Maa Kalika Temple Bageshwar: बागेश्वर के कांडा को मां कालिका का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है. यहां मां कालिका को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि क्षेत्र में जब से काल का आतंक खत्म हुआ था, तब से यहां मां कालिका की विशेष पूजा होती है. यह मंदिर देश के प्रसिद्ध काली मंदिरों में से पांचवें स्थान पर आता है. पहले यहां मां कालिका को प्रसन्न करने के लिए पंच बलि दी जाती थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसके बदले मां कालिका को नारियल चढ़ाया जाता है.
बागेश्वर का मां कालिका मंदिर
Bharat.one से बातचीत करते हुए मंदिर के आचार्य मनोज पांडे ने बताया कि दसवीं शताब्दी में आदि जगदगुरु शंकराचार्य ने 1947 में मंदिर की स्थापना की थी. इसके बाद वर्ष 1998 में स्थानीय लोगों की मदद से मंदिर को भव्य रूप दिया गया. हिंदू धर्म में मां कालिका को जागृत देवी के रूप में पूजा जाता है. मां कालिका को देवी दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है.
कैसे खत्म हुआ काल का आतंक
पौराणिक कथाओं के अनुसार क्षेत्र में काल का भयंकर आतंक था. ऐसे में हर साल एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी, जिसे स्थानीय भाषा में नरबलि कहा जाता था. लेकिन कैलाश यात्रा के दौरान आदि जगद्गुरु शंकराचार्य कांडा क्षेत्र में पहुंचे, तो यहां के लोगों ने उन्हें अपनी परेशानी बताई. उन्होंने बिना किसी देरी से यहां के लोहारों से नौ कढ़ाई में बनवाई और अदृश्य काल को इन कढ़ाईयों के बीच दबाकर उसके ऊपर विशाल शीला रख दी. उस शिला के ऊपर मां कालिका के मंदिर की स्थापना कर दी. तब से क्षेत्र में आज तक मां कालिका की विशेष पूजा की जाती है.
मंदिर में आने से पूरी होती है मन्नत
मां कालिका क्षेत्र के लोगों के लिए तो कुलदेवी है, इसके साथ ही अन्य जिलों, राज्यों और देशभर के लोगों के लिए मनोकामना पूरी करने वाली माता है. यहां लोग संतान प्राप्ति, विवाह, घर में सुख-शांति, करियर में उन्नति समेत कई मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तब वह लोग माता को प्रसन्न करने के लिए मंदिर में कथा, देवी भागवत, शतचंडी महायज्ञ के साथ ही नारियल चढ़ाते हैं. मनोकामना पूरी करने के लिए माता का आभार जताते हैं.
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कैसे पहुंचे मां कालिका के दर्शन के लिए
मां कालिका के दर्शन के लिए सबसे पहले आपको बागेश्वर पहुंचना होगा. यहां पहुंचने के लिए मंदिर से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है. जिसकी मंदिर से दूरी लगभग 171 किलोमीटर है. या फिर आप टैक्सी बस की मदद और अपनी गाड़ी से सीधे बागेश्वर पहुंच सकते हैं. यहां पहुंचने के बाद बागेश्वर से 24 किलोमीटर की यात्रा कर आप कांडा पड़ाव पहुंचकर मां कालिका के दर्शन कर सकते हैं.
FIRST PUBLISHED : November 7, 2024, 11:46 IST
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