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स्वालबार्ड दुनिया की सबसे रहस्यमयी जगहों में से एक है, जहां जिंदगी आम नियमों से बिल्कुल अलग चलती है. यहां न मरने की अनुमति है, न ही साल के कई महीनों तक सूरज दिखाई देता है, जबकि इंसानों से ज्यादा ध्रुवीय भालू इस इलाके में पाए जाते हैं. बर्फ से ढकी यह आर्कटिक धरती किसी कल्पना की दुनिया जैसी लगती है, लेकिन इसके बावजूद यहां हजारों लोग रहते हैं और कठिन हालातों के बीच अपनी जिंदगी जीते हैं.
World’s Last Village- दुनिया में कई ऐसे स्थान हैं, जो अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति और अजीब नियमों की वजह से लोगों को हैरान कर देते हैं, लेकिन नॉर्वे के पास स्थित स्वालबार्ड (Svalbard) इन सबसे कहीं आगे है. इसे दुनिया का आखिरी गांव भी कहा जाता है, जहां मरने की अनुमति नहीं है और साल के कई महीनों तक सूरज दिखाई ही नहीं देता. बर्फ से ढका यह आर्कटिक द्वीप समूह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की तरह लगता है, लेकिन यहां करीब 2500 से 3000 लोग सच में रहते और काम करते हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा वीजा-फ्री जोन है, जहां कोई भी व्यक्ति बिना वीजा के आकर रह और काम कर सकता है, बस शर्त इतनी है कि वह खुद अपना खर्च उठा सके.
स्वालबार्ड में मरना गैरकानूनी है, और इसके पीछे वजह भी बेहद अनोखी है. यहां की जमीन हमेशा जमी रहती है, जिसे परमाफ़्रॉस्ट कहा जाता है.ऐसे में दफन किए गए शव गलते नहीं हैं, जिससे पहले गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ चुकी हैं. इसी कारण यहां अंतिम संस्कार पर रोक लगा दी गई है. अगर कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए या बहुत अधिक उम्रदराज हो जाए, तो उसे अनिवार्य रूप से उसे नॉर्वे भेज दिया जाता है. यही वजह है कि इस जगह पर न तो रिटायरमेंट होम हैं और न ही बुजुर्गों के लिए कोई विशेष व्यवस्था. यह इलाका केवल युवा, कामकाजी और शारीरिक रूप से मजबूत लोगों के लिए ही माना जाता है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/travel-last-village-of-world-svalbard-governed-by-norway-visa-free-zone-dying-illegal-always-snow-and-night-ws-kl-10093149.html

















