उदयपुर: राजस्थान अपनी समृद्ध मिनिएचर कला और पारंपरिक डिजाइन के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन अब इस कला को एक नया और आकर्षक रूप मिल रहा है.पारंपरिक पेंटिंग और मिनिएचर आर्ट को अब कागज़ या कपड़ों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे नाखूनों पर सजाया जा रहा है. आजकल जहां नेल आर्ट और नेल एक्सटेंशन का क्रेज लगातार बढ़ रहा है, वहीं राजस्थान के कलाकार इस आधुनिक ट्रेंड को अपनी परंपरा के साथ जोड़कर अनोखा फ्यूजन तैयार कर रहे हैं.
उदयपुर के एक मिनिएचर कलाकार ने बताया कि नाखूनों पर पारंपरिक राजस्थानी डिजाइन बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है.इस काम में साधारण ब्रश का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि गिलहरी के बालों से बने बेहद पतले और खास ब्रश उपयोग में लिए जाते हैं. इन ब्रशों की खासियत यह है कि एक ही स्ट्रोक में बेहद बारीक रेखाएं बनाई जा सकती हैं.इसी वजह से नाखूनों पर हाथी, ऊंट, घोड़े, राजस्थानी पुरुष- महिलाएं, लोक नृत्य और पारंपरिक आकृतियां बेहद सुंदर और सजीव दिखाई देती हैं.
नेल आर्ट मशीन से तैयार की जाती
कलाकार बताते हैं कि यह डिज़ाइन पूरी तरह हाथ से बनाए जाते हैं और मशीन का इस्तेमाल केवल 20 से 30 प्रतिशत तक ही होता है. सामान्यत: नेल आर्ट मशीन से तैयार की जाती है, लेकिन मिनिएचर आधारित इस कला में पूरा फोकस हाथ की बारीकी और नियंत्रण पर होता है. एक नाखून पर पारंपरिक पेंटिंग उकेरने में कलाकार को काफी समय, धैर्य और गहरी एकाग्रता की आवश्यकता होती है.
पहली बार बनाई गई हो
पर्यटक इस अनोखी कला को देखकर मंत्रमुग्ध रह जाते हैं. विदेशी सैलानी तो इसे राजस्थानी कला का आधुनिक रूप कहकर सराहते भी हैं. कई पर्यटक इसे अपनी यात्रा की यादगार बनाते हुए खास तौर पर मिनिएचर नेल आर्ट बनवाते हैं. यह कला न केवल आकर्षक दिखती है, बल्कि 10 से 15 दिनों तक बिल्कुल वैसी ही बनी रहती है, जैसे पहली बार बनाई गई हो.
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