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मंदिर तो आज भी बन रहे हैं…लेकिन पानी होता जा रहा है दूर, किशोर सागर झील में मिलते हैं दोनों


आज की तारीख में एक तरफ तो लोग पानी बर्बाद कर रहे हैं और दूसरी तरफ पानी के लिए तरस भी रहे हैं. लेकिन लोगों में पानी को बचाने के लिए कोई बड़ा प्रयास नहीं दिखता है. इसी वजह से कई जगह वाटर लेवल बहुत नीचे चला गया है. देश के कई इलाकों में लोगों को पीने तक के लिए पानी नहीं मिल रहा है. जबकि पुराने समय में लोग पानी बचाने के लिए तालाब, बावड़ी और झील बनवाते थे और उस पानी को लोग गंदा न करें इसके लिए उसके आसपास मंदिर भी बनवा दिए जाते थे. ऐसा ही एक तालाब या झील राजस्थान के कोटा में है जिसे किशोर सागर झील कहते हैं.

किसने और कब बनवाया
कोटा महाराव दुर्जनशाल सिंह की महारानी और उदयपुर की राजकुमारी ब्रज कंवर जी ने यह तालाब 1743 से 1745 के बीच बनवाया था. तालाब के ही बीच में उन्होंने एक बेहतरीन जग मंदिर बनवाया था. जब झील में मंदिर को देखते हैं तो नजारा देखते ही बनता है. पूरा जग मंदिर पानी में ही बना है. झील में लोग नाव की सवारी का भी आनंद लेते हैं. यहीं छत्र विलास गार्डन भी बना है.

इस झील को शहर की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनवाया गया था. इसके पानी को सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था. काफी समय तक राज परिवार के लोग इस झील की साफ-सफाई भी कराते रहे. बाद में इसमें नाले का पानी डाला जाने लगा और यह खराब होती गई.

कुछ साल पहले एक बार फिर इस झील को जिंदा करने का प्रयास किया गया. इस झील में कम से कम 8 से 10 प्रजातियों की मछलियां हैं. कुछ बार इसमें मगरमच्छ भी देखे गए हैं. जब चंबल नदी से नहरों में पानी छोड़ा जाता है तो उसी दौरान पानी के साथ मगरमच्छ चंबल से निकल नहरों में होते हुए इस झील में पहुंच जाते हैं. इसके अलावा यहां कई सारे जलीय और विदेशी पक्षियों का भी बसेरा है.

इस झील से ही सटा हुआ सेवन वंडर पार्क बनाया गया. यहां बना सेवन वंडर पार्क भी लोगों को काफी पसंद आता है. इस पार्क में 7 अजूबे बनवाए गए हैं जिनमें एफिल टावर, पिरामिड, पीसा की झुकी हुई मीनार, कोलेजियम, स्टैचू ऑफ लिबर्टी, क्राइस्ट द रिडीमर और हूबहू दिखता हुआ ताजमहल बना है. इसके अलावा किशोर सागर तालाब की पाल पर सालिम सिंह की हवेली की हूबहू कॉपी यानी रेप्लिका हवेली बनवाई गई. यह इमारत 17 मीटर ऊंची है.

कैसे पहुंचें
कोटा के सबसे करीब जयपुर में सांगानर हवाई अड्डा है. कोटा से यह 244 किलोमीटर दूर है. इसके अलावा राजस्थान में सभी शहरों और कस्बा से कोटा के लिए बसें मिल जाती हैं. रेल से यात्रा करने के लिए कोटा एक प्रमुख जंक्शन है. अधिकतर ट्रेनें कोटा से गुजरती हैं.

हमारे गांव में-हमारे शहर में. सामाजिक कहानी, लोकल परंपराएं और मंदिरों की कहानी, किसानों की कहानी, अच्छा काम करने वालों कहानी, किसी को रोजगार देने वालों की कहानी. इन कहानियों को सामने लाना, यही है लोकल-18. इसलिए आप भी हमसे जुड़ें. हमें बताएं अपने आसपास की कहानी. हमें व्हाट्सएप करें हमारे नंबर- 08700866366 पर.


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https://hindi.news18.com/news/local-18-special/kishore-sagar-lake-and-jagmandir-palace-kota-rajasthan-8589500.html

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