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छोटा सा देश थाईलैंड में आते हैं 3.5 करोड़ विदेशी पर्यटक, हमारे यहां सिर्फ 1 करोड़, आखिर क्यों, 10 कारण जिम्मेदार


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Why India not tourism superpower: थाईलैंड क्षेत्रफल में हमसे 7 गुना छोटा है और आबादी में 20 गुना ज्यादा बड़ा. लेकिन हमारे देश में हर साल महज 1 करोड़ विदेशी पर्यटक आते हैं जबकि छोटा सा थाईलैंड हर साल साढ़े 3 करोड़ से ज्यादा विदेशी पर्यटक आकर्षित करते हैं. आखिर क्या वजह हैं कि हम विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में इतने पीछे हैं. जाने-माने उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इसके लिए 10 कारण गिनाए हैं. हालांकि कारण इससे कहीं ज्यादा है.

छोटा सा देश थाईलैंड में आते हैं 3.5 करोड़ विदेशी पर्यटक, हमारे यहां क्यों नहींZoom

विदेशी टूरिस्ट को आकर्षित करने में हम थाईलैंड से बहुत पीछे.

Why Low International tourists in India: भारत के पास किसी भी संपन्न देशों की तुलना में वो सारे टूरिस्ट स्पॉट हैं जो उनके देश में हैं. कुछ मामलों में हम इन सबसे कहीं आगे हैं. हमारी सभ्यता सबसे प्राचीन सभ्यता है. हमारे पास कुदरत का मुकूट मणि हिमालय पर्वत और उनसे जुड़े हजारों वादियां, घाटियां हैं तो मीलों तक पसरा हर रंग का समुद्र तट. पर आपको जानकर हैरत होगी कि इतनी प्राकृतिक खूबसूरती के बावजूद विदेशी पर्यटकों को रिझाने में हमारा देश छोटे से थाईलैंड से भी बहुत पीछे हैं. आखिर इसके पीछे क्या वजह है. आइए इसका विश्लेषण करते हैं.

कोरोना से पहले का
इससे पहले कि इसका विश्लेषण करें कि क्यों हमारे देश में विदेशी पर्यटकों की आमद कम है, कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं. कोरोना काल ने पूरी दुनिया के पर्यटन उद्योग को तहस-नहस कर दिया था. अब इसे पांच साल होने को है पर इसकी काली छाया अब भी बरकरार है. कई देशों में कोरोना काल तक जितने पर्यटक आते थे, अब तक नहीं लौटे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024 में भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 9.95 लाख रही. यानी करीब-करीब एक करोड़. यह 2023 की तुलना में 4.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी जरूर दिखाती है लेकिन 2019 यानी कोरोना महामारी से पहले के वर्ष की तुलना में अभी भी 8.95 प्रतिशत कम है. वहीं छोटे से देश थाईलैंड में साढ़े 3 करोड़ विदेशी पर्यटक आए. भूटान जैसे देशों में पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि देखी जा रही है. हकीकत यह है कि थाईलैंड में कुछ भी भारत से बेहतर नहीं है. इसके बावजूद वहां के लोगों की कई खूबियां विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींच लाती है.

भारत में कम पर्यटक के कारण
हमसे ज्यादा मलेशिया, तुर्की, सिंगापुर और यहां तक कि संयुक्त अरब अमीरात में ज्यादा टूरिस्ट आते हैं. उद्योगपति हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया पर इसके 10 कारणों को बताया है. आइए पहले ये जानते हैं.

