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Rahul Gandhi Ooty Visit | Priyanka Gandhi Ooty Tourism | ऊटी में करें जन्नत का एहसास


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Rahul Gandhi Ooty Visit: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के सुपर नेता राहुल गांधी अपनी बहन सांसद प्रियंका गांधी के साथ तमिलनाडु की खूबसूरत वादियां ऊंटी की सैर पर गए हैं. ऊटी एक ऐसी जगह हैं जिसके हर सफे में अनोखे तरन्नुम की कशिश है. दूर तक हरी-भरी घास की चादरों और धुंध में लिपटी पहाड़ियों की श्रृंखला सैलानियों के हर तार को झंकृत कर देता है. ये पहाड़ियां शांत, शालीन लेकिन दूर तक मनमोहक सुंदरता से आपको अपनेपन का एहसास दिलाएगी जहां की आगोश में लिपटना हर किसी के लिए सपना सरीखा लगता है. इसलिए इसे भारत में हिल स्टेशनों की रानी कहा जाता है. जो भी वहां गया आपको जिंदगी में एक बार जरूर वहां जाने की सलाह देंगे. ऐसे में क्या आप देश के सबसे खूबसूरत वादियों में जाना चाहते हैं, तो जान लीजिए वहां की खासियत और वहां जाने का खर्चा.

Ooty Vacations: ऊटी तमिलनाडु के नीलगिरी पर्वत पर बसा एक खूबसूरत हिल स्टेशन है. इसे भारत की हिल स्टेशनों की रानी है. इसका आधिकारिक नाम उद्गमंडलम है. इसे आमतौर पर ऊटी कहा जाता है. यह ऐसा हिल स्टेशन है जो अपनी मनमोहक सुंदरता से आपको पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर देगा. यह हरी-भरी घास की चादरों पर फैली धुंधली पहाड़ियों की एक शृंखला है. यहां नजारों को देखने, आनंद लेने और अनुभव करने के लिए बहुत कुछ है. ऊटी केवल एक पर्यटक स्थल नहीं है, बल्कि यह अपने मेहमानों को अपनेपन का एक ऐसा हिस्सा सौंप देती है, जिसे वे खुशी-खुशी अपने साथ ले जाना चाहते हैं. Photo-Tamilnadu Tourism

Ooty Vacations: ऊटी तमिलनाडु के नीलगिरी पर्वत पर बसा एक खूबसूरत हिल स्टेशन है. इसे भारत की हिल स्टेशनों की रानी है. इसका आधिकारिक नाम उद्गमंडलम है. इसे आमतौर पर ऊटी कहा जाता है. यह ऐसा हिल स्टेशन है जो अपनी मनमोहक सुंदरता से आपको पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर देगा. यह हरी-भरी घास की चादरों पर फैली धुंधली पहाड़ियों की एक शृंखला है. यहां नजारों को देखने, आनंद लेने और अनुभव करने के लिए बहुत कुछ है. ऊटी केवल एक पर्यटक स्थल नहीं है, बल्कि यह अपने मेहमानों को अपनेपन का एक ऐसा हिस्सा सौंप देती है, जिसे वे खुशी-खुशी अपने साथ ले जाना चाहते हैं. Photo-Tamilnadu Tourism

ऊटी तमिलनाडु के नीलगिरि ज़िले में बसा हुआ है. कभी ब्रिटिश राज के दौरान भारत का एक प्रमुख ग्रीष्मकालीन पर्यटन स्थल था. ऊटी समय के साथ तमिलनाडु के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक बन गया है. यहां लगभग पूरे साल ठंडा और सुकून देने वाला मौसम होता है जो दूर-दराज़ से आने वाले पर्यटकों का स्वागत करता है. यहां सिर्फ पहाड़ और घाटियां ही नहीं हैं, बल्कि उन पर्यटकों के लिए इससे कहीं अधिक है, जो घुमावदार सड़कों से होते हुए इसकी ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं. झीलें, उद्यान, पार्क, चोटियां, झरने और शानदार ठहरने के विकल्प सब कुछ यहां मौजूद है. Photo-Tamilnadu Tourism

