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Kanha Shanti Vanam: हैदराबाद स्थित कान्हा शांति वनम एक अनोखा उदाहरण है. जहां 1400 एकड़ बंजर जमीन को घने हरे क्षेत्र में बदल दिया गया. हार्टफुलनेस संस्था द्वारा संचालित यह प्रोजेक्ट पर्यावरण संवर्धन, जैव विविधता और सतत विकास का उत्कृष्ट मॉडल है. आज यह मेडिटेशन सेंटर, प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक ग्रीन हब बन चुका है.

देश में मिट्टी की सेहत खराब हो रही है और जलवायु संकट भी बढ़ रहा है। ऐसे में हैदराबाद के कान्हा शांति वनम ने एक उदाहरण पेश किया है. यहां वैज्ञानिक तरीके और सामुदायिक मेहनत से बंजर ज़मीन को फिर से हरा-भरा बनाया गया है. हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट ने यहां लगभग 1400 एकड़ बंजर ज़मीन को जीवित किया है. उन्होंने जो तरीका अपनाया, उसकी चर्चा विश्व मृदा दिवस पर ज़रूर की जानी चाहिए.

बायोचार मॉडल से 1.5 लाख से ज़्यादा पेड़ लगाए: इस काम की शुरुआत 2017 में हुई. यहां बायोचार नाम के तरीके से ज़मीन को ठीक किया गया. बायोचार बनाने के लिए खेत के बचे हुए पदार्थ जैसे पुआल, डंठल को एक बंद ड्रम या गड्ढे में बिना हवा के गर्म किया जाता है. इससे एक काला पदार्थ बनता है, जो कोयले जैसा दिखता है. इसे मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की सेहत सुधरती है.

भारत में हर साल लगभग 70 करोड़ टन खेत का कचरा निकलता है. इसका एक चौथाई हिस्सा लोग जला देते हैं जिससे प्रदूषण होता है. अगर इस कचरे को बायोचार बनाया जाए, तो यह मिट्टी के लिए बहुत फायदेमंद होता है. यह मिट्टी में नमी बनाए रखता है पानी की बचत करता है, मिट्टी में जीवन लौटाता है और पौधों को तेज़ी से बढ़ने में मदद करता है. इसे कार्बन को स्टोर करने का एक बेहतरीन तरीका भी माना जाता है.
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पानी बचाने पर भी ध्यान: इसके साथ ही कान्हा वनम में पानी बचाने पर भी खास ध्यान दिया गया, सड़कों के किनारे हर 50 फीट पर बारिश का पानी जमा करने की जगह. हर 100 फीट पर पानी सोखने के गड्ढे. ऐसे 800 से ज़्यादा गहरे गड्ढे, जिनमें मिट्टी, बजरी और बायोचार भरा है. 9 बड़ी आर्टिफिशल झीलें, जो 50 करोड़ लीटर तक पानी जमा कर सकती हैं. इन कोशिशों का नतीजा यह हुआ कि यहां भूमिगत पानी का स्तर 6 साल में 1000 फीट नीचे से बढ़कर 100 फीट तक आ गया है.

दस साल पहले यहां मुश्किल से कोई पक्षी या पेड़ दिखता था. आज यहां 120 से ज़्यादा किस्म के पक्षी, लाखों पेड़-पौधे और एक संतुलित मौसमी वातावरण बन गया है. यह सब बिना किसी रासायनिक खाद या दवाई के, सिर्फ मिट्टी और पानी को ठीक करने से हुआ है.

यह मॉडल पूरे भारत में फैल रहा है: अब हार्टफुलनेस यही तरीका देश के दूसरे हिस्सों में भी अपना रही है. मध्य प्रदेश और गुजरात में कई नई परियोजनाएं चल रही हैं. अरावली की 350 हेक्टेयर बंजर ज़मीन को सिर्फ 18 महीने में हरा-भरा बना दिया गया. मध्य प्रदेश के रतलाम के शिवगढ़ में 2000 एकड़ ज़मीन पर 5 साल की परियोजना चल रही है.

इससे साफ है कि कान्हा का यह मॉडल दूसरे सूखे इलाकों में भी काम कर सकता है. पर्यावरण की चिंताओं के बीच, इस तरह की तकनीक और मेहनत से प्रकृति को बचाना भारत और दुनिया के लिए एक अच्छी खबर है.
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https://hindi.news18.com/photogallery/andhra-pradesh/hyderabad-kanha-shanti-vanam-hyderabad-green-transformation-local18-9935087.html

