  1. असुरक्षित सड़कें, आवारा जानवर- कई शहरों और पर्यटन स्थलों पर सड़कें टूटी-फूटी हैं और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित फुटपाथ नहीं हैं. रात में रोशनी की भी कमी रहती है. इसके अलावा आवारा पशु और जानवर यातायात और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं, जिससे असुविधा और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है.
  2. गंदगी, कचरा और स्वच्छता की कमी-सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और पर्यटन स्थलों पर कचरा प्रबंधन की कमी साफ दिखती है. खुले में कूड़ा, बदबू और अस्वच्छ शौचालय पर्यटकों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं. स्वच्छता की कमी से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ते हैं और देश की छवि प्रभावित होती है.
  3. छोटी-मोटी भ्रष्टाचार की समस्या-कुछ स्थानों पर पर्यटकों से अनावश्यक शुल्क, ओवरचार्जिंग या सुविधा के बदले रिश्वत मांगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. यह अनुभव पर्यटकों के भरोसे को कम करता है. पारदर्शी व्यवस्था और सख्त निगरानी की कमी से यह समस्या बनी रहती है.
  4. ट्रैफिक अव्यवस्था-भारत का ट्रैफिक दुनिया में बदनाम है. बड़े शहरों में भारी जाम, नियमों का पालन न करना और अनियोजित पार्किंग आम बात है. पर्यटकों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कत होती है. हॉर्न, भीड़ और अव्यवस्थित यातायात उनकी यात्रा के अनुभव को तनावपूर्ण बना देते हैं.
  5. कमजोर वैश्विक ब्रांडिंग और छवि प्रबंधन-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन की सही मार्केटिंग और सकारात्मक छवि निर्माण की कमी रहती है. डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया रणनीति और वैश्विक अभियानों में निरंतरता नहीं होती. इससे देश की वास्तविक क्षमता दुनिया तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पाती.
  6. राज्य स्तर की लालफीताशाही में फंसा पर्यटन-पर्यटन से जुड़ी कई मंजूरियां और प्रक्रियाएं जटिल और समय लेने वाली होती हैं. अलग-अलग राज्यों के नियम अलग होने से निवेश और प्रोजेक्ट धीमे हो जाते हैं. इस कारण नई सुविधाओं और परियोजनाओं का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो पाता.
  7. प्रदूषण-वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण कई शहरों में गंभीर समस्या है. ऐतिहासिक स्मारकों और प्राकृतिक स्थलों पर भी प्रदूषण का असर दिखता है. इससे पर्यटकों के स्वास्थ्य और अनुभव दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और देश की पर्यटन छवि को नुकसान होता है.
  8. पर्यटन ढांचे की कमी-कई पर्यटन स्थलों पर साफ शौचालय, साइन बोर्ड, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन और सूचना केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं. इस कारण वे दोबारा आने से हिचकते हैं.
  9. सेवाओं के स्तर में असमानता- होटल, टैक्सी, गाइड और रेस्टोरेंट सेवाओं की गुणवत्ता हर जगह समान नहीं होती. कहीं उत्कृष्ट सेवा मिलती है तो कहीं बेहद खराब अनुभव. मानकों की एकरूपता और प्रशिक्षण की कमी से पर्यटन उद्योग की विश्वसनीयता प्रभावित होती है.
  10. सबसे बड़ी समस्या – नागरिक शिष्टाचार की कमी-सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, लाइन न बनाना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आम समस्याएं हैं. नागरिक जिम्मेदारी की कमी से देश की छवि खराब होती है.

अनदेखा कारण
उपर के जितने कारण हैं वे सब दस्तावेजों में होते हैं लेकिन अनगिनत ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से हमारे देश में पर्यटक आने से कतराते हैं. हम वसुधैव कुटुबंकम का नारा देते हैं, मेहमान को भगवान मानते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि इन मेहमानों को हम लुटने का जरिया बना लेते हैं. अधिकांश जगहों पर विदेशी पर्यटकों से आम नागरिकों से ज्यादा पैसा ऐंठा जाता है, उन्हें गलत जानकारी दी जाती है, बेवजह उन्हें परेशान करते हैं, उनपर फब्तियां कसते हैं. हमारे पास अगर कोई अफ्रीकी पर्यटक आ जाए तो उनपर नस्लीय टिप्पणी करते हैं. आम लोगों से ज्यादा विदेशी पर्यटकों से किराया वसूलते हैं. जो भी सामान बेचते हैं वे यहां के लोगों से ज्यादा में बेचते हैं. किसी भी पर्यटन स्थल पर ठीक से भीड़ मैनेज नहीं होता है जिसके कारण इन जगहों पर शांति नहीं होती. विदेश में हमारे देश के अपराध और रेप की घटनाओं को प्रमुखता से तरजीह दी जाती है. कुल मिलाकर विदेशियों के प्रति हमारी मानसिकता अच्छी नहीं है. हम सिर्फ कहने के लिए अतिथि देवों भवः का नारा देते हैं, हकीकत में यह कोसो दूर है. इसलिए हमें विदेशियों को वास्तव में पूजा करने की जरूरत है न कि दुत्कारने की.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने अपने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, स…और पढ़ें


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