ऊटी तमिलनाडु के नीलगिरि ज़िले में बसा हुआ है. कभी ब्रिटिश राज के दौरान भारत का एक प्रमुख ग्रीष्मकालीन पर्यटन स्थल था. ऊटी समय के साथ तमिलनाडु के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक बन गया है. यहां लगभग पूरे साल ठंडा और सुकून देने वाला मौसम होता है जो दूर-दराज़ से आने वाले पर्यटकों का स्वागत करता है. यहां सिर्फ पहाड़ और घाटियां ही नहीं हैं, बल्कि उन पर्यटकों के लिए इससे कहीं अधिक है, जो घुमावदार सड़कों से होते हुए इसकी ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं. झीलें, उद्यान, पार्क, चोटियां, झरने और शानदार ठहरने के विकल्प सब कुछ यहां मौजूद है. Photo-Tamilnadu Tourism

इसी अद्भुत प्राकृतिक भव्यता के कारण ऊटी को ‘भारत का स्विट्ज़रलैंड’ कहा जाता है. अगर आप एक कप चाय के साथ बैठकर प्रकृति के विशाल सौंदर्य को निहारते हुए सुकून पाना चाहते हैं, तो ऊटी आपके लिए एकदम सही जगह है. इसके अलावा, नीलगिरि बायोस्फियर अपनी समृद्ध वनस्पति और जीव-जंतुओं के लिए जाना जाता है, जो आपको रहस्यमयी जंगलों की गहराइयों में ले जाकर जीवन में एक बार मिलने वाले अनुभवों से रूबरू कराता है. Photo-Tamilnadu Tourism

इसी अद्भुत प्राकृतिक भव्यता के कारण ऊटी को ‘भारत का स्विट्ज़रलैंड’ कहा जाता है. अगर आप एक कप चाय के साथ बैठकर प्रकृति के विशाल सौंदर्य को निहारते हुए सुकून पाना चाहते हैं, तो ऊटी आपके लिए एकदम सही जगह है. इसके अलावा, नीलगिरि बायोस्फियर अपनी समृद्ध वनस्पति और जीव-जंतुओं के लिए जाना जाता है, जो आपको रहस्यमयी जंगलों की गहराइयों में ले जाकर जीवन में एक बार मिलने वाले अनुभवों से रूबरू कराता है. Photo-Tamilnadu Tourism

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यहां पहुंचने के लिए आपको देश के किसी भी कोने से कोयंबटूर पहुंचना होगा. कोयंबटूर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है और वहां रेलवे स्टेशन भी है. कोयंबटूर से ऊटी 87 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. आपको यहां से सरकारी बस मिल जाएगी जो आपको उद्गमंडलम पहुंचा देगी. वहीं मेट्टूपलयम से आपको विश्व प्रसिद्ध विश्व धरोहर टॉय ट्रेन मिलेगी जो कुन्नुर से होते हुए आपको ऊटी पहुंचाएगी. अधिकतर लोग इसी ट्रेन से ऊंटी तक पहुंचते हैं. ऊटी से लगभग 47 किलोमीटर दूर मेट्टुपालयम निकटतम रेलवे स्टेशन है. कोयंबटूर और चेन्नई से मेट्टुपलयम के लिए नियमित ट्रेनें चलती हैं. ऊटी मैसूर से 125 किलोमीटर की दूरी पर है. ये दोनों शहर देश के हर शहर से जुड़े हुए हैं. Photo-Tamilnadu Tourism

यहां पहुंचने के लिए आपको देश के किसी भी कोने से कोयंबटूर पहुंचना होगा. कोयंबटूर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है और वहां रेलवे स्टेशन भी है. कोयंबटूर से ऊटी 87 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. आपको यहां से सरकारी बस मिल जाएगी जो आपको उद्गमंडलम पहुंचा देगी. वहीं मेट्टूपलयम से आपको विश्व प्रसिद्ध विश्व धरोहर टॉय ट्रेन मिलेगी जो कुन्नुर से होते हुए आपको ऊटी पहुंचाएगी. अधिकतर लोग इसी ट्रेन से ऊंटी तक पहुंचते हैं. ऊटी से लगभग 47 किलोमीटर दूर मेट्टुपालयम निकटतम रेलवे स्टेशन है. कोयंबटूर और चेन्नई से मेट्टुपलयम के लिए नियमित ट्रेनें चलती हैं. ऊटी मैसूर से 125 किलोमीटर की दूरी पर है. ये दोनों शहर देश के हर शहर से जुड़े हुए हैं. Photo-Tamilnadu Tourism

