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अनोखी मान्यता! धनबाद का 100 साल पुराना शिव मंदिर, जहां शिवलिंग नहीं, बल्कि मूर्ती की होती है पूजा

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Agency:Bharat.one Jharkhand

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Dhanbad News: अक्सर शिव मंदिर में हमने शिवलिंग की पूजा की है, लेकिन धनबाद में एक ऐसा 100 साल पुराना शिव मंदिर है, जहां शिवलिंग नहीं, बल्कि मूर्ती की पूजा होती है.

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धनबाद

धनबाद का 100 साल पुराना ऐतिहासिक शिव मंदिर: जहां शिव, पार्वती और गणेश एक साथ विर

हाइलाइट्स

  • धनबाद का 100 साल पुराना शिव मंदिर अनोखी मान्यता रखता है।
  • मंदिर में शिवलिंग की बजाय शिव, पार्वती और गणेश जी की मूर्तियों की पूजा होती है।
  • महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष आयोजन और भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

धनबाद. धनबाद में एक ऐसा ऐतिहासिक शिव मंदिर स्थित है, जो लगभग 100 साल पुराना माना जाता है. यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. आमतौर पर शिव मंदिरों में शिवलिंग की पूजा की जाती है, लेकिन इस मंदिर में भगवान शिव के साथ माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं. मंदिर में शिवलिंग भी मौजूद है, लेकिन इसे विशेष रूप से वस्त्र से ढककर रखा गया है. यहाँ भक्तों द्वारा शिवलिंग की बजाय भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियों की पूजा की जाती है.

धनबाद के इस प्राचीन मंदिर की एक अनोखी मान्यता है. मंदिर के पुजारी कृष्ण मुरारी पांडे ने Bharat.one से बातचीत में बताया की यह मंदिर ऐतिहासिक महत्व रखता है और लोगों की आस्थाओं का केंद्र है. भक्त यहां अपनी मनोकामनाएँ लेकर आते हैं और ऐसा माना जाता है कि भगवान उनकी इच्छाएँ जरूर पूरी करते हैं. अधिकतर शिव मंदिरों में केवल शिवलिंग की पूजा होती है, क्योंकि महादेव की पूजा शिवलिंग में ही है , लेकिन इस मंदिर में शुरू से ही शिव की मूर्ति स्थापित है.

क्या है मान्यता?
इसी कारण, यहाँ शिवलिंग की पूजा के बजाय शिव, पार्वती और गणेश जी की मूर्तियों की पूजा की जाती है. पुजारी का कहना है कि जहां भगवान शिव हैं, वहाँ माता पार्वती का होना स्वाभाविक है, क्योंकि शिव संहारकर्ता हैं और माता पार्वती जगत जननी  हैं. वहीं, गणेश जी विघ्नहर्ता हैं, इसलिए इस मंदिर को अत्यंत मंगलकारी और पवित्र स्थल माना जाता है.

महाशिवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं. यह दिन शिव और पार्वती के विवाह का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं. भक्तगण शिव-पार्वती विवाह की पूजा-अर्चना करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दूर-दूर से आते हैं.इस मंदिर की दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा इसे धनबाद के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में शामिल करती है. भक्तों का मानना है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती और भगवान शिव, माता पार्वती तथा गणेश जी अपने भक्तों की मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण करते हैं.

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धनबाद का 100 साल पुराना शिव मंदिर, जहां शिवलिंग नहीं, बल्कि मूर्ती की पूजा

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