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ऐसी लागी लगन, 5000 km से आकर यहीं बस गई रश‍ियन… अब द‍िन-रात करती है एक ही काम

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कहते हैं ईश्‍वर से अगर क‍िसी की डोर जुड़ जाए तो उसके ल‍िए इस संसार की हर बाधा छोटी हो जाती है. इन्‍हीं सारी बाधाओं को पार कर एक रश‍ियन मह‍िला की भगवान से ऐसी लगन लगी कि वो अपना देश छोड़ अब भारत में ही आकर बस गई है. 30 साल पहले, पहली बार भारत आईं साशी ने अब वृंदावन को ही अपना घर बना ल‍िया है. रूस में टीवी शोज का डायरेक्‍शन करने वाली ये फिल्‍ममेकर अब 5000 km दूर भारत के वृंदावन में आकर क‍िशोरी जी और ब‍िहारी जी की भक्‍त‍ि में लीन हो गई है.

साशी ‘मेरा वृंदावन’ नाम के यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए बताती हैं, ‘मैं 30 साल पहले यहां आई थी. कुछ साल तो आती-जाती रही लेकिन प‍िछले 10 सालों से अब यही की हो गई हूं.’ साशी को वृंदावन में भगवान कृष्‍ण से ऐसा प्रेम हुआ कि अब यहीं की हो गई हैं. साशी कहती हैं, ‘वृंदावन में बहुत आनंद है. मैं ठाकुर जी देखती हूं तो मन करता है कि बार-बार उन्‍हें देखती रहूं. यहां हर घर तुलसी-ठाकुर जी पूजा होती है, तो यहीं अच्‍छा लगता है.’ साशी रश‍िया में टेलीव‍िजन फिल्‍म डायरेक्‍टर के तौर पर काम करती थीं. वह कई सारी डॉक्‍यूमेंट्री भी बना चुकी हैं. साशी फिल्‍म बनाने के साथ-साथ स‍िंग‍िंग भी करती थीं और अपने बैंड के साथ मंत्र और भजन गाती हैं.

Russian Girl came to India and settled in Vrindavan for krishna radha

साशी रश‍िया में टेलीव‍िजन फिल्‍म डायरेक्‍टर के तौर पर काम करती थीं.

फिल्‍म डायरेक्‍शन अच्‍छा था, पर आनंद नहीं था…
साशी से जब ह‍िंदी भाषा सीखने के बारे में पूछा गया तो वह कहती हैं, ‘मैं यहां संगीत सीखने आई थी. मुझे थोड़ी ह‍िंदी तो आती है, ताकि मेरा काम चल सके. पर मैंने ज्‍यादा ह‍िंदी नहीं सीखी क्‍योंकि मैं यहां कम लोगों से बात करती हूं.’ वह बताती हैं, जब से उन्‍होंने अपना फिल्‍में बनाने का काम छोड़ा है, वह बहुत खुश हैं क्योंकि उन्‍हें क‍िसी तरह का बोझ या तनाव नहीं है. वह बस यहां देवों की शरण में हैं, ठाकुर जी के दर्शन करती हैं और बहुत ही संतुष्‍ट हैं. यही आनंद है, फिल्‍म डायरेक्‍शन आनंद नहीं था, वो काम था.

रूस में सब झूठा आनंद ढूंढ रहे हैं
रूस में सबकी सोच पैसे और सेक्‍स के इर्द-गिर्द घूमती है. पर वृंदावन में यहां सबका मन क‍िशोरी जी और ठाकुर जी में लगा हुआ है. वहां के लोग इसील‍िए दुखी हैं, क्‍योंकि उन्‍हें सच्‍चे प्‍यार का अर्थ ही नहीं पता. वह कहती हैं, ‘आप पूछेंगे कि मैंने राधा-कृष्‍ण को देखा है तो मैं कहूंगी नहीं, लेकिन मैं उन्‍हें अपने आसपास महसूस करती हूं. इसलि‍ए मैं यहां रहती हूं.

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