोकथाम जरूरी है. उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणालियों (into primary health systems) में रोकथाम, स्क्रीनिंग और निरंतर देखभाल को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया. साथ ही कहा कि वंचित आबादी तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है.


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-why-cancer-cases-increasing-in-india-and-at-what-ages-are-cancer-patients-rising-indian-cancer-society-expert-give-prevention-tips-ws-kln-10137915.html

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