Home Uncategorized अंतिम संस्कार के 3 दिन बाद क्यों अस्थियां इकठ्ठा करना होता है...

अंतिम संस्कार के 3 दिन बाद क्यों अस्थियां इकठ्ठा करना होता है जरूरी? क्या है इसकी वजह और महत्व, जानें पंडित जी से

0
3


Last Updated:

Antim Sanskar Rituals : सनातन धर्म में 16 संस्कारों का बेहद महत्व बताया गया है. जिनमें शामिल है अंतिम संस्कार जिसमें दाह संस्कार करने के बाद अस्थियां इकट्ठा करना बहुत जरूरी रिवाज है, ऐसा क्यों?

अंतिम संस्कार के 3 दिन बाद क्यों अस्थियां इकठ्ठा करना होता है जरूरी?

अंतिम संस्कार की परम्परा

हाइलाइट्स

  • अस्थियों को पवित्र नदी में प्रवाहित करने से आत्मा को मोक्ष मिलता है.
  • अस्थि संग्रह और विसर्जन से परिजनों को भावनात्मक संतुलन मिलता है.
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह प्रक्रिया पर्यावरण संतुलन में मददगार है.

Antim Sanskar Rituals : हिंदू धर्म में जीवन को एक यात्रा माना गया है, जो मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होती. यही वजह है कि जब किसी व्यक्ति का निधन होता है, तो उसके बाद कई विधियां की जाती हैं, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिल सके. इन्हीं में से एक अहम परंपरा है दाह संस्कार के बाद अस्थियों को इकठ्ठा करना और फिर उनका पवित्र नदी में प्रवाह करना. यह परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है और केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक स्तर पर भी इसका बड़ा महत्व है. इसके बारे में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

धार्मिक कारण
धार्मिक नजरिए से देखा जाए, तो यह माना जाता है कि जब किसी की अस्थियों को गंगा या अन्य पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाता है, तो उस आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है. गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों में भी इसका जिक्र है कि अगर अस्थियों को प्रवाहित नहीं किया गया, तो आत्मा को पूर्ण शांति नहीं मिलती और वह भटक सकती है. इसी कारण परिवार वाले यह अनुष्ठान पूरे श्रद्धा भाव से करते हैं.

भावनात्मक और मानसिक कारण
जब कोई अपने प्रिय को खोता है, तो वह बहुत गहरे दुख में चला जाता है. ऐसे समय में अस्थि संग्रह और विसर्जन की प्रक्रिया एक तरह से मानसिक रूप से संतुलन बनाने में मदद करती है. परिजन जब इस प्रक्रिया को पूरा करते हैं, तो उन्हें एक भावनात्मक तसल्ली मिलती है कि उन्होंने अपने प्रिय की आत्मा की शांति के लिए कुछ जरूरी किया है.

आध्यात्मिक मान्यता
हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि मृत्यु केवल शरीर की होती है, आत्मा अमर होती है. जब अस्थियां विधिपूर्वक प्रवाहित की जाती हैं, तो आत्मा को आगे की यात्रा में सहारा मिलता है. पिंडदान और तर्पण जैसे कर्म भी इसी कड़ी का हिस्सा होते हैं, जिनका उद्देश्य आत्मा को संसारिक बंधनों से मुक्त करना होता है. साथ ही यह भी माना जाता है कि इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण
अगर वैज्ञानिक नजरिए से देखें, तो यह प्रक्रिया पर्यावरण के लिहाज से भी संतुलन बनाए रखने में मददगार मानी जाती है. आग में जलने के बाद जो अवशेष बचते हैं, उन्हें नदी के बहते जल में प्रवाहित करना एक तरह से सफाई और सम्मान दोनों का प्रतीक है. साथ ही यह प्रक्रिया उन परिजनों के लिए भी मानसिक रूप से राहत देने वाली होती है जो अपने किसी प्रियजन को खो चुके होते हैं.

अस्थियां कब और कैसे इकठ्ठा की जाती हैं?
परंपरा के अनुसार, अंतिम संस्कार के तीसरे दिन अस्थियों को इकठ्ठा किया जाता है. इन्हें बहते जल में धोकर किसी धातु या मिट्टी के बर्तन में रखा जाता है. इसके बाद उपयुक्त दिन देखकर पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाता है. इससे पहले पिंडदान और तर्पण करना भी जरूरी होता है.

homeastro

अंतिम संस्कार के 3 दिन बाद क्यों अस्थियां इकठ्ठा करना होता है जरूरी?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here