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अकाल मृत्यु से बचने का अचूक उपाय! इस पवित्र स्थान पर करें जलाभिषेक, महादेव स्वयं करेंगे रक्षा

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Agency:Bharat.one Jharkhand

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Palamu News: पलामू जिले के इस मंदिर में महाकाल ज्योतिर्लिंग की प्रतिमूर्ति स्थापित है. यहां जलाभिषेक करने से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है. इस मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं.

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द्वादश

द्वादश ज्योतिर्लिंग 

हाइलाइट्स

  • पलामू के मंदिर में महाकाल ज्योतिर्लिंग की प्रतिमूर्ति स्थापित है।
  • यहां जलाभिषेक करने से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है।
  • शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा होती है।

पलामू. जहां आस्था की बात होती है, वहां पौराणिक मान्यताएं और कथाएं उभर कर सामने आती हैं. उज्जैन में स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग इन्हीं आस्था और मान्यता का केंद्र है. कहा जाता है कि महाकाल के दर्शन मात्र से किसी भी व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं होती. महाकाल की प्रतिमूर्ति झारखंड में भी मौजूद है.

दरअसल, झारखंड की राजधानी रांची से 165 किलोमीटर दूर पलामू जिले के रेड़मा चौक के पास भगवती भवन मंदिर है. यहां दक्षिणेश्वर मां काली के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंग की प्रतिमूर्ति विराजमान है. इस भवन में भगवान भोलेनाथ के सभी दुर्लभ ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं, जिसमें उज्जैन के महाकाल की मिट्टी लाकर स्थापित की गई है. मान्यता है कि यहां जलाभिषेक करने से श्रद्धालु की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती.

द्वादश ज्योतिर्लिंग हैं विराजमान
पुजारी श्याम कुमार पांडे ने लोकल18 को बताया कि शास्त्रों में द्वादश ज्योतिर्लिंग के बारे में गहनता से वर्णन है. उज्जैन के महाकाल के बारे में कहा गया है कि इनके दर्शन मात्र से किसी की अकाल मृत्यु नहीं होती. महाकाल ज्योतिर्लिंग की प्रतिमूर्ति पलामू के इस मंदिर में विराजमान है।.उन्होंने बताया कि यहां पिछले 60 साल से द्वादश ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं, जिनके लिए सभी स्थानों की मिट्टी, जल और मंत्र लाकर स्थापित किए गए हैं.

शिवरात्रि पर होती है विशेष पूजा
उन्होंने आगे बताया कि शिवरात्रि के अवसर पर भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है. इस दौरान विधिवत अनुष्ठान से भगवान शिव का विवाह कराया जाता है. इस मौके पर पलामू समेत आस-पास के जिलों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस मंदिर की मान्यता है कि यहां मांगी हुई हर मुराद पूरी होती हैं.

शिवलिंग की पूजा क्यों होती है?
उन्होंने बताया कि शिवलिंग की पूजा के पीछे एक रोचक बात है. शास्त्रों में इसके बारे में बताया गया ह.। शास्त्रों के अनुसार, “विश्वं तृप्तम शिवाय लिंग पूजनम्” अर्थात विश्व के कल्याण और तृप्ति के लिए भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग की पूजा की जाती है.

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अकाल मृत्यु से बचने का अचूक उपाय! इस पवित्र स्थान पर करें जलाभिषेक

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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