कितना खर्च आएगा-यदि आप दिल्ली से ऊटी जाना चाहते हैं तो कोयंबटूर तक ट्रेन से पहुंचने के लिए कम से कम 1000 का स्लीपर टिकट मिलेगा. वहीं इसके बाद जिस श्रेणी में टिकट लेंगे उतना खर्चा बढ़ जाएगा. कोयंबटूर से आप सरकारी बस से भी ऊटी जा सकते हैं जिसका किराया 120 से 500 रुपये तक है. अगर आप टॉय ट्रेन से जाएंगे तो इसका किराया 250 से 700 रुपये के बीच है. अब सवाल रहा है कि ठहरे कहां. तो वहां कई गेस्ट हाउस, रिजॉर्ट से लेकर बड़े-बड़े होटल भी हैं. गेस्ट हाउस में मिनिमम 700 से 1500 तक खर्च करने होंगे. इसके बाद आप अपने बजट के हिसाब से ठहर सकते हैं. इस हिसाब से किराया में जाने-आने का खर्च स्लीपर क्लास में जाएंगे तो करीब 3 से 4 हजार लगेगा. इसके बाद अगर आप वहां दो दिन रहेंगे तो कम से कम 2000 रुपये ठहरने का मान लीजिए. फिर प्रतिदिन 500 रुपये फूडिंग में रख लीजिए तो कुल मिलाकर एक सप्ताह का प्लान 8 से 9 हजार रुपये खर्च होगा. Photo-Tamilnadu Tourism

कितना खर्च आएगा-यदि आप दिल्ली से ऊटी जाना चाहते हैं तो कोयंबटूर तक ट्रेन से पहुंचने के लिए कम से कम 1000 का स्लीपर टिकट मिलेगा. वहीं इसके बाद जिस श्रेणी में टिकट लेंगे उतना खर्चा बढ़ जाएगा. कोयंबटूर से आप सरकारी बस से भी ऊटी जा सकते हैं जिसका किराया 120 से 500 रुपये तक है. अगर आप टॉय ट्रेन से जाएंगे तो इसका किराया 250 से 700 रुपये के बीच है. अब सवाल रहा है कि ठहरे कहां. तो वहां कई गेस्ट हाउस, रिजॉर्ट से लेकर बड़े-बड़े होटल भी हैं. गेस्ट हाउस में मिनिमम 700 से 1500 तक खर्च करने होंगे. इसके बाद आप अपने बजट के हिसाब से ठहर सकते हैं. इस हिसाब से किराया में जाने-आने का खर्च स्लीपर क्लास में जाएंगे तो करीब 3 से 4 हजार लगेगा. इसके बाद अगर आप वहां दो दिन रहेंगे तो कम से कम 2000 रुपये ठहरने का मान लीजिए. फिर प्रतिदिन 500 रुपये फूडिंग में रख लीजिए तो कुल मिलाकर एक सप्ताह का प्लान 8 से 9 हजार रुपये खर्च होगा. Photo-Tamilnadu Tourism

डोड्डाबेट्टा पीक-अब सवाल है कि यहां देखने वाली फेमस जगहें कौन सी है. तो डोड्डाबेट्टा नीलगिरि पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी है और ऊटी की सबसे रोमांचक जगहों में गिनी जाती है. समुद्र तल से लगभग 8,650 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह चोटी चारों ओर फैली घाटियों और जंगलों का अद्भुत दृश्य पेश करती है. यहां बने व्यू पॉइंट से दूर-दूर तक पहाड़ों और बादलों का नज़ारा देखा जा सकता है. ठंडी हवा और हल्की धुंध इस स्थान की खूबसूरती को और बढ़ा देती है. फोटोग्राफी और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह जगह बेहद पसंदीदा है. Photo-Tamilnadu Tourism

डोड्डाबेट्टा पीक-अब सवाल है कि यहां देखने वाली फेमस जगहें कौन सी है. तो डोड्डाबेट्टा नीलगिरि पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी है और ऊटी की सबसे रोमांचक जगहों में गिनी जाती है. समुद्र तल से लगभग 8,650 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह चोटी चारों ओर फैली घाटियों और जंगलों का अद्भुत दृश्य पेश करती है. यहां बने व्यू पॉइंट से दूर-दूर तक पहाड़ों और बादलों का नज़ारा देखा जा सकता है. ठंडी हवा और हल्की धुंध इस स्थान की खूबसूरती को और बढ़ा देती है. फोटोग्राफी और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह जगह बेहद पसंदीदा है. Photo-Tamilnadu Tourism

