मंदिर के इतिहास के बारे में पुजारी मोनू पांडे ने बताया कि लगभग 50 साल पहले, फलाहारी बाबा नामक संत इस पहाड़ी पर ध्यान और यज्ञ किया करते थे. उन्हें स्वप्न में मां दुर्गा के दर्शन हुए. जिसके बाद उन्होंने इस स्थान पर एक छोटे से झोपड़ी नुमा मंदिर का निर्माण किया.

















