Indigo News: इंडिगो की अंदरूनी गड़बडि़यों की वजह से दिसंबर का पहला सप्ताह पैसेंजर्स के लिए काफी मुश्किल भरा रहा. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन में कैंसलेशन और डिले का ऐसा दौर चला कि लगभग सभी फ्लाइट आसमान की जगह जमीन पर जमी नजर आई. डीजीसीए के आंकड़ों की मानें तो सिर्फ 3 दिसंबर से 5 दिसंबर के बीच 2500 से भी ज्यादा फ्लाइट कैंसल हो गईं और 1852 फ्लाइट्स डिले हो गईं. नतीजतन, तीन लाख से अधिक पैसेंजर्स को इस कदर परेशान होना पड़ा कि उनकी परेशानियों को शब्दों में बयां करना संभव नहीं है. बाद में, डीजीसीए की जांच में सामने आया कि यह स्थिति किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई स्तरों पर हुई चूक का नतीजा थी.
3 दिसंबर से लेकर आज तक क्या-क्या हुआ?
- जांच में पता चला कि इंडिगो में फ्लाइट क्रू की सही योजना नहीं बनाई गई थी. पायलट और केबिन क्रू की उपलब्धता का आंकलन ठीक से नहीं हुआ.
- इसके अलावा, ऑपरेटर स्तर पर नियमों को लागू करने की तैयारी भी कमजोर पाई गई. सॉफ्टवेयर सिस्टम, मैनेजमेंट स्ट्रक्चर और ऑपरेशनल कंट्रोल में भी कमियां सामने आईं.
- एयरलाइन के प्लानिंग प्रॉसेस में यह कमी रही कि संभावित रिस्क को समय रहते पहचाना नहीं गया. इंडिगो का ज्यादा फोकस अपने एयरक्राफ्ट, क्रू और नेटवर्क का अधिकतम इस्तेमाल करने पर था.
- इसका नतीजा यह हुआ कि रोस्टर में अतिरिक्त बफर लगभग खत्म हो गया. पायलटों की ड्यूटी को तय सीमा तक खींच दिया गया, डेड-हेडिंग, टेल स्वैप और लंबी ड्यूटी का ज्यादा सहारा लिया गया.
- इस पूरे हालात को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय दखल दिया. स्थिति को सामान्य करने के लिए कुछ अस्थायी ऑपरेशनल छूट दी गईं, ताकि सिस्टम को संभाला जा सके. हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया.
- 6 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 तक डीजीसीए ने इंडिगो के ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (OCC) और प्रमुख हवाई अड्डों पर अपने फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर और पैसेंजर फैसिलिटेशन स्टाफ तैनात किए. ये टीमें रोजाना के ऑपरेशन पर नजर रखती रहीं, यात्रियों की हैंडलिंग देखती रहीं और नियमों के पालन को सुनिश्चित करती रहीं.
- डीजीसीए ने इंडिगो से रोजाना रिपोर्ट भी मांगी, जिसमें उड़ानों की देरी और रद्दीकरण, क्रू की उपलब्धता, स्टैंडबाय का इस्तेमाल और सिस्टम परफॉर्मेंस जैसे अहम बिंदु शामिल थे.
- इसके अलावा, एयरलाइन को साप्ताहिक और पखवाड़े की रिपोर्ट भी देनी पड़ी. इनमें पायलट ट्रेनिंग प्लान, स्टाफ की कमी, नए पायलटों की भर्ती और बेड़े की उपलब्धता जैसी जानकारियां शामिल थीं.
- अब तक इंडिगो चार साप्ताहिक और तीन पखवाड़े की रिपोर्ट डीजीसीए को सौंप चुकी है. डीजीसीए के साथ नियमित समीक्षा बैठकों में भी एयरलाइन ने हिस्सा लिया.
- 19 जनवरी 2026 को हुई ताजा बैठक में इंडिगो ने बताया कि पायलटों की संख्या अब जरूरत के मुताबिक है. 10 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, एयरबस विमानों के लिए जरूरी पायलटों से ज्यादा पायलट उपलब्ध बताए गए हैं.
अब आपके दिमाग में चल रहे सवाल और उनके जवाब
दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानें अचानक क्यों बिगड़ गईं?
