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Ambala News: अंबाला के पास दिल्ली-अमृतसर हाईवे पर स्थित मनोकामना सिद्ध श्री हनुमान मंदिर के कारण हादसे कम हो गए हैं. श्रद्धालु मानते हैं कि हनुमान जी की कृपा से यह मार्ग सुरक्षित हो गया है.
हनुमान जी की कृपा से रुकी दुर्घटनाएं
Local18 से महंत पूर्णानंद गिरि की विशेष बातचीत
महंत के अनुसार पहले यहां एक बड़ी गौशाला और वन क्षेत्र भी था और उस दौरान जब लोग सोमवती अमावस्या या सूर्य ग्रहण के मौके पर पैदल या बैलगाड़ी से कुरुक्षेत्र जाते थे, तो साधु-संत और यात्री इस स्थान पर अवश्य विश्राम करते थे. यही वजह है कि यहां हमेशा मेला सा माहौल बना रहता था, और मंदिर के बाहर एक प्राचीन कुआं बना हुआ है जहां का पानी यात्री हमेशा पीते थे.
महंत पूर्णानंद गिरि ने बताया कि 1995 में मंदिर का पूर्ण स्थापना हुई और 2002 में हनुमान जी की भव्य बड़े आकार की प्रतिमा की प्रतिष्ठा की गई. उन्होंने कहा कि उस समय देशभर से शंकराचार्य और संतजन उपस्थित थे. तभी से यह मंदिर मनोकामना सिद्ध श्री हनुमान मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया. यहां साल में तीन बड़े भंडारे आयोजित होते हैं जिनमें 3 से 5 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं.
इसके अलावा हर महीने अमावस्या के बाद आने वाले मंगलवार को एक श्रद्धालु की ओर से भंडारा कराया जाता है जिसमें ढाई हजार से अधिक लोग भोजन करते हैं. हादसों से मुक्ति और जनकल्याण की भावना के कारण यह मंदिर आज अंबाला ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत में आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है. उन्होंने बताया कि हनुमान जी की प्राचीन छोटी प्रतिमा को मंदिर के शिखर पर स्थापित किया गया है और आने जाने वाले श्रद्धालु मंदिर पर माथा टेक कर दिल्ली की तरफ आगे बढ़ते हैं.

















