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उत्तराखंड के कैंची धाम की यात्रा ने मनोज बाजपेयी के जीवन में गहरा बदलाव ला दिया. लंबे समय से चल रही बेचैनी और करियर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उन्हें वहां ऐसी आत्मिक शांति मिली, जिसने न सिर्फ उनके मन को स्थिर किया बल्कि उनकी नई फिल्म जुगनुमा – द फेबल की दिशा भी तय कर दी. नीम करौली बाबा की गुफा में ध्यान के दौरान मिली इस अनुभूति ने उन्हें जवाब दिया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए भीतर की उलझनों को छोड़ना जरूरी है.
उत्तराखंड के कैंची धाम में मनोज बाजपेयी के साथ जो हुआ, उसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी. ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘द फैमिली मैन’ जैसे शानदार कामों के लिए मशहूर मनोज बाजपेयी ने हाल ही में बताया कि एक समय ऐसा भी आया था जब वह एक्टिंग छोड़ने तक का मन बना चुके थे. लगातार बेचैनी, मन की उथल-पुथल और काम को लेकर गहरा असमंजस, इन सबने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि शायद फिल्मों में उनका सफर अब खत्म हो चुका है. लगभग एक साल तक वह किसी बड़े प्रोजेक्ट से दूर रहे और अपने भीतर चल रहे सवालों के जवाब तलाशते रहे.
इसी दौर में निर्देशक राम रेड्डी ने उन्हें उत्तराखंड के नीम करौली बाबा के कैंची धाम चलने की सलाह दी. मनोज बाजपेयी बताते हैं कि इस यात्रा ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया. वह दोनों पहाड़ों के बीच बसे इस पवित्र स्थान पर पहुंचे और फिर वहां से ऊपर स्थित बाबा की रहस्यमयी गुफा तक पहुंचने के लिए करीब एक घंटे का लंबा सफर किया. ऊंचाई पर चढ़ते हुए, शांत जंगलों के बीच, दोनों एक अनजानी आध्यात्मिक खिंचाव महसूस कर रहे थे. गुफा में उन्होंने कुछ देर ध्यान किया और उसी दौरान उन्हें एक ऐसी अनुभूति हुई जिसे वह आज भी शब्दों में बयां नहीं कर पाते.
गुफा से नीचे उतरने के बाद दोनों ने एक-दूसरे को देखा और एक ही बात कही- “हमें अपनी फिल्म मिल गई है.” मनोज बाजपेयी बताते हैं कि उस क्षण में उन्हें अपने सभी सवालों के उत्तर मिल गए थे. यह जवाब था- छोड़ देने का, बंधनों और अपेक्षाओं से मुक्त होने का, और मन की शांति को अपनाने का. वह कहते हैं कि वहीं बैठकर उन्हें गहरा अहसास हुआ कि आसक्ति छोड़कर ही इंसान अपनी असली उड़ान भर सकता है. यही विचार उनकी नई फिल्म जुगनुमा – द फेबल की आत्मा बन गया.
कैंची धाम कैसे पहुंचे?
अगर आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर एयरपोर्ट (Pantnagar Airport) है. एयरपोर्ट से कैंची धाम लगभग 70–75 किलोमीटर दूर है. आप टैक्सी या कैब से आसानी से आश्रम पहुंच सकते हैं. वहीं नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम (Kathgodam) है. काठगोदाम से कैंची धाम की दूरी लगभग 38–40 किलोमीटर है. स्टेशन से टैक्सी/शेयरिंग कैब आसानी से मिल जाती है. नैनीताल–अल्मोड़ा हाईवे पर ही कैंची धाम पड़ता है. दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ से सीधी वोल्वो/बसें नैनीताल या काठगोदाम तक मिलती हैं. वहां से टैक्सी लेकर 45–60 मिनट में कैंची धाम पहुंच सकते हैं.
कैंची धाम जाने से पहले क्या ध्यान रखें?
मंदिर में भीड़ रहती है, इसलिए सुबह 7–10 बजे पहुंचना बेहतर है. 15 जून को होने वाले वर्षिक स्थापना दिवस पर लाखों लोग आते हैं. इस दिन ट्रैफिक और पार्किंग बहुत मुश्किल होती है. मंदिर परिसर में सादगीपूर्ण कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है. आश्रम में शांति बनाए रखने की अपील की जाती है. खास दिनों में प्रसाद और भंडारा होता है, जिसे आपको मिस नहीं करना चाहिए.
कैंची धाम में क्या करें?
बाबा की समाधि और मंदिर में दर्शन करें.
नदी के किनारे बैठकर ध्यान (Meditation) कर सकते हैं.
मंदिर की ऊर्जा और शांत माहौल का अनुभव करें.
आश्रम की दुकान से प्रसाद, फोटो और किताबें ले सकते हैं.
नेचुरल ट्रेल्स और पहाड़ों का सुन्दर नज़ारा देख सकते हैं.
About the Author
विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें
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