
Bageshwar: उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे कई पहाड़ी इलाकों में आज भी पारंपरिक मान्यताएं निभाई जाती हैं, इन्हीं में से एक परंपरा ब्रह्म कमल के फूलों की तोड़ने की भी है. इन फूलों को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. ये फूल अक्सर उच्च हिमालयी बुग्यालों में पाए जाते हैं. Bharat.one से खास बातचीत करते हुए पुजारी मोहन सिंह कोरंगा बताते हैं कि इन फूलों को खासतौर पर नंदाअष्टमी मेले के लिए तोड़ा जाता है, इन्हें तोड़ने के लिए कई पौराणिक नियमों का पालन किया जाता है.
सबसे पहले कई किलोमीटर की पैदल यात्रा की जाती है. बुग्याल में पहुंचकर दो समय का स्नान और एक समय का भोजन खाया जाता है. इन्हें तोड़ने से पहले फूलों की पूजा होती है. इसके बाद ब्रह्ममुहूर्त में इन फूलों को तोड़ जाता है, और मां भगवती को चढ़ाया जाता है. सभी नियमों का पालन करने के बाद ही फूल तोड़ सकते हैं.
बह्राकमल तोड़ने के नियम
ब्रह्म कमल अक्सर बुग्याल में उगता है, इसलिए इसे तोड़ने के लिए गांव से बुग्याल तक की पैदल यात्रा की जाती है. ब्रह्म कमल तोड़ने वाले पुजारी को स्थानीय भाषा में ‘जतर’ बोला जाता है. ये एक टाइम का शुद्ध शाकाहारी भोजन खाते हैं और दो समय स्नान करते है. जहां ब्रह्म कमल होते हैं, वहां मां भगवती का एक प्रतीकात्मक मंदिर होता है. जहां पहुंचने के बाद सभी पुजारी नंदाकुंड यानी कि पानी के तालाब में स्नान करते है. स्वयं स्नान के बाद शक्ति यानी कि मां भगवती को स्नान कराया जाता है.
हवन और भंडारा भी होता है
मंदिर में हवन होता है, गांव से लाया गया भंडार निकाला जाता है. जिसमें नव अनाज, फल और पूजा सामग्री होती है. फिर मंदिर में भंडार भरा जाता है. इसके बाद सभी पुजारियों का दल फूलों के बुग्यालों की तरफ जाता है और बुग्याल का एक हिस्सा चुना जाता है, जिसमें अच्छे फूल उगे हो. इन फूलों को ब्रह्ममुहूर्त में तोड़ा जाता है. एक-एक करके यह फूल टोकरी में भरे जाते हैं.
अंत में मंदिर में चढ़ाएं गए सबसे पहले फूल को भी टोकरी में रखा जाता है. फूलों से भरी टोकरियों को पीठ में रखकर गांव के मंदिर तक लाया जाता है. जहां भव्य ब्रह्म कमल यात्रा के बाद फूल मां भगवती को चढ़ाएं जाते है और फूलों को प्रसाद के रूप में सभी भक्तों में बांटा जाता है.
मां भगवती का प्रिय फूल ब्रह्मकमल
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बह्राकमल को मां भगवती का प्रिय फूल माना गया है. इस फूल को चढ़ाने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखती है. सामान्य तौर पर लोग पूजा के बाद प्रसाद के रूप में मिले ब्रह्म कमल को अपने घर की तिजोरी में भी रखते हैं, मान्यता है कि ऐसा करने से घर में समृद्धि, संपन्नता, अपार धन की वृद्धि होती है. ब्रह्म कमल में माता लक्ष्मी और विष्णु भगवान का वास होता है.
FIRST PUBLISHED : December 13, 2024, 08:38 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.















