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Mount Damavand Adventure Travel । एशिया का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी और ईरान की पहचान

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Adventure Travel: माउंट दमावंद ईरान में स्थित एशिया का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी है. यह पहाड इतिहास, लोककथाओं और नेचर का अनोखा मेल है. आज भी यह एक शांत लेकिन जिंदा ज्वालामुखी माना जाता है. माउंटेन क्लाइम्बर्स के लिए यह खूबसूरती और चुनौती दोनों है. Mount Damavand ट्रैवल और एडवेंचर लवर्स के लिए एक यादगार डेस्टिनेशन है.

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Adventure Travel: अगर पहाड बोल सकते तो शायद माउंट दमावंद सबसे पहले अपनी कहानी खुद सुनाता. ईरान की जमीन पर खडा यह बर्फ से ढका विशाल पर्वत सिर्फ एक पहाड नहीं है बल्कि इतिहास, रोमांच, प्रकृति और इंसानी जज्बे का अनोखा मेल है. एशिया का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी होने के साथ साथ Damavand आज भी लोगों को अपनी तरफ खींचता है. इसकी ऊंचाई, इसकी रहस्यमयी ताकत, इससे जुडी कहानियां और हाल के सालों में इससे जुडी घटनाएं इसे और भी खास बना देती हैं. यही वजह है कि ट्रैवल लवर्स, माउंटेन क्लाइम्बर्स और नेचर को करीब से समझने वाले लोग Mount Damavand को अपनी बकेट लिस्ट में जरूर रखते हैं. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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कहां है Mount Damavand और क्यों दिखता है इतना अलग: Mount Damavand ईरान की Alborz mountain range में स्थित है और Caspian Sea के पास से दूर से ही नजर आने लगता है. इसकी ऊंचाई करीब 5609 मीटर है और यही इसे एशिया का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी बनाती है. इसका आकार लगभग परफेक्ट कोन जैसा है और साल के ज्यादातर समय इसकी चोटी बर्फ से ढकी रहती है. यही वजह है कि यह आसपास के पूरे इलाके में सबसे अलग और सबसे प्रभावशाली दिखाई देता है. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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ईरान में यह सिर्फ सबसे ऊंचा पहाड नहीं है बल्कि एक राष्ट्रीय पहचान भी है. कई कविताओं, लोककथाओं और कहानियों में Damavand का जिक्र मिलता है. यहां तक कि ईरान की करेंसी पर भी इस पहाड की झलक देखी जा सकती है. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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इतिहास और कहानियों से जुडा Damavand: ईरानी लोककथाओं में Mount Damavand को ताकत और इंसाफ का प्रतीक माना जाता है. मशहूर महाकाव्य Shahnameh में इसे एक क्रूर राजा Zahhak की कैद के स्थान के रूप में बताया गया है. मान्यता है कि यहां अच्छाई ने बुराई को हराया था. कई कहानियों में एक बुद्धिमान पक्षी Simorgh का जिक्र भी मिलता है जिसे इस पहाड से जोडा जाता है. इन कहानियों की वजह से Damavand सिर्फ एक प्राकृतिक जगह नहीं बल्कि ईरानी संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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सोया हुआ लेकिन जिंदा ज्वालामुखी: Mount Damavand को वैज्ञानिक रूप से dormant volcano कहा जाता है यानी यह फिलहाल शांत है लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. माना जाता है कि इसका आखिरी विस्फोट हजारों साल पहले हुआ था लेकिन आज भी इसकी चोटी के पास से सल्फर जैसी गैसें निकलती रहती हैं. बर्फ पर पीले रंग के धब्बे इस बात का सबूत हैं कि इसके अंदर अब भी गर्मी मौजूद है. इसके आसपास गर्म पानी के झरने भी मिलते हैं खासकर Larijan इलाके में. लोग मानते हैं कि इन पानी में सेहत से जुडे फायदे भी होते हैं. वैज्ञानिक इन जगहों पर नजर रखते हैं ताकि किसी भी हलचल को समय रहते समझा जा सके. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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माउंटेन क्लाइम्बर्स के लिए सबसे बडा टेस्ट: Mount Damavand दिखने में जितना खूबसूरत है चढाई में उतना ही मुश्किल भी है. तकनीकी तौर पर यह बहुत कठिन नहीं माना जाता लेकिन इसकी ऊंचाई, मौसम और ज्वालामुखी गैसें इसे खतरनाक बना देती हैं. आमतौर पर लोग इसे चढने में दो से तीन दिन का समय लेते हैं ताकि शरीर को ऊंचाई के हिसाब से ढाला जा सके. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला रास्ता Polour गांव से शुरू होता है जहां बेस कैंप बनाया जाता है. इसके अलावा नॉर्थ और वेस्ट रूट भी हैं जो ज्यादा चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं. गर्मियों में भी यहां तेज हवा और अचानक बर्फबारी हो सकती है. सर्दियों में यहां चढाई सिर्फ एक्सपर्ट्स के लिए ही मानी जाती है. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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जब एडवेंचर के साथ जुडा संघर्ष: हाल के समय में Mount Damavand उस वक्त सुर्खियों में आया जब एक भारतीय पर्वतारोही यहां चढाई के लिए पहुंचे और वहां हालात अचानक बदल गए. चोटी से कुछ ही दूरी पर खराब मौसम की वजह से उन्हें वापस लौटना पडा. इसके बाद ईरान में बढते तनाव और हवाई सेवाएं बंद होने से उनकी मुश्किलें और बढ गईं. इस घटना ने दिखा दिया कि एडवेंचर सिर्फ पहाडों से नहीं बल्कि हालात से भी जुडा होता है. Damavand उस दौरान भी शांत खडा रहा जब नीचे की दुनिया में उथल पुथल मची हुई थी. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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प्रकृति और जीव जंतुओं की अनोखी दुनिया: Mount Damavand के आसपास का इलाका जैव विविधता से भरपूर है. यहां कई तरह के जंगली जानवर पाए जाते हैं जैसे पहाडी भालू, जंगली बकरियां, लोमडी और कई दुर्लभ पक्षी. अलग अलग ऊंचाई पर पेड पौधों की किस्म भी बदलती रहती है. निचले इलाकों में हरे भरे जंगल और ऊपरी हिस्सों में अल्पाइन पौधे नजर आते हैं. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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Mount Damavand कैसे पहुंचे: Mount Damavand Tehran से करीब 60 से 70 किलोमीटर की दूरी पर है. ज्यादातर लोग पहले Tehran पहुंचते हैं और फिर सडक के रास्ते Polour गांव जाते हैं. वहां से आगे चढाई शुरू होती है. यहां जाने से पहले परमिट, मौसम की जानकारी और लोकल गाइड लेना बहुत जरूरी माना जाता है. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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क्यों खास है Mount Damavand: Mount Damavand सिर्फ एशिया का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी नहीं है बल्कि यह प्रकृति की ताकत, इंसानी जज्बे और इतिहास का गवाह भी है. यह पहाड दिखाता है कि समय, राजनीति और हालात बदल सकते हैं लेकिन प्रकृति अपनी जगह कायम रहती है. (फोटो क्रेडिट: सोशल मीडिया)

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Iran का Mount Damavand क्यों है खास? एशिया का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी


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