ऊटी लेक-ऊटी लेक इस हिल स्टेशन की सबसे आकर्षक और लोकप्रिय जगहों में से एक है, जहां पहुंचते ही मन को गहरा सुकून मिलता है. चारों ओर हरियाली से घिरी यह झील शांत वातावरण और ठंडी हवा के लिए जानी जाती है. यहां पर्यटक बोटिंग का आनंद ले सकते हैं, जिससे झील और आसपास की पहाड़ियों की खूबसूरती और भी नजदीक से देखने को मिलती है. बच्चों और परिवारों के लिए यह जगह खास पसंदीदा है. सुबह और शाम के समय झील का नज़ारा बेहद मनमोहक होता है, जब पानी में पहाड़ों की परछाईं दिखाई देती है. Photo-Tamilnadu Tourism

ऊटी लेक-ऊटी लेक इस हिल स्टेशन की सबसे आकर्षक और लोकप्रिय जगहों में से एक है, जहां पहुंचते ही मन को गहरा सुकून मिलता है. चारों ओर हरियाली से घिरी यह झील शांत वातावरण और ठंडी हवा के लिए जानी जाती है. यहां पर्यटक बोटिंग का आनंद ले सकते हैं, जिससे झील और आसपास की पहाड़ियों की खूबसूरती और भी नजदीक से देखने को मिलती है. बच्चों और परिवारों के लिए यह जगह खास पसंदीदा है. सुबह और शाम के समय झील का नज़ारा बेहद मनमोहक होता है, जब पानी में पहाड़ों की परछाईं दिखाई देती है. Photo-Tamilnadu Tourism

गवर्नमेंट बॉटनिकल गार्डन-ऊटी का गवर्नमेंट बॉटनिकल गार्डन प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है. लगभग 22 हेक्टेयर में फैला यह उद्यान सैकड़ों साल पुराने पेड़ों, रंग-बिरंगे फूलों और दुर्लभ पौधों के लिए प्रसिद्ध है. यहां घूमते हुए ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने अपनी पूरी सुंदरता एक ही जगह समेट दी हो. हर साल आयोजित होने वाला फ्लावर शो इस गार्डन की खास पहचान है, जिसमें देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं. साफ-सुथरा माहौल और ठंडी जलवायु इस जगह को बेहद खास बना देती है. Photo-Tamilnadu Tourism

गवर्नमेंट बॉटनिकल गार्डन-ऊटी का गवर्नमेंट बॉटनिकल गार्डन प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है. लगभग 22 हेक्टेयर में फैला यह उद्यान सैकड़ों साल पुराने पेड़ों, रंग-बिरंगे फूलों और दुर्लभ पौधों के लिए प्रसिद्ध है. यहां घूमते हुए ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने अपनी पूरी सुंदरता एक ही जगह समेट दी हो. हर साल आयोजित होने वाला फ्लावर शो इस गार्डन की खास पहचान है, जिसमें देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं. साफ-सुथरा माहौल और ठंडी जलवायु इस जगह को बेहद खास बना देती है. Photo-Tamilnadu Tourism

नीलगिरि माउंटेन रेलवे-ऊटी की टॉय ट्रेन यात्रा सिर्फ एक सफर नहीं बल्कि एक यादगार अनुभव है. मेट्टुपालयम से ऊटी तक चलने वाली यह ट्रेन भारत की एकमात्र रोज़ाना चलने वाली रैक रेलवे है, जिसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा प्राप्त है. ट्रेन पहाड़ों, घने जंगलों, सुरंगों और पुलों से होकर गुजरती है, जहां हर मोड़ पर प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है. धीमी रफ्तार में चलती यह ट्रेन यात्रियों को नीलगिरि की असली खूबसूरती से रूबरू कराती है. Photo-Tamilnadu Tourism

नीलगिरि माउंटेन रेलवे-ऊटी की टॉय ट्रेन यात्रा सिर्फ एक सफर नहीं बल्कि एक यादगार अनुभव है. मेट्टुपालयम से ऊटी तक चलने वाली यह ट्रेन भारत की एकमात्र रोज़ाना चलने वाली रैक रेलवे है, जिसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा प्राप्त है. ट्रेन पहाड़ों, घने जंगलों, सुरंगों और पुलों से होकर गुजरती है, जहां हर मोड़ पर प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है. धीमी रफ्तार में चलती यह ट्रेन यात्रियों को नीलगिरि की असली खूबसूरती से रूबरू कराती है. Photo-Tamilnadu Tourism

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जिस ऊटी के दीवाने हुए राहुल और प्रियंका गांधी, क्या आपने देखी हैं वो वादियां


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