
Krishna Kund Madhuvan: तीर्थ नगरी मथुरा में कृष्ण की लीलाओं के साथ-साथ कई देवताओं ने अपनी लीलाएं दिखाईं. यहां भगवान विष्णु के अनेक भक्त थे. भक्त ध्रुव ने अपनी तपस्या से श्री हरि को प्रसन्न किया. इस तीर्थ स्थल पर मौजूद कुंड में स्नान करने से गया जाने जैसा फल मिलता है. तभी लोग यहां स्नान करने के लिए दूर-दूर से आते हैं. मान्यता है कि जिंदगी में जो कुछ भी गलत और भूल हुई हो वो इस कुंड में स्नान करने से दूर हो जाती है.
मथुरा से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है गांव मधुवन. इस गांव को कृष्ण की क्रीड़ा स्थली भी रही है. मधुवन गांव के इस कुंड में स्नान मात्र से ही बिहार के गया जितना फल मिलता है. मधुवन गांव स्थित इस कुंड में तर्पण करने से बहुत सारे फल मिलते हैं.
मधुवन कुंड में स्नान करने से मिलेंगे फल
मंदिर के पुजारी देवीदास महाराज ने बताया कि महोली गांव स्थित इस कुंड को मधुवन कुंड या कृष्ण कुंड के नाम से जाना जाता है. ध्रुवतीर्थमिति ख्यातंग तीर्थ मुख्यंग तथा परं यत्र स्नानकृतो मोक्षो ध्रुवे न संशय – इसके बाद ध्रुव तीर्थ का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है. जो व्यक्ति यहां स्नान करता है, उसे तुरन्त भवसागर से मुक्ति मिल जाती है. इसमें कोई संदेह नहीं है. स्कंद पुराण, मथुरा खंड में पुष्टि की गई है कि ध्रुव टीला पर अपने पूर्वजों को तर्पण करना गया के पवित्र स्थल पर तर्पण करने से 100 गुना अधिक शक्तिशाली है. ध्रुव तीर्थ पर किए गए, कोई भी पवित्र कार्य जैसे कि भगवान के पवित्र नामों का जाप, यज्ञ, तपस्या या दान अन्य पवित्र स्थानों पर किए गए कार्यों से सौ गुना अधिक प्रभावी है.
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स्कंद पुराण में किया गया है जिक्र
बता दें कि ब्रज चौरासी कोस का पहला पड़ाव इसी गांव से शुरू होता है. यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु इस कुंड में स्नान और यहां मंदिरों के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. इतना ही नहीं इस कुंड को भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी से खोदा था. यह पौराणिक कुंड आज भी भगवान कृष्ण की लीलाओं का साक्षी बना हुआ है. कृष्ण कुंड में अगर श्राद्ध पक्ष में तर्पण किया जाए, तो बिहार के गया जितना फल मिलता है और मृत आत्माओं की शांति के लिए भी यहां तर्पण होता है. स्कंद पुराण में भी मथुरा खंड की पुष्टि की गई है.
FIRST PUBLISHED : December 6, 2024, 17:01 IST
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