Home Uncategorized इस श्मशान घाट के शवों को खा जाता था राक्षस; भगवान शिव...

इस श्मशान घाट के शवों को खा जाता था राक्षस; भगवान शिव ने की थी भक्तों की रक्षा! जानें क्या है पौराणिक कथा…

0
5



कांगड़ा. चामुंडा नंदिकेश्वर धाम जिसे चामुंडा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, यह धार्मिक स्थान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की धर्मशाला तहसील में पालमपुर से मात्र 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस धार्मिक स्थान की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर के किनारे बह रही बनेर खड्ड के किनारे एक श्मशान घाट है जंहा प्रतिदिन शव जलाया जाता है.

एक पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि इस स्थान पर एक समय जिंदावली नाम का राक्षस हुआ करता था, जो लोगो का नरसंहार किया करता था. इससे परेशान होकर उस समय के राजा ने उनसे विनम्र प्राथना की और निवेदन किया कि आप रोज कई लोगो का नरसंहार कर रहे हैं, ऐसे में तो एक हमारी प्रजा बहुत जल्द खत्म हो जायेगी. ऐसे में राक्षस ने कहा कि तुम तो अपनी प्रजा की रक्षा की बात कर रहे हो, परन्तु मेरी भूख का क्या? ऐसे में राजा ने राक्षस से कहा कि हम आपकी भूख के लिए प्रतिदिन एक जिन्दा व्यक्ति या मृत व्यक्ति देंगे जिससे आपकी भूख भी हट जायेगी और मेरी प्रजा भी जल्दी खत्म नहीं होंगी. ऐसे में कई वर्षो तक ऐसा चलता रहा.

गांव की महिला और भगवान शिव से जुड़ी कहानी
गांव में जब भी किसी की भी मृत्यु होती तो उसे उसके शव को राक्षस को दे दिया जाता और जिस दिन कोई शव नहीं होता तो उस दिन जिन्दा व्यक्ति राक्षस को सौंप दिया जाता. ऐसे में एक गांव में एक महिला के दो बेटे थे जिसमे से एक बेटे की बलि चढ़ गयी थी और अब दूसरे की बारी थी जिसे राक्षक को सौंपना था. ऐसे में महिला ने जिस दिन अपने बेटे को राक्षस के पास भेजना था, उस दिन महिला ने कई स्वादिष्ट पकवान बनाये और शिव भगवान को प्रसाद के रूप में चढ़ाया और भगवान शिव की आराधना की, ऐसे में भगवान शिव महिला की भक्ति और अपने बेटो के प्रति प्रेम को देखकर काफी प्रसन हुए, और एक साधू का रूप धारण कर महिला के पास पहुंचे.

महिला, साधू को देखकर महिला वही पकवान साधू को भी परोसे. ऐसे में महिला की नम आँखों को देकर जब साधू ने महिला से पूछा की तुम एक तरफ स्वादिष्ट पकवान भी बना रही हो और दूसरी तरफ रो भी रही हो ऐसा क्यों? ऐसे में महिला ने साधू को राक्षस जिंदावली की पूरी कहानी बताई. साधू ने महिला से कहा कि आप परेशान क्यों हो रही हो. आपके बेटे की जगह मैं चला जाता हूं. मेरे आगे पीछे वैसे भी कोई नहीं है. ऐसा करने से आपका बेटा भी बच जाएगा और राक्षस की भूख भी मिट जायेगी.

जब भगवान शिव साधु के भेष में राक्षस से मिले
जब साधू श्मशान पहुंचा तो उसने अपने आप को राक्षस को सौंप दिया. जैसे ही राक्षक ने उस साधू की बलि देनी चाही तो बड़ी-बड़ी चट्टानें और शिलायें उस राक्षस के ऊपर गिरने लगी. और उन्ही चट्टानों और शिलाओं के नीचे आकर उस राक्षस की मृत्यु हो गयी. ऐसे में राक्षक को जब अपने पापों का पच्यताप हुआ तो उसने भगवान शिव की उपासना की और जिसके बाद भगवान शिव ने प्रसन होकर राक्षस को कहा कि इस स्थान पर जो भी शव आएगा उसकी आत्मा मेरे चरणों में आएगी.

ध्यान और शांति की तलाश में आते हैं लोग
स्थानीय ओंकार ठाकुर ने बताया कि इस घाट पर ध्यान और साधना करने से आत्मा को शुद्धि और मुक्ति प्राप्त होती है. यह स्थान देवी की कृपा से ऊर्जावान और पवित्र माना जाता है. श्मशान घाट के पास की कुछ संरचनाएं और मूर्तियां प्राचीन कला और संस्कृति को दर्शाती हैं, जिनमें देवी-देवताओं की मूर्तियाँ शामिल हैं. आज भी यह स्थान धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना हुआ है और लोग यहां अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए आते हैं. भक्त और पर्यटक यहां ध्यान और शांति की तलाश में भी आते हैं. इस प्रकार, चामुंडा देवी मंदिर के पास का श्मशान घाट धार्मिक, पौराणिक, और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, जो जीवन और मृत्यु के गहरे दर्शन को व्यक्त करता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here