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अंबाला मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर: सुरक्षा और आस्था का केंद्र

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Ambala News: अंबाला के पास दिल्ली-अमृतसर हाईवे पर स्थित मनोकामना सिद्ध श्री हनुमान मंदिर के कारण हादसे कम हो गए हैं. श्रद्धालु मानते हैं कि हनुमान जी की कृपा से यह मार्ग सुरक्षित हो गया है.

अंबाला: कहते हैं जहां श्रद्धा होती है वहां चमत्कार अपने आप होते हैं… अंबाला के पास दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे पर मोहड़ा गांव के निकट स्थित मनोकामना सिद्ध श्री हनुमान मंदिर इसी कहावत को सच साबित करता है. कभी यह इलाका सड़क हादसों के लिए जाना जाता था और सालभर में सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते थे, लेकिन जबसे यहां हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित हुई है, तबसे दुर्घटनाओं पर मानो विराम लग गया है.

हनुमान जी की कृपा से रुकी दुर्घटनाएं

श्रद्धालु मानते हैं कि यह हनुमान जी की कृपा का परिणाम है जिसने इस मार्ग को सुरक्षित बना दिया. आज यह मंदिर दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है. ऐसी भी मान्यता है कि पुराने समय में श्रद्धालु जब अंबाला की तरफ से कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण और सोमवती अमावस्या पर स्नान करने के लिए जाते थे, तब अंबाला और कुरुक्षेत्र के बीच यह एक ऐसा स्थान था जहां पर श्रद्धालुओं को पीने के लिए कुएं का ठंडा और मीठा पानी मिलता था और यहां पर स्थित आश्रम में श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती थी.

Local18 से महंत पूर्णानंद गिरि की विशेष बातचीत

Local18 से बातचीत में मंदिर के महंत पूर्णानंद गिरि ने बताया कि इस स्थान की धार्मिक परंपरा 1928 से शुरू हुई, जब उनके गुरु जी ने यहां आश्रम की स्थापना की थी. इसके बाद वर्ष 1945 में राधा कृष्ण मंदिर बना, जिसमें भगवान शिव और दुर्गा मां की मूर्तियों की भी स्थापना हुई. उन्होंने बताया कि 1951 में बढ़ते हादसों को देखते हुए यहां हनुमान जी की एक छोटी प्रतिमा स्थापित की गई थी.

महंत के अनुसार पहले यहां एक बड़ी गौशाला और वन क्षेत्र भी था और उस दौरान जब लोग सोमवती अमावस्या या सूर्य ग्रहण के मौके पर पैदल या बैलगाड़ी से कुरुक्षेत्र जाते थे, तो साधु-संत और यात्री इस स्थान पर अवश्य विश्राम करते थे. यही वजह है कि यहां हमेशा मेला सा माहौल बना रहता था, और मंदिर के बाहर एक प्राचीन कुआं बना हुआ है जहां का पानी यात्री हमेशा पीते थे.

2002 में भव्य प्रतिमा स्थापना, आज लाखों की आस्था

महंत पूर्णानंद गिरि ने बताया कि 1995 में मंदिर का पूर्ण स्थापना हुई और 2002 में हनुमान जी की भव्य बड़े आकार की प्रतिमा की प्रतिष्ठा की गई. उन्होंने कहा कि उस समय देशभर से शंकराचार्य और संतजन उपस्थित थे. तभी से यह मंदिर मनोकामना सिद्ध श्री हनुमान मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया. यहां साल में तीन बड़े भंडारे आयोजित होते हैं जिनमें 3 से 5 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं.

हादसों से मिलती है मुक्ति

इसके अलावा हर महीने अमावस्या के बाद आने वाले मंगलवार को एक श्रद्धालु की ओर से भंडारा कराया जाता है जिसमें ढाई हजार से अधिक लोग भोजन करते हैं. हादसों से मुक्ति और जनकल्याण की भावना के कारण यह मंदिर आज अंबाला ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत में आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है. उन्होंने बताया कि हनुमान जी की प्राचीन छोटी प्रतिमा को मंदिर के शिखर पर स्थापित किया गया है और आने जाने वाले श्रद्धालु मंदिर पर माथा टेक कर दिल्ली की तरफ आगे बढ़ते हैं.

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