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बागेश्वर: जिले का बिलौना गांव हिमालय के अद्भुत नजारों के लिए जाना जाता है. यहां से बर्फीली चोटियों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है. गांव में सनराइज और सनसेट का नजारा बेहद आकर्षक होता है, जो पर्यटकों के सफर को यादगार बना देता है. शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता सुकून का अहसास कराती है.

बागेश्वर: जिले का बिलौना गांव हिमालय के बेहतरीन नजारों के लिए जाना जाता है. यह गांव पहाड़ों की गोद में बसा हुआ है, जहां से बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है. गांव की खास बात यह है कि यहां प्रकृति आज भी अपने मूल रूप में मौजूद है. हरे-भरे खेत, देवदार और बांज के जंगल, और साफ नीला आसमान पर्यटकों को पहली ही नजर में आकर्षित कर लेते हैं. जो लोग शहरों की भीड़, शोर और भागदौड़ से दूर कुछ सुकून के पल बिताना चाहते हैं, उनके लिए बिलौना एक आदर्श स्थान है. यहां की ताजगी और शांत वातावरण मन को गहरी शांति देता है.

बिलौना गांव का सूर्योदय अपने आप में एक अनोखा अनुभव है. सुबह-सुबह जैसे ही सूरज हिमालय की चोटियों के पीछे से झांकता है, पूरा इलाका सुनहरी रोशनी से नहा जाता है. बर्फीली चोटियों पर पड़ती पहली किरणें उन्हें गुलाबी और सुनहरे रंग में रंग देती हैं. गांव के लोग रोज इस दृश्य के साक्षी होते हैं, लेकिन बाहर से आने वाले सैलानियों के लिए यह पल हमेशा के लिए यादगार बन जाता है. ठंडी हवा, पक्षियों की चहचहाहट और उगते सूरज का दृश्य मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं, जो जीवन भर याद रहता है.

सिर्फ सूर्योदय ही नहीं, बल्कि बिलौना का सूर्यास्त भी उतना ही खूबसूरत है. शाम होते-होते जब सूरज धीरे-धीरे पहाड़ों के पीछे छिपने लगता है, तो आसमान नारंगी, लाल और बैंगनी रंगों से भर जाता है. इस समय गांव में एक अलग ही शांति महसूस होती है. खेतों से लौटते ग्रामीण, धुएं से उठती रसोई की खुशबू और दूर तक फैला हिमालय सब मिलकर एक भावुक दृश्य रचते हैं. यह सनसेट न केवल आंखों को सुकून देता है, बल्कि मन को भी ठहराव का एहसास कराता है.
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बिलौना गांव आसपास के जंगलों और पहाड़ी रास्तों के कारण ट्रेकिंग और नेचर वॉक के शौकीनों के लिए भी खास है. यहां छोटे-छोटे पैदल रास्ते हैं, जिनसे गुजरते हुए पर्यटक प्रकृति को बेहद करीब से महसूस कर सकते हैं. रास्ते में जंगली फूल, पहाड़ी जड़ी-बूटियां और पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियां देखने को मिलती हैं. हल्की-फुल्की ट्रेकिंग के दौरान हिमालय का दृश्य हर कदम पर साथ चलता है. यह जगह उन लोगों के लिए आदर्श है, जो रोमांच के साथ-साथ शांति भी चाहते हैं.

स्थानीय निवासी रमेश पर्वतीय बताते हैं कि बिलौना गांव की पहचान सिर्फ इसके नजारे नहीं, बल्कि यहां के लोग और उनकी संस्कृति भी है. गांव के निवासी बेहद सरल, मिलनसार और मेहमाननवाज हैं. यहां आज भी पारंपरिक पहाड़ी जीवनशैली देखने को मिलती है. लकड़ी और पत्थर से बने घर, पारंपरिक खानपान और लोकगीत गांव की पहचान हैं. पर्यटक यदि चाहें तो ग्रामीणों के साथ बैठकर उनकी दिनचर्या को समझ सकते हैं. यह अनुभव शहरों में रहने वाले लोगों के लिए एक नया नजरिया देता है.

जो लोग फोटोग्राफी का शौक रखते हैं, उनके लिए बिलौना किसी जन्नत से कम नहीं है. यहां हर समय कुछ न कुछ ऐसा देखने को मिल जाता है, जिसे कैमरे में कैद किया जा सके. सुबह की रोशनी, शाम के रंग, बादलों से ढकी चोटियां और गांव की रोजमर्रा की जिंदगी हर दृश्य खास है. खासकर सनराइज और सनसेट के समय यहां की तस्वीरें बेहद आकर्षक आती हैं. यही वजह है कि कई ट्रैवल फोटोग्राफर इस गांव को अपनी सूची में शामिल करते हैं.

बिलौना गांव बागेश्वर जिला मुख्यालय से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है. सफर के दौरान भी रास्ते भर पहाड़ों और नदियों के खूबसूरत दृश्य देखने को मिलते हैं. हालांकि गांव तक पहुंचने के लिए कुछ दूरी पैदल भी तय करनी पड़ सकती है, लेकिन यही रास्ता यात्रा को रोमांचक बनाता है. कम भीड़-भाड़ और शांत रास्ते सफर को थकाऊ नहीं होने देते है. यहां पहुंचते ही सारी थकान अपने आप दूर हो जाती है.

अगर आप ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां प्रकृति, शांति और खूबसूरती तीनों का मेल हो, तो बिलौना गांव जरूर जाएं. यहां का वातावरण मन और शरीर दोनों को तरोताजा कर देता है. न कोई शोर, न ट्रैफिक, बस हिमालय, आसमान और शांति. सनराइज और सनसेट आपके ट्रिप को हमेशा के लिए यादगार बना देंगे. यही वजह है कि बिलौना धीरे-धीरे उन लोगों की पसंद बन रहा है, जो असली पहाड़ और असली सुकून महसूस करना चाहते हैं.
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