डीजीसीए की जांच में सामने आया कि इसकी मुख्य वजह खराब ऑपरेशनल प्लानिंग थी. एयरलाइन ने फ्लाइट क्रू, विमान और नेटवर्क संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दिया, लेकिन बैकअप यानी ऑपरेशनल बफर को नजरअंदाज कर दिया. जैसे ही किसी एक हिस्से में गड़बड़ी आई, पूरा सिस्टम चरमरा गया. यह संकट अचानक नहीं था, बल्कि लंबे समय से जमा हो रही कमजोरियों का नतीजा था.
डीजीसीए की रिपोर्ट में इंडिगो की सबसे बड़ी चूक क्या मानी गई?
डीजीसीए के मुताबिक इंडिगो की सबसे बड़ी चूक फ्लाइट क्रू मैनेजमेंट रही. पायलटों और क्रू के रोस्टर इस तरह बनाए गए थे कि वे ड्यूटी की अधिकतम सीमा तक काम करें. इसका मतलब यह था कि किसी भी देरी या बदलाव की स्थिति में संभलने की गुंजाइश बेहद कम थी. एयरलाइन ने डेड-हेडिंग, टेल स्वैप और लंबी ड्यूटी जैसे उपायों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया. इससे न केवल रोस्टर की मजबूती कमजोर हुई, बल्कि नए एफडीटीएल नियमों का सही तरीके से पालन भी प्रभावित हुआ.
फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) क्या है और इसमें समस्या कैसे आई?
फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी एफडीटीएल ऐसे नियम हैं जो यह तय करते हैं कि पायलट और क्रू कितने घंटे काम कर सकते हैं, ताकि थकान की वजह से सुरक्षा पर असर न पड़े. दिसंबर 2025 में इंडिगो के रोस्टर इतने टाइट थे कि एफडीटीएल नियमों को जमीन पर लागू करना मुश्किल हो गया. जब उड़ानें लेट हुईं या रद्द हुईं, तो क्रू के पास रिकवरी टाइम नहीं बचा. डीजीसीए ने माना कि कागजों में नियम पूरे दिख रहे थे, लेकिन व्यवहार में उनका असर कमजोर हो चुका था.
क्या सिर्फ क्रू की कमी से यह संकट पैदा हुआ?
नहीं, डीजीसीए की रिपोर्ट साफ कहती है कि यह संकट सिर्फ क्रू की कमी तक सीमित नहीं था. सॉफ्टवेयर सपोर्ट, ऑपरेशनल कंट्रोल और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर में भी कमियां थीं. इंडिगो की योजना प्रक्रिया समय रहते यह नहीं पहचान पाई कि सिस्टम पर जरूरत से ज्यादा दबाव बन रहा है. जब एक साथ कई उड़ानों में दिक्कत आई, तो सिस्टम उसे संभाल नहीं पाया. यानी यह एक मल्टी-लेयर फेल्योर था, जिसमें मैनेजमेंट की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई.
एयरलाइंस में पायलट की मौजूदा स्थिति क्या है?
19 जनवरी 2026 की समीक्षा बैठक में इंडिगो ने डीजीसीए को बताया कि 10 फरवरी 2026 तक उसकी जरूरत के मुकाबले पायलटों की संख्या पर्याप्त है. इंडिगो ने डीजीसीए को बताया है कि एयरबस कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर, दोनों कैटेगरी में जरूरत से ज्यादा पायलट उपलब्ध है. फिलहाल, उनके पास 2400 पायलट इन कमांड मौजूद है, जबकि जरूरत सिर्फ 2280 की है. इसी तरह, फर्स्ट ऑफिसर की जरूरत 2050 की है और उपलब्धता 2240 की है.
तो क्या 10 फरवरी के बाद फिर दिसंबर जैसे बन सकते हैं हालात?
इंडिगो ने डीजीसीए को भरोसा दिया है कि 10 फरवरी 2026 के बाद मौजूदा नेटवर्क पर कोई उड़ान रद्द नहीं होगी. साथ ही दिसंबर में दी गई एफडीटीएल से जुड़ी अस्थायी छूट भी हटा ली गई है. हालांकि डीजीसीए ने साफ किया है कि भरोसे के साथ-साथ सख्त निगरानी भी जारी रहेगी. साथ ही, डीजीसीए ने इंडिगो को दोटूक यह बात समझा दी है कि किसी भी सूरत में उनकी वजह से किसी पैसेंजर को परेशान ना होने पाए.
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https://hindi.news18.com/news/nation/indigo-informed-dgca-review-meeting-sufficient-number-of-airbus-pilots-by-february-10-2026-10089632